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मरीजों की भीड़, डॉक्टर नदारद
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जिला अस्पताल में ओपीडी में नहीं मिले फिजीशियन डॉ. राजनाथ।
- फोटो : AZAMGARH
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बलरामपुर। जिला अस्पताल की ओपीडी का काफी बुरा हाल है। मरीजों की यहां भारी भीड़ उमड़ रही है लेकिन डॉक्टर समय से नहीं बैठ रहे हैं। जिसके चलते मरीजों को काफी दुश्वारियां झेलनी पड़ रही है। वर्तमान में सर्वाधिक मरीज सर्दी, खांसी, जुखाम और बुखार के अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनके इलाज के लिए फिजिशियन की ही ज्यादा जरूरत होती है और उन्हीं की ओपीडी 10 बजे तक खाली मिली, जबकि ओपीडी का समय सुबह आठ से दो बजे तक निर्धारित है। मरीज काफी दूर-दराज से आते हैं, उसके बाद बैठ कर इंतजार करने को मजबूर होते हैं।
अमर उजाला की टीम ने सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी की पड़ताल किया। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. चंद्राहास की ओपीडी 10 बजे खाली थी। कमरा नंबर 15 फिजिशियन डॉ. राजनाथ का है व कक्ष संख्या 16 में फिजिशियन डॉ. निर्मल बैठते हैं। ये दोनों भी सोमवार को हुई पड़ताल के दौरान 10.15 बजे तक अपनी ओपीडी में मौजूद नहीं मिले। सर्जन कक्ष में भी 10.10 तक कोई डॉक्टर नहीं मौजूद था। बाल रोग विशेषज्ञ कक्ष में चार-चार डॉक्टरों की ओपीडी होती है लेकिन सवा दस बजे तक यहां भी कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विमलेश भी अपनी ओपीडी में 10.25 तक नहीं पहुंचे थे। हड्डी रोग विभाग (ट्रामा सेंटर) में भी 10.40 तक ओपीडी में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। वर्तमान में अस्पताल की ओपीडी में सर्वाधिक मरीज सर्दी, खांसी, जुखाम, बुखार के मरीज पहुंच रहे है। इनके इलाज में फिजिशियन की अहम भूमिका होती है, लेकिन पड़ताल के दौरान जिला अस्पताल की ओपीडी में फिजिशियन ही सर्वाधिक नदारद मिले। मरीज 60 से 70 किमी की दूरी से आठ बजे के पूर्व अस्पताल पर पहुंच जाते है और फिर घंटों डॉक्टर के ओपीडी में बैठने का इंतजार करते हैं।
साढ़े 10 बजे तक बंद था सोनोग्राफी सेंटर
आजमगढ़। जिला अस्पताल के सोनोग्राफी सेंटर का भी काफी बुरा हाल है। साढ़े 10 बजे तक सोनोग्राफी सेंटर पर कोई नहीं पहुंचा था। गेट का ताला सफाई कर्मी ने खोल कर सफाई आदि तो कर दी थी लेकिन जिम्मेदारों के न मौजूद होने से यहां सोनोग्राफी को पहुंचे मरीज बरामदे में बैठ कर इंतजार करते नजर आ रहे थे।
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सुबह नौ बजे से सोनोग्राफी कराने के लिए बैठे है लेकिन कोई अब तक नहीं आया है। यहां की सारी व्यवस्था ही गड़बड़ हो गई है और जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे है। - शौर्य विश्वकर्मा निवासी ब्रह्मस्थान।
अस्पताल की ओपीडी सुबह आठ बजे से शुरू होती है। इसीलिए सुबह आठ बजे हम यहां पहुंच गए लेकिन अब तक डॉक्टर साहब नहीं बैठे हैं। भीड़ भी बढ़ती जा रही है। - सविता, निवासीनी सरदहां।
डॉ. विमलेश को दिखाने के लिए उनकी ओपीडी के बाहर सुबह आठ बजे से इंतजार कर रहे है इस समय साढ़े दस बजने को है लेकिन वे अब तक नहीं आए है। डॉक्टर के समय से न बैठने से परेशानी हो रही है। - उमेश कुमार, निवासी अहरौला।
जिला अस्पताल पर हम जैसे गरीब लोग ही इलाज के लिए आते हैं, लेकिन समय से डॉक्टर मौजूद न होने से बड़ी परेशानी होती है। आज सुबह आठ बजे से बैठ कर डॉक्टर का इंतजार कर रहे है। - ओम प्रकाश, निवासी महराजगंज।
