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सांवली के दर्द को मंच पर उकेरा
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Wed, 24 Dec 2014 11:55 PM IST
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सूत्रधार संस्थान द्वारा सिधारी स्थित राहुल प्रेक्षागृह में आयोजित ‘आरंगम-2014’ का समापन बुधवार को हुआ। दोपहर में संगोष्ठी और शाम को धोबिया नृत्य और ‘सात पालों वाली नाव’ नाटक के नाम रही। जिसमें ममता पंडित अपने सहज अभिनय से सांवली लड़की के बार-बार ठुकराए जाने के दर्द का भावपूर्ण मंचन किया।
अरंगम-2014 की आखिरी शाम सूत्रधार संस्थान की प्रस्तुति नाटक ‘सात पालों वाली नाव’ की प्रस्तुति हुई। जिसमें ममता पंडित ने अपने एकल अभिनय से सभी को प्रभावित किया। इस नाटक में ममता पंडित ने उस सांवली लड़की सविता के दर्द को प्रदर्शित किया जो शादी के लिए बार-बार दिखाई जाती है और हर बार लोग उसे देखकर शादी से इनकार कर देते हैं।
एक-एक कर उस लड़की को सत्रह बार शादी के लिए लोगों के सामने पेश किया जाता है लेकिन उसका आडंबरी सौंदर्य हर बार उसकी प्रतिभा और उसके सांवले पन को ठेंगा दिखा देता है। ‘सविता’ के मन में एक अनसुनी चीख दबी है, पसंद न किए जाने से पहले उसे बहुत कष्ट होता है। यह एक एकल अभिनय है जिसमें मंच पर ममता पंडित (एकल प्रस्तुति) मंच परे- संगीत, प्रकाश संचालन ने भी नाटक को जीवंत बना दिया। इसी क्रम में दोपहर को ‘आज का समय और रंगमंच’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी हुई। जिसमें वक्ताओं आज के समय और रंगमंच क्या है, और लोगों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है, पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी को कुंवर जी अग्रवाल, देवेंद्र राज अंकुर, आत्मजीत सिंह, सुमन कुमार, अमर नाथ तिवारी, कुबेरनाथ मिश्र, डा. वेद प्रकाश, राघवेंद्र मिश्र, जितेंद्र श्याम, सोनी पांडेय, डा. आरडी यादव आदि ने संबोधित किया। अध्यक्षता डा. कन्हैया सिंह और संचालन अभिषेक पंडित ने किया।
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शाम को लोकगीतों, के साथ ‘धोबिया’ नृत्य की प्रस्तुति हुई। कार्यक्रमों के समापन पर संस्था अध्यक्ष डा. सीके त्यागी ने कलाकारों को सम्मानित किया। अंत में कार्यक्रम की संयोजक ममता पंडित, डा. स्वास्ति सिंह और डा. अलका सिंह ने सभी का आभार प्रकट किया।
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अरंगम-2014 की आखिरी शाम सूत्रधार संस्थान की प्रस्तुति नाटक ‘सात पालों वाली नाव’ की प्रस्तुति हुई। जिसमें ममता पंडित ने अपने एकल अभिनय से सभी को प्रभावित किया। इस नाटक में ममता पंडित ने उस सांवली लड़की सविता के दर्द को प्रदर्शित किया जो शादी के लिए बार-बार दिखाई जाती है और हर बार लोग उसे देखकर शादी से इनकार कर देते हैं।
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एक-एक कर उस लड़की को सत्रह बार शादी के लिए लोगों के सामने पेश किया जाता है लेकिन उसका आडंबरी सौंदर्य हर बार उसकी प्रतिभा और उसके सांवले पन को ठेंगा दिखा देता है। ‘सविता’ के मन में एक अनसुनी चीख दबी है, पसंद न किए जाने से पहले उसे बहुत कष्ट होता है। यह एक एकल अभिनय है जिसमें मंच पर ममता पंडित (एकल प्रस्तुति) मंच परे- संगीत, प्रकाश संचालन ने भी नाटक को जीवंत बना दिया। इसी क्रम में दोपहर को ‘आज का समय और रंगमंच’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी हुई। जिसमें वक्ताओं आज के समय और रंगमंच क्या है, और लोगों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है, पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी को कुंवर जी अग्रवाल, देवेंद्र राज अंकुर, आत्मजीत सिंह, सुमन कुमार, अमर नाथ तिवारी, कुबेरनाथ मिश्र, डा. वेद प्रकाश, राघवेंद्र मिश्र, जितेंद्र श्याम, सोनी पांडेय, डा. आरडी यादव आदि ने संबोधित किया। अध्यक्षता डा. कन्हैया सिंह और संचालन अभिषेक पंडित ने किया।
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शाम को लोकगीतों, के साथ ‘धोबिया’ नृत्य की प्रस्तुति हुई। कार्यक्रमों के समापन पर संस्था अध्यक्ष डा. सीके त्यागी ने कलाकारों को सम्मानित किया। अंत में कार्यक्रम की संयोजक ममता पंडित, डा. स्वास्ति सिंह और डा. अलका सिंह ने सभी का आभार प्रकट किया।