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किसी ने डर तो किसी ने रोजी के लिए छोड़ा गांव
ब्यूरो/अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Thu, 19 May 2016 12:04 AM IST
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खुदादादपुर में हिंसा
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खुदादादपुर में बवाल का असर निजामाबाद और सरायमीर थाना क्षेत्र के लोगों को भी भुगतना पड़ रहा है। किसी ने पुलिस की कार्रवाई के डर से तो किसी ने रोजी की तलाश में गांव छोड़ दिया है। रोजी के लिए गांव छोड़ने वालों में वह रोज कमाने खाने वाले कामगार अधिक हैं जिनके घर में पांच दिनों से फाकाकशी की नौबत है।
खुदादादपुर में अभी भी जनजीवन पूरी तरह से सामान्य नहीं हो पाया है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती होने के कारण दो लोग एक साथ निकलने से कतरा रहे हैं। पुलिस अब चिह्नित लोगों की गिरफ्तारी के लिए रात में गांवों में दबिश डाल रही है। पकड़े जाने के भय से बड़ी संख्या में लोगों ने घर छोड़ दूसरा ठिकाना बना लिया है।
गांव के दलित समुदाय के जिन लोगों की मड़इयां जला दी गईं थीं वो लोग भी घर छोड़ कर रिश्तेदारों के यहां जा चुके हैं। मुसाफिर के परिवार के सभी लोग रानी की सराय में रिश्तेदारी में रह रहे हैं। इसके अलावा बड़ी तादाद में दूसरे समुदाय के लोगों ने भी घर छोड़ दिया है। इनमें मजदूरी करने वाले वह दलित भी हैं, जिन्हें माहौल खराब होने के कारण कहीं काम नहीं मिल रहा है।
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गांवों में दोनों समुदायों के अन्य कई लोगों के घरों में ताले लटके हैं। खुदादादपुर के पूर्व प्रधान लालचंद ने बताया कि गांव के केदारराम, सीताराम, चंद्रेश, श्रीपत और फूलचंद के परिवार के लोगों को रिश्तेदारियों में भेज दिया गया है। लोग हिंसक घटनाओं से डरे हैं। काम न मिलने के चलते घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो गया है।
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खुदादादपुर में अभी भी जनजीवन पूरी तरह से सामान्य नहीं हो पाया है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती होने के कारण दो लोग एक साथ निकलने से कतरा रहे हैं। पुलिस अब चिह्नित लोगों की गिरफ्तारी के लिए रात में गांवों में दबिश डाल रही है। पकड़े जाने के भय से बड़ी संख्या में लोगों ने घर छोड़ दूसरा ठिकाना बना लिया है।
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गांव के दलित समुदाय के जिन लोगों की मड़इयां जला दी गईं थीं वो लोग भी घर छोड़ कर रिश्तेदारों के यहां जा चुके हैं। मुसाफिर के परिवार के सभी लोग रानी की सराय में रिश्तेदारी में रह रहे हैं। इसके अलावा बड़ी तादाद में दूसरे समुदाय के लोगों ने भी घर छोड़ दिया है। इनमें मजदूरी करने वाले वह दलित भी हैं, जिन्हें माहौल खराब होने के कारण कहीं काम नहीं मिल रहा है।
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गांवों में दोनों समुदायों के अन्य कई लोगों के घरों में ताले लटके हैं। खुदादादपुर के पूर्व प्रधान लालचंद ने बताया कि गांव के केदारराम, सीताराम, चंद्रेश, श्रीपत और फूलचंद के परिवार के लोगों को रिश्तेदारियों में भेज दिया गया है। लोग हिंसक घटनाओं से डरे हैं। काम न मिलने के चलते घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो गया है।