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Azamgarh News: टपकती छत के नीचे बिजलीघर की ड्यूटी, कभी भी हो सकता है धराशायी
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विद्युत उपकेंद्र पवई के कार्यालय की फटी छत। संवाद
पवई क्षेत्र की बिजली व्यवस्था संभालने वाला विद्युत उपकेंद्र पवई खुद बदहाली की चपेट में है। करीब 60 वर्ष पुराने जर्जर भवन में कर्मचारी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करने को मजबूर हैं।
भवन की छत से बारिश में पानी टपकता है और दीवारों व छत का प्लास्टर जगह-जगह टूटकर गिर रहा है। दीवारों में पड़ी गहरी दरारें कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं।
बरसात में स्थिति और गंभीर हो जाती है। बारिश होते ही कार्यालय के कमरों में पानी टपकने लगता है और कई जगह फर्श पर पानी जमा हो जाता है। इससे बिजली उपकरणों के साथ महत्वपूर्ण अभिलेखों के भी खराब होने का खतरा बना रहता है।
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कर्मचारी विनोद कुमार, राहुल सोनी, आलोक कुमार और विक्रम सिंह के अनुसार छत का प्लास्टर कई बार अचानक टूटकर गिर चुका है। इससे ड्यूटी के दौरान हादसे की आशंका बनी रहती है। जर्जर भवन का असर कार्यालय के कामकाज पर भी पड़ा है।
छत से पानी टपकने के कारण कार्यालय में रखे कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खराब होने लगे थे। इसके चलते उपखंड कार्यालय को अस्थायी तौर पर किराये के भवन में स्थानांतरित करना पड़ा। इससे विभागीय कामकाज के साथ सरकारी धन पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
बृजेश सिंह, दीपक, मुन्ना सिंह आदि ने बताया कि जिस उपकेंद्र से क्षेत्र की बिजली व्यवस्था संचालित होती है, उसकी हालत ही बेहद खराब है। लोगों ने उच्च अधिकारियों से भवन का तत्काल निरीक्षण कराने, जर्जर हिस्सों की मरम्मत कराने और नए भवन का निर्माण जल्द शुरू कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि हादसा होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय विभाग को पहले ही कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
नए भवन के लिए छह बार भेजा रिमाइंडर
उपखंड अधिकारी मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि भवन की छत से पानी टपकने के कारण कार्यालय में रखे कंप्यूटर खराब हो रहे थे। इसी वजह से कार्यालय को कुछ दिनों के लिए किराये के भवन में स्थानांतरित किया गया है। नए भवन के निर्माण के लिए विभागीय अधिकारियों को छह बार रिमाइंडर भेजा जा चुका है।
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भवन की छत से बारिश में पानी टपकता है और दीवारों व छत का प्लास्टर जगह-जगह टूटकर गिर रहा है। दीवारों में पड़ी गहरी दरारें कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं।
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बरसात में स्थिति और गंभीर हो जाती है। बारिश होते ही कार्यालय के कमरों में पानी टपकने लगता है और कई जगह फर्श पर पानी जमा हो जाता है। इससे बिजली उपकरणों के साथ महत्वपूर्ण अभिलेखों के भी खराब होने का खतरा बना रहता है।
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कर्मचारी विनोद कुमार, राहुल सोनी, आलोक कुमार और विक्रम सिंह के अनुसार छत का प्लास्टर कई बार अचानक टूटकर गिर चुका है। इससे ड्यूटी के दौरान हादसे की आशंका बनी रहती है। जर्जर भवन का असर कार्यालय के कामकाज पर भी पड़ा है।
छत से पानी टपकने के कारण कार्यालय में रखे कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खराब होने लगे थे। इसके चलते उपखंड कार्यालय को अस्थायी तौर पर किराये के भवन में स्थानांतरित करना पड़ा। इससे विभागीय कामकाज के साथ सरकारी धन पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
बृजेश सिंह, दीपक, मुन्ना सिंह आदि ने बताया कि जिस उपकेंद्र से क्षेत्र की बिजली व्यवस्था संचालित होती है, उसकी हालत ही बेहद खराब है। लोगों ने उच्च अधिकारियों से भवन का तत्काल निरीक्षण कराने, जर्जर हिस्सों की मरम्मत कराने और नए भवन का निर्माण जल्द शुरू कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि हादसा होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय विभाग को पहले ही कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
नए भवन के लिए छह बार भेजा रिमाइंडर
उपखंड अधिकारी मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि भवन की छत से पानी टपकने के कारण कार्यालय में रखे कंप्यूटर खराब हो रहे थे। इसी वजह से कार्यालय को कुछ दिनों के लिए किराये के भवन में स्थानांतरित किया गया है। नए भवन के निर्माण के लिए विभागीय अधिकारियों को छह बार रिमाइंडर भेजा जा चुका है।