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कड़ी सुरक्षा के बीच हुई अंत्येष्टि

Sat, 14 Nov 2015 11:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़ Updated Sat, 14 Nov 2015 11:45 PM IST
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The funeral took place amid tight security
देवईत ठूठवां गांव में देर रात को पिता-पुत्र की लाश पोस्टमार्टम होने के बाद घर पहुंची। शनिवार को एसडीएम मेहनगर ने नियम के तहत सारी सरकारी सुविधाओं का लाभ दिलवाने का आश्वासन देकर घरवालों को अंत्येष्टि के लिए राजी किया। इसके बाद भारी सुरक्षा के बीच घर से थोड़ी दूर मगई नदी के राजघाट पर दोनों की एक साथ अंत्येष्टि की गई। इस दौरान वहां आसपास के गांव वालों की भीड़ जुटी थी।
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बता दें कि देवईत ठूठवां गांव निवासी रामदेव यादव गुरुवार की सुबह ट्रैक्टर से खेत जोतवा रहे थे। इस दौरान ट्रैक्टर का पहिया बालचंद के खेत के मेड़ पर चढ़ गया। इससे नाराज बालचंद आदि ने रामदेव के घर पर हमला बोलकर रामदेव उसके बेटे गुड्डू, मीना देवी, बहू सुंदरी, चंदा और पोता इंद्रजीत को घायल कर दिए। रामदेव की मौके पर ही मौत हो गई। इलाज के दौरान प्राइवेट अस्पताल में गुड्डू की मौत हो गई।
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शनिवार की सुबह रामदेव के दरवाजे पर आसपास के गांव के लोग उमड़ पड़े। तनाव को देखते हुए मौके पर एडीएम वित्त एवं राजस्व वृजेश कुमार, एसपी नगर विनोद कुमार, एसडीएम मेहनगर बाबूलाल, सीओ लालगंज एसपी तोमर सिधारी, जहानागंज, तरवां, मेहनाजपुर, गंभीरपुर, निजामाबाद, रानी की सराय और देवगांव की पुलिस और पीएसी जवानों के साथ मौजूद रहे।
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एसडीएम ने घरवालों को नियम के तहत प्रत्येक सरकारी सुविधाओं का लाभ दिलवाने का आश्वासन दिया। इसके बाद परिवार के लोग अंतिम संस्कार करने पर राजी हुए। पुलिस वालों की देखरेख घर से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित मगई नदी के राजघाट पर अंतिम संस्कार हुआ। वहां मौजूद लोगों की जुबान पर बस इसी घटना की चर्चा थी। सीओ लालगंज एसपी तोमर ने बताया कि बालचंद यादव, सोनू और संजय को गिरफ्तार कर लिया गया है। जबकि दीपचंद, फूलचंद और टिल्ठू फरार हैं। इनकी तलाश की जा रही है।

मेड़ तो बहाना, केस के फैसले से था तनाव : देवईत ठूठवां गांव में पिता-पुत्र की हत्या तो खेत के मेड़ पर ट्रैक्टर चढ़ जाने का बहाना था, जो आरोपियों के भीतर की आग को हवा दे दी। दरअसल मुख्य आरोपी के खिलाफ चल रहे हत्या के प्रयास के मुकदमे में शनिवार को फैसला सुनाया जाना है। जमानत पर छूटे आरोपी को लगा कि अब फैसले के बाद वह पुन: जेल चला जाएगा। इस बात को लेकर तनाव चल रहा था।

गांववालों के मुताबिक, रामदेव और बालचंद आपस में चाचा-भतीजा थे। रामदेव की गांव के एक व्यक्ति से घनिष्ठता थी। यह बात बालचंद और उसके भाइयों को नागवार लगती थी। पांच भाइयों में बालचंद जिद्दी था। उससे उसके भाई भी भय खाते थे। उसका एक भाई अपने हिस्से की जमीन बेचकर दूसरे गांव में बस गया है। देवईत गांव के बुजुर्गों ने बताया कि 2000 में रामदेव और बालचंद का परिवार अलग हो गया।


2002 में जमीन बंटवारे के विवाद में मारपीट हुई। बालचंद ने चाचा रामदेव के बेटे सुभाष को गोली मार दी। सुभाष बच गया और बालचंद के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज हो गया। उधर, बालचंद काफी दिनों बाद जमानत पर छूटकर आया था। 14 नवंबर को इस मामले में फैसला आने वाला है। बालचंद और उसके भाई सजा सुनाए जाने से तनाव में थे। गुरुवार को मेड़ पर ट्रैक्टर चढ़ने का बहाना मिलने पर उनका गुस्सा फूट पड़ा।
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