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पोतों की हत्या से टूटी वृद्ध कैलाश की कमर
Updated Sun, 27 Aug 2017 12:37 AM IST
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सठियांव। मुबारकपुर थाना क्षेत्र के सरदारपुर बाबू गांव में शनिवार की शाम फावड़े से दो बेटों की हत्या करने वाले पिता महेंद्र यादव को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पोतों की हत्या और बेटे को जेल हो जाने से वृद्ध कैलाश की मानो कमर ही टूट गई। वहीं बच्चों की मां आशा देवी का रो-रोकर हाल बेहाल है। गांव के लोग भी इस दर्दनाक घटना से हैरान हैं।
ग्राम प्रधान सुरेश यादव ने बताया कि कैलाश यादव की आर्थिक स्थिति भले ही इन दिनों डांवाडोल चल रही है लेकिन किसी जमाने में इसका जलवा था। खेती के शौकीन कैलाश यादव सिंचाई आदि के सारे संसाधन से संपन्न थे। इकलौते बेटे महेंद्र को इतना अधिक प्यार करते थे कि उसे कहीं बाहर नौकरी करने नहीं भेजा। वृद्ध कैलाश के परिवार में उनका बेटा-बहू और दो पोते और एक पोती थी। दो माह पूर्व महेंद्र का मानसिक रूप से बीमार हो जाने के बाद से कैलाश उसका इलाज करवा रहे थे। दोनों पोते अंश और आदित्य उनके आंख के तारे और जीवन का सहारा थे। लेकिन शनिवार को बेटा महेंद्र द्वारा इन दोनों मासूम की हत्या कर दिए जाने के बाद मानो कैलाश की कमर ही टूट गई। ग्राम प्रधान सुरेश यादव ने बताया कि महेंद्र के दिल में ना जाने क्या बात समा गई कि उसने अपने दोनों बेटों की हत्या कर दिया, अन्यथा वह भी अपने बच्चों को बहुत प्यार करता था। अंश और आदित्य की मौत के बाद उसकी मां आशा देवी का रो-रोकर हाल बेहाल है।
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ग्राम प्रधान सुरेश यादव ने बताया कि कैलाश यादव की आर्थिक स्थिति भले ही इन दिनों डांवाडोल चल रही है लेकिन किसी जमाने में इसका जलवा था। खेती के शौकीन कैलाश यादव सिंचाई आदि के सारे संसाधन से संपन्न थे। इकलौते बेटे महेंद्र को इतना अधिक प्यार करते थे कि उसे कहीं बाहर नौकरी करने नहीं भेजा। वृद्ध कैलाश के परिवार में उनका बेटा-बहू और दो पोते और एक पोती थी। दो माह पूर्व महेंद्र का मानसिक रूप से बीमार हो जाने के बाद से कैलाश उसका इलाज करवा रहे थे। दोनों पोते अंश और आदित्य उनके आंख के तारे और जीवन का सहारा थे। लेकिन शनिवार को बेटा महेंद्र द्वारा इन दोनों मासूम की हत्या कर दिए जाने के बाद मानो कैलाश की कमर ही टूट गई। ग्राम प्रधान सुरेश यादव ने बताया कि महेंद्र के दिल में ना जाने क्या बात समा गई कि उसने अपने दोनों बेटों की हत्या कर दिया, अन्यथा वह भी अपने बच्चों को बहुत प्यार करता था। अंश और आदित्य की मौत के बाद उसकी मां आशा देवी का रो-रोकर हाल बेहाल है।
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