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दबाव में नहीं हो सकी 55 की गिरफ्तारी
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
Updated Thu, 20 Oct 2016 12:00 AM IST
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- फोटो : डेमो फोटो
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निजामाबाद थाना क्षेत्र के खुदादादपुर गांव में 14 मई की रात हुए बवाल के मामले में आरोपी बनाए गए 55 लोगों की अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। खुलेआम घूम रहे इन आरोपियों में सीओ सदर केके सरोज को गोली मारने वाले बदमाश भी शामिल हैं। राजनीतिक दबाव के चलते आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से क्षेत्र के पीड़ितों में नाराजगी है।
बता दें कि तीन मई को ऑटो के किराए के मामूली विवाद में खुदादादपुर गांव निवासी मुसाफिर राम और बगल के फरिदाबाद गांव निवासी कुछ लोगों में विवाद हुआ था। पुलिस की तत्परता के चलते यह मामला तो शांत हो गया लेकिन इसकी चिंगारी 14 मई की रात पुन: धधक उठी और एक समुदाय के लोग ललकारते हुए दलित बस्ती में हमला बोल दिया। कई लोगों के घरों में लूटपाटकर उसमें आग लगा दी गई। दरवाजे के बाहर खड़ी स्कार्पियो, बाइक आदि भी तोड़ डाले। मनबढ़ों ने विवाद शांत कराने पहुंची पुलिस पर भी लाठी और गोलियां चलाई, जिसमें तत्कालीन सीओ सदर केके सरोज घायल हो गए थे। जबकि एसडीएम निजामाबाद समेत कई अधिकारी और पुलिसकर्मी ईंट पत्थर की चोट से घायल हुए थे।
विवाद की यह चिंगारी निजामाबाद के अलावा सरायमीर और गंभीरपुर थाना क्षेत्र में भी फैल गई। हालात यह उत्पन्न हो गए कि स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए एडीजी कानून एवं व्यवस्था दलजीत चौधरी के यहां कैंप करना पड़ा था। बमुश्किल हालात पर काबू पाया गया। घटना के लिए जिम्मेदार मानते हुए तत्कालीन मंडलायुक्त आरपी गोस्वामी, डीआईजी उमेशचंद्र श्रीवास्तव और एसपी दयानंद मिश्रा को हटा दिया गया।
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घटना के संबंध में निजामाबाद थाने में कुल 11 मामले, सरायमीर थाने में आठ और गंभीरपुर थाने में दो मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। चूंकि घटना का केंद्र निजामाबाद थाना क्षेत्र रहा। इसलिए यहां की पुलिस तत्परता से कार्रवाई से करते हुए 69 आरोपियों की पहचान की गई थी जिसमें से महज 14 की ही गिरफ्तारी हो सकी। इस मामले में शेष 55 आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी। सूत्रों की मानें तो खुदादादपुर बवाल मामले में आरोपी राजनीतिक पकड़ रखने वाले हैं। इसके चलते इनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई।
जिन आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है, उनके विरुद्ध आरोप पत्र तैयार कर न्यायालय में दाखिल कर दिया गया है। कोर्ट से वारंट जारी होने पर उनकी गिरफ्तारी की जाएगी।
- कुंतल किशोर, पुलिस अधीक्षक
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बता दें कि तीन मई को ऑटो के किराए के मामूली विवाद में खुदादादपुर गांव निवासी मुसाफिर राम और बगल के फरिदाबाद गांव निवासी कुछ लोगों में विवाद हुआ था। पुलिस की तत्परता के चलते यह मामला तो शांत हो गया लेकिन इसकी चिंगारी 14 मई की रात पुन: धधक उठी और एक समुदाय के लोग ललकारते हुए दलित बस्ती में हमला बोल दिया। कई लोगों के घरों में लूटपाटकर उसमें आग लगा दी गई। दरवाजे के बाहर खड़ी स्कार्पियो, बाइक आदि भी तोड़ डाले। मनबढ़ों ने विवाद शांत कराने पहुंची पुलिस पर भी लाठी और गोलियां चलाई, जिसमें तत्कालीन सीओ सदर केके सरोज घायल हो गए थे। जबकि एसडीएम निजामाबाद समेत कई अधिकारी और पुलिसकर्मी ईंट पत्थर की चोट से घायल हुए थे।
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विवाद की यह चिंगारी निजामाबाद के अलावा सरायमीर और गंभीरपुर थाना क्षेत्र में भी फैल गई। हालात यह उत्पन्न हो गए कि स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए एडीजी कानून एवं व्यवस्था दलजीत चौधरी के यहां कैंप करना पड़ा था। बमुश्किल हालात पर काबू पाया गया। घटना के लिए जिम्मेदार मानते हुए तत्कालीन मंडलायुक्त आरपी गोस्वामी, डीआईजी उमेशचंद्र श्रीवास्तव और एसपी दयानंद मिश्रा को हटा दिया गया।
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घटना के संबंध में निजामाबाद थाने में कुल 11 मामले, सरायमीर थाने में आठ और गंभीरपुर थाने में दो मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। चूंकि घटना का केंद्र निजामाबाद थाना क्षेत्र रहा। इसलिए यहां की पुलिस तत्परता से कार्रवाई से करते हुए 69 आरोपियों की पहचान की गई थी जिसमें से महज 14 की ही गिरफ्तारी हो सकी। इस मामले में शेष 55 आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी। सूत्रों की मानें तो खुदादादपुर बवाल मामले में आरोपी राजनीतिक पकड़ रखने वाले हैं। इसके चलते इनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई।
जिन आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है, उनके विरुद्ध आरोप पत्र तैयार कर न्यायालय में दाखिल कर दिया गया है। कोर्ट से वारंट जारी होने पर उनकी गिरफ्तारी की जाएगी।
- कुंतल किशोर, पुलिस अधीक्षक