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समझाया-मनाया तो सुलझ गए साढ़े 4 हजार मामले
Updated Sat, 08 Jul 2017 11:43 PM IST
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आजमगढ़ । दीवानी न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में 4514 वादों का निस्तारण सुलह-समझौते के आधार पर किया गया।
राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ न्यायालय के हाल आफ जस्टिस में मुख्य अतिथि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायिक मूर्ति डीके आरोड़ा ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित और दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
लोक अदालत के माध्यम से निपटाए गए मुकदमों के संबंध में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव चंद्रशेखर ने बताया कि शनिवार को आयोजित लोक अदालत में सिविल के 112, मोटर दुर्घटना प्रतिकर के पांच, पारिवारिक वाद 136, दीवानी के फौजदारी वाद 3826, कलेक्ट्रेट के फौजदारी वाद 305, राजस्व के 118, अन्य वाद एक निस्तारित किए गए। इसी क्रम में बैंकों से संबंधित मुकदमों का निस्तारण किया गया जिसमें कुल 159 प्रीलिटिगेशन मुकदमों में 12355344 रुपये का समझौता हुआ। इस दौरान जनपद न्यायाधीश एसएएच रिजवी के अलावा पारिवारिक न्यायाधीश अनिल कुमार, अपर जिला जजों में सर्वेश चंद्र पांडेय, संतोष कुमार तिवारी, मुकेश कुमार सिंह, राम किशोर फास्ट ट्रैक कोर्ट संध्या चौधरी, सीजेएम धीरेंद्र कुमार सिंह, वरिष्ठ सिविल जज अगस्त तिवारी, एजीजेएम अवधेश कुमार, मौसमी मद्धेशिया, जेएम कुमुद लता त्रिपाठी, साधना कुमारी गुप्ता, हितेश अग्रवाल सहित अनेक अदालतें कार्यरत रही।
सुलह-समझौते से ही कम होगा मुकदमों का बोझ : डीके आरोड़ा
आजमगढ़ (ब्यूरो)। दीवानी न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन करने के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार आरोड़ा ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया की जटिलता और लोगों के अहंकार के कारण न्यायालयों में मुकदमों का अंबार लगा है। सुलह-समझौते के आधार पर ही निस्तारण कराकर बढ़ते मुकदमों के बोझ को कम किया जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि वादकारियों को कम समय और कम खर्च में कैसे जल्द न्याय मिले, ये न्यायिक व्यवस्था के सामने चुनौती है। उन्होंने लोगों से अपने मुकदमों का निस्तारण सुलह-समझौते से कराने की अपील की। जनपद न्यायाधीश एसएएच रिजवी ने लोक अदालत के माध्यम से मुकदमों के निस्तारण से होने वाले लाभों से अवगत कराया। अन्य दीवानी न्यायालय अभिभाषक संघ के अध्यक्ष ओम प्रकाश मिश्रा, मंत्री विनय कुमार यादव ने लोक