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विरोध की चुकानी पड़ी कीमत, राजनीतिक लड़ाई में फंसाया गया

Mon, 27 Nov 2017 11:50 PM IST
Updated Mon, 27 Nov 2017 11:50 PM IST
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विरोध की चुकानी पड़ी कीमत, राजनीतिक लड़ाई में फंसाया गया
आजमगढ़। सजा सुनाए जाने के बाद पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विक्रम सिंह, गोविंदपुर गांव निवासी पूर्व ब्लाक प्रमुख लालजी सिंह के पुत्र शैलेश सिंह उर्फ पिंकू, अजय कुमार सिंह उर्फ पप्पू की आंखें नम थीं। विक्रम सिंह ने कहा कि सपा महासचिव के विरोध की कीमत उन्हें चुकानी पड़ी। उन्होंने बलराम यादव के खिलाफ चुनाव लड़ा था। 2007 में इन्हीं के दम पर भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र मिश्र ने बलराम यादव को हराया था। इसीलिए बलराम यादव उनसे राजनीतिक रंजिश रखते थे। हत्या की इस वारदात में संलिप्तता से उन्होंने इंकार किया। कहा कि बलराम के इशारे पर उन्हें फंसाया गया।
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विक्रम सिंह ने कहा कि 2002 में वो जिला पंचायत सदस्य बने और उसी साल अध्यक्ष भी बने। उन्होंने भाजपा के टिकट पर सपा महासचिव बलराम यादव के खिलाफ अतरौलिया विधानसभा से चुनाव भी लड़ा था, लेकिन हार गए। 2007 में बलराम के खिलाफ बसपा से सुरेंद्र मिश्रा ने चुनाव लड़ा था। उन्हें भी चुनाव विक्रम सिंह ने ही लड़ाया था। सुरेंद्र मिश्रा से बलराम यादव पराजित हो गए थे। विक्रम सिंह के अनुसार उसी समय से बलराम यादव उनसे राजनीतिक रंजिश रखते थे। उन्हें मेरा बढ़ता राजनीतिक कद पसंद नहीं था। इन्हीं कारणों से बलराम यादव के इशारे पर उन्हें फंसाया गया। उन्होंने कहा कि सजा के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील की जाएगी। पूर्व ब्लाक प्रमुख लालजी सिंह के पुत्र शैलेश सिंह उर्फ पिंकू, अजय कुमार सिंह उर्फ पप्पू ने भी उनके बयानों से सहमति जताया।
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कोर्ट के फैसले से अतरौलिया में चर्चा का बाजार गरम
-कोर्ट से सुनाई गई सजा पर पीड़ित पक्ष ने जताया संतोष
अमर उजाला ब्यूरो
अतरौलिया। 22 दिसंबर 2010 को अतरौलिया ब्लाक प्रमुख चुनाव के दौरान हुई दो लोगों की हत्या के मामले में सोमवार को अदालत में मुख्य आरोपियों में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विक्रम बहादुर सिंह, अजय सिंह उर्फ पप्पू और शैलेष सिंह उर्फ पिंकू को आजीवन कारावार और 60-60 हजार रुपये अर्थदंड का फैसला सुनाया। सात वर्ष बाद इस मामले में अदालत का फैसला आने से चर्चाओं का बाजार गरम हो गया। पीड़ित पक्ष के लोग जहां फैसले पर संतोष व्यक्त कर रहे, वहीं आरोपी पक्ष के लोग ऊपरी अदालत में फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कह रहे।
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बता दें कि 22 दिसंबर 2010 को अतरौलिया ब्लाक प्रमुख पद का चुनाव हो रहा था। इस चुनाव में तात्कालीन बसपा के क्षत्रिय महासभा के जिला कोआर्डिनेटर और जिला पंचायत अध्यक्ष विक्रम बहादुर सिंह ने अपने करीबी अतरौलिया थाना क्षेत्र के गोविंदपुर गांव निवासी पूर्व ब्लाक प्रमुख लालजी सिंह को बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ाया था। जबकि समाजवादी पार्टी के बैनर तले पूर्व मंत्री बलराम यादव के करीबी चंद्रशेखर यादव चुनाव लड़ रहे थे। मतदान के समय दोनों ही दलों के लोग ब्लाक गेट के पास मौजूद रहे। तभी एक कार में बैठकर कई बीडीसी सदस्य उतरे। यह देखने के बाद एक पक्ष के लोगों ने विरोध किया। इसी बात पर दोनों पक्षों में कहासुनी के बीच पथराव और फायरिंग होने लगी। इसमें गोली लगने से नंदना गांव निवासी महेंद्र यादव सहित दो लोगों की मौत हो गई। घटना के संबंध में मृतक के घर वालों ने विक्रम बहादुर सिंह, लालजी सिंह के बेटे अजय सिंह और शैलेष सिंह को आरोपी बनाए। पुलिस के अथक प्रयास से तीनों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। दोनों पक्ष के तर्क और गवाहों को सुनने के बाद अदालत ने सोमवार को तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा और 60-60 हजार रुपये का अर्थदंड का फैसला सुनाया। सोमवार को अदालत का फैसाल आने के बाद विक्रम सिंह के गांव भगतपुर और अजय के गांव गोविंदपुर सहित पूरे क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गरम हो गया। आरोपी पक्ष के लोगों ने जहां फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में अपील करने की बात कहे। वहीं पीड़ित पक्ष ने अदालत के फैसले पर संतोष जताया।


पुन: घटना की याद हुई ताजा
अतरौलिया (ब्यूरो)। ब्लाक प्रमुख के चुनाव में हुए दोहरे हत्याकांड के मामले में सोमवार को आए अदालत के फैसले से क्षेत्र के लोगों के जेहन में पुन: घटना की याद ताजा हो गई। क्षेत्र के लोगों की मानें तो दोहरे हत्याकांड के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश देने लगी। पुलिस की सख्ती का पर िणाम रहा कि आरोपियों के गांव के ज्यादातर लोग भय के चलते क्षेत्र से फरार हो गए थे। करीब 20 दिनों तक लगातार चली पुलिस की कार्रवाई से लोगों में भय और दहशत का माहौल रहा जो आरोपियों की गिरफ्तारी होने के बाद शांत हुआ। घटना के बाद धीरे-धीरे लोग इस मामले को भूल सा गए थे। लेकिन सोमवार को अदालत का फैसला आने के बाद लोगों के जेहन में घटना की याद पुन: ताजा हो गई।



आरोपियों को उनके किए की सजा मिली
आजमगढ़ (ब्यूरो)। अतरौलिया ब्लाक प्रमुख चुनाव के दौरान हुए दोहरे हत्याकांड के मामले में सात वर्ष बाद सोमवार को अदालत का फैसला आने पर आरोपी विक्रम बहादुर सिंह सहित अन्य ने इसके लिए सपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री बलराम यादव की साजिश का अपने को शिकार बताया। वहीं पूर्व मंत्री बलराम यादव ने इसे बेबुनियाद बताया। बलराम यादव का कहना है कि विक्रम सिंह सहित अन्य आरोपियों को उनके किए की उन्हें सजा मिली है। इसमें हमारा कोई हाथ नहीं है। क्योंकि अदालत में आरोप-प्रत्यारोप नहीं चलता। बल्कि तथ्य और सबूत देखे जाते हैं। जो आरोपियों के खिलाफ था। उन्हीं तथ्य और सबूतों के आधार पर अदालत ने अपना फैसला सुनाया। जो स्वागत योग्य है। अदालत से बढ़कर कोई नहीं है।
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