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एसटीएफ पर फायरिंग कर 50 हजार का इनामी फरार
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Wed, 05 Aug 2015 11:58 PM IST
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गंभीरपुर क्षेत्र के विषहम गांव के पास मंगलवार की रात 50 हजार का इनामी बदमाश धर्मेंद्र सिंह वाराणसी की एसटीएफ पर फायरिंग करते हुए भाग निकला, जबकि उसका एक साथी जयहिंद यादव हत्थे चढ़ गया। तलाशी में एसटीएफ को उसके पास से एक पिस्टल मिली। पूछताछ में उसने जहां कई हत्याओं में शामिल होना स्वीकार किया वहीं ये भी बताया कि वे दोनों 50 हजार के इनामी आशीष चौबे की मौत का बदला लेने जा रहे थे।
एसओ गंभीरपुर सुरेंद्र नाथ वर्मा के मुताबिक एसटीएफ वाराणसी यूनिट के निरीक्षक शैलेंद्र प्रताप सिंह को मुखबिर के जरिये सूचना मिली कि तरवां थाने के खुटहन गांव निवासी 50 हजार रुपये का इनामी बदमाश धर्मेंद्र सिंह और इसी थाना क्षेत्र के खिलवां गांव निवासी जयहिंद यादव आजमगढ़ में मौजूद हैं। दोनों किसी की हत्या करने मेहनगर की तरफ जाने वाले हैं।
जानकारी मिलने के बाद शैलेंद्र प्रताप सिंह अपनी टीम के साथ विषहम गांव तिराहे पर घात लगाकर बैठ गए। कुछ देर बाद ही धर्मेंद्र और जयहिंद आते दिखे। पुलिस टीम ने जब बाइक सवार इन बदमाशों को रुकने का इशारा किया तो उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। अपना बचाव करते हुए पुलिस वालों ने जयहिंद को तो पकड़ लिया, लेकिन धर्मेंद्र भाग निकला।
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एसटीएफ को तलाशी के दौरान जयहिंद के पास से पिस्टल मिली। पूछताछ में उसने बताया कि उन्होंने 19 जुलाई को मऊ के चिरैयाकोट में झंडा चौबे और 14 जुलाई को मऊ के रानीपुर के रहने वाले प्रभु शंकर पांडेय की हत्या की थी। जयहिंद के अनुसार मऊ निवासी 50 हजार के ईनामी बदमाश आशीष चौबे की वाराणसी में मौत के बाद झंडा चौबे ने मिठाई बांटी थी इसलिए उसे मारा गया, जबकि प्रभु शंकर ने मुखबिरी की थी।
एसओ के मुताबिक जयहिंद यादव 13 जुलाई को जेल से बाहर आया था और अगले ही दिन उसने प्रभु शंकर की हत्या कर दी। आजमगढ़ जेल में बंद चर्चित बदमाश सचिन पांडेय के इशारे पर दोनों किसी की हत्या करने जा रहे थे, मगर इससे पहले ही जयहिंद पुलिस के हत्थे चढ़ गया।
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एसओ गंभीरपुर सुरेंद्र नाथ वर्मा के मुताबिक एसटीएफ वाराणसी यूनिट के निरीक्षक शैलेंद्र प्रताप सिंह को मुखबिर के जरिये सूचना मिली कि तरवां थाने के खुटहन गांव निवासी 50 हजार रुपये का इनामी बदमाश धर्मेंद्र सिंह और इसी थाना क्षेत्र के खिलवां गांव निवासी जयहिंद यादव आजमगढ़ में मौजूद हैं। दोनों किसी की हत्या करने मेहनगर की तरफ जाने वाले हैं।
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जानकारी मिलने के बाद शैलेंद्र प्रताप सिंह अपनी टीम के साथ विषहम गांव तिराहे पर घात लगाकर बैठ गए। कुछ देर बाद ही धर्मेंद्र और जयहिंद आते दिखे। पुलिस टीम ने जब बाइक सवार इन बदमाशों को रुकने का इशारा किया तो उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। अपना बचाव करते हुए पुलिस वालों ने जयहिंद को तो पकड़ लिया, लेकिन धर्मेंद्र भाग निकला।
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एसटीएफ को तलाशी के दौरान जयहिंद के पास से पिस्टल मिली। पूछताछ में उसने बताया कि उन्होंने 19 जुलाई को मऊ के चिरैयाकोट में झंडा चौबे और 14 जुलाई को मऊ के रानीपुर के रहने वाले प्रभु शंकर पांडेय की हत्या की थी। जयहिंद के अनुसार मऊ निवासी 50 हजार के ईनामी बदमाश आशीष चौबे की वाराणसी में मौत के बाद झंडा चौबे ने मिठाई बांटी थी इसलिए उसे मारा गया, जबकि प्रभु शंकर ने मुखबिरी की थी।
एसओ के मुताबिक जयहिंद यादव 13 जुलाई को जेल से बाहर आया था और अगले ही दिन उसने प्रभु शंकर की हत्या कर दी। आजमगढ़ जेल में बंद चर्चित बदमाश सचिन पांडेय के इशारे पर दोनों किसी की हत्या करने जा रहे थे, मगर इससे पहले ही जयहिंद पुलिस के हत्थे चढ़ गया।