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हक हिस्सा न देने पर बेटे ने ही की थी हत्या

Fri, 18 May 2018 11:48 PM IST
Updated Fri, 18 May 2018 11:48 PM IST
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हक हिस्सा न देने पर बेटे ने ही की थी हत्या

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आजमगढ़। नगर पंचायत महराजगंज के सहदेवगंज मोड़ पर स्थित किराए के कमरा में रह रहे रिटायर सिपाही लालजी यादव की 15 मई की रात गला रेतकर हत्या कोई और नहीं बल्कि उसके सगे छोटे बेटे ने की थी। शुक्रवार की सुबह महराजगंज थाने की पुलिस उसे क्षेत्र के शिवपुर मोड़ से गिरफ्तार करने के बाद इस बात का खुलासा की। पुलिस के मुताबिक मृत सिपाही ना तो अपने बच्चों को हक हिस्सा दिया, ना ही उनकी परवरिश में ही कोई सहयोग किया था। वह करीब 25 वर्षों से अपने परिवार से अलग रह रहा था। लालजी की सारी बातों को भूल उसकी पत्नी और बच्चे उसे अपने साथ रखने के लिए बीते दस दिनों से लगातार मना रहे थे। बावजूद इसके वह तैयार नहीं हुआ। जिसके चलते बेटे ने घटना को अंजाम दिया।
एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी त्रिलोकी यादव महराजगंज थाना क्षेत्र के सैदपुर गांव का निवासी है। एसपी ग्रामीण ने बताया कि सैदपुर गांव निवासी लालजी यादव सिपाही था। वह वर्ष 2014 में गोरखपुर जिले से दीवान के पद से रिटायर हुआ था। तीन बेटा और तीन बेटियों का पिता लालजी अपनी पत्नी और बच्चों से कोई संबंध नहीं रखता था। वह रिटायर होने के बाद महराजगंज कस्बे के सहदेवगंज मोड़ पर स्थित किराए के कमरा में रहता था। 15 मई की रात लालजी के सिर पर कुदाल और धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या कर दी गई। इस दौरान मकान मालिक के बेटे मुबारक ने घटना के संबंध में त्रिलोकी के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तभी से पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई थी। शुक्रवार को मुखबिर के जरिए सूचना मिलने पर एसओ महराजगंज अश्वनी पांडेय ने शिवपुर मोड़ से त्रिलोकी को गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त कुदाल और हंसिया बरामद कर ली गई। पूछताछ के दौरान त्रिलोकी ने बताया कि जब वह पैदा हुआ तभी से उसके पिता, मां और उसके भाई बहनों को त्याग दिया। चंदा लगाकर बहनों की किसी तरह से शादी की गई। त्रिलोकी ने बताया कि वह अपने पिता को साथ लेकर घर रहना चाहता था। इसलिए अपनी मां को लेकर उनके कमरे पर गया और लगातार दस दिनों तक उन्हें समझाता रहा। जब वह नहीं मानें तो वह 15 मई को अपनी मां के साथ अराजी अमानी गांव स्थित ननिहाल पहुंचा दिया और पुन: पिता के कमरे पर आ गया। रात करीब दस बजे वह सोया हुआ था। जबकि उसके पिता इधर-उधर टहल रहे थे। पिता की हरकतों से परेशान हो त्रिलोकी ने पहले कुदाल से सिर पर प्रहार कर घायल कर दिया। इसके बाद हंसिए से गला रेतकर फरार हो गया। जाते समय वह पिता की बाइक भी अपने साथ लेकर चला गया। पुलिस गिरफ्तार त्रिलोकी का चालान कर दी।
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मेरे पैदा होने पर त्यागे और मैं मिलाना चाहता था
आजमगढ़। एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह के आफिस में घटना का खुलासा करते हुए त्रिलोकी यादव ने बताया कि जब वह पैदा हुआ, तभी पिता लालजी यादव ने उसकी मां और भाई बहनों को छोड़ दिया। इसलिए वह चाहता था कि उसी के माध्यम से पिता मानें और सभी लोग साथ घर चलकर रहे। त्रिलोकी ने बताया कि यह आज तक समझ में नहीं आया कि वह किस कारण से उन सभी को छोड़ दिए थे।
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ननिहाल में परवरिश, चंदा लगाकर हुई शादी
आजमगढ़। अपनी व्यथा बया करते हुए हत्यारोपी बेटा त्रिलोकी यादव ने कहा कि वह तीन भाई और तीन बहन है। पिता के ठुकराने के बाद मां भाई बहनों को अपने साथ लेकर अराजी अमानी स्थित ननिहाल चली गई। वहीं पर सभी भाई बहनों की परवरिश हुई। जबकि गांव के लोगों ने चंदा इकट्ठा करके बहनों की शादी करवाई। जिस बच्चों के पिता जिंदा होने के बाद भी उनसे दूर रहे और चंदा लगाकर उसके बेटियों की शादी हो। ऐसे में उसके बच्चे किस शान से समाज में सिर उठाकर चल सकते हैं। यही बात बार-बार गलत कार्य के लिए मजबूर की।
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मैं नहीं मारता तो वे मुझे मार देते
आजमगढ़। किस तरह से अपने पिता की हत्या को अंजाम देने के घटना को बताते हुए आरोपी बेटा त्रिलोकी यादव ने कहा कि 15 मई को जब उसके पिता लालजी यादव घर पर साथ चलने के लिए राजी नहीं हुए तो अपनी मां प्रभावती देवी को ननिहाल पहुंचाकर पिता के कमरे पर लौट आया। भोजन करने के बाद रात करीब दस बजे सो गया, लेकिन उसके पिता सुबह तक अंजाम चखाने की धमकी देते हुए इधर-उधर टहल रहे थे। उनकी निगाह बार-बार रखी गई कुदाल पर जा रही थी। इससे बेटे त्रिलोकी को शक हुआ कि कहीं वह कुदाल से सोते समय उसकी हत्या न कर दें। इसी को ध्यान में रखते हुए वह पिता से पहले ही उनके ऊपर हमला बोल उसकी हत्या कर दी।

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पुलिस टीम को मिला पुरस्कार
आजमगढ़। एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि विभाग के रिटायर कर्मचारी की हत्या का खुलासा करने में सीओ सगड़ी सुधाकर सिंह और एसओ महराजगंज अश्वनी पांडेय की भूमिका सराहनीय रही। उनके इस कार्य से प्रसन्न होकर डीआईजी आजमगढ़ परिक्षेत्र विजय भूषण की तरफ से दस हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।
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