ऐसा नहीं है कि ओपीडी में डॉक्टर नहीं बैठ रहे हैं। आठ से दो ओपीडी की टाइमिंग जरूर है लेकिन इसी बीच डॉक्टरों को राउंड भी करना होता है। हो सकता है कि जब आप की टीम पड़ताल को अस्पताल पहुंची हो उस समय डॉक्टर राउंडर पर रहे हो, फिर भी हर दिखवाते है कि सभी डॉक्टर ओपीडी में समय से बैठे ताकि मरीजों को दिक्कत न होने पाएं।
- डॉ. एके सिंह, प्रभारी एसआईसी, जिला अस्पताल आजमगढ़।
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अमर उजाला की टीम ने सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी की पड़ताल किया। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. चंद्राहास की ओपीडी 10 बजे खाली थी। कमरा नंबर 15 फिजिशियन डॉ. राजनाथ का है व कक्ष संख्या 16 में फिजिशियन डॉ. निर्मल बैठते हैं। ये दोनों भी सोमवार को हुई पड़ताल के दौरान 10.15 बजे तक अपनी ओपीडी में मौजूद नहीं मिले। सर्जन कक्ष में भी 10.10 तक कोई डॉक्टर नहीं मौजूद था। बाल रोग विशेषज्ञ कक्ष में चार-चार डॉक्टरों की ओपीडी होती है लेकिन सवा दस बजे तक यहां भी कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विमलेश भी अपनी ओपीडी में 10.25 तक नहीं पहुंचे थे। हड्डी रोग विभाग (ट्रामा सेंटर) में भी 10.40 तक ओपीडी में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। वर्तमान में अस्पताल की ओपीडी में सर्वाधिक मरीज सर्दी, खांसी, जुखाम, बुखार के मरीज पहुंच रहे है। इनके इलाज में फिजिशियन की अहम भूमिका होती है, लेकिन पड़ताल के दौरान जिला अस्पताल की ओपीडी में फिजिशियन ही सर्वाधिक नदारद मिले। मरीज 60 से 70 किमी की दूरी से आठ बजे के पूर्व अस्पताल पर पहुंच जाते है और फिर घंटों डॉक्टर के ओपीडी में बैठने का इंतजार करते हैं।
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साढ़े 10 बजे तक बंद था सोनोग्राफी सेंटर
आजमगढ़। जिला अस्पताल के सोनोग्राफी सेंटर का भी काफी बुरा हाल है। साढ़े 10 बजे तक सोनोग्राफी सेंटर पर कोई नहीं पहुंचा था। गेट का ताला सफाई कर्मी ने खोल कर सफाई आदि तो कर दी थी लेकिन जिम्मेदारों के न मौजूद होने से यहां सोनोग्राफी को पहुंचे मरीज बरामदे में बैठ कर इंतजार करते नजर आ रहे थे।
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सुबह नौ बजे से सोनोग्राफी कराने के लिए बैठे है लेकिन कोई अब तक नहीं आया है। यहां की सारी व्यवस्था ही गड़बड़ हो गई है और जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे है। - शौर्य विश्वकर्मा निवासी ब्रह्मस्थान।
अस्पताल की ओपीडी सुबह आठ बजे से शुरू होती है। इसीलिए सुबह आठ बजे हम यहां पहुंच गए लेकिन अब तक डॉक्टर साहब नहीं बैठे हैं। भीड़ भी बढ़ती जा रही है। - सविता, निवासीनी सरदहां।
डॉ. विमलेश को दिखाने के लिए उनकी ओपीडी के बाहर सुबह आठ बजे से इंतजार कर रहे है इस समय साढ़े दस बजने को है लेकिन वे अब तक नहीं आए है। डॉक्टर के समय से न बैठने से परेशानी हो रही है। - उमेश कुमार, निवासी अहरौला।
जिला अस्पताल पर हम जैसे गरीब लोग ही इलाज के लिए आते हैं, लेकिन समय से डॉक्टर मौजूद न होने से बड़ी परेशानी होती है। आज सुबह आठ बजे से बैठ कर डॉक्टर का इंतजार कर रहे है। - ओम प्रकाश, निवासी महराजगंज।
ऐसा नहीं है कि ओपीडी में डॉक्टर नहीं बैठ रहे हैं। आठ से दो ओपीडी की टाइमिंग जरूर है लेकिन इसी बीच डॉक्टरों को राउंड भी करना होता है। हो सकता है कि जब आप की टीम पड़ताल को अस्पताल पहुंची हो उस समय डॉक्टर राउंडर पर रहे हो, फिर भी हर दिखवाते है कि सभी डॉक्टर ओपीडी में समय से बैठे ताकि मरीजों को दिक्कत न होने पाएं।
- डॉ. एके सिंह, प्रभारी एसआईसी, जिला अस्पताल आजमगढ़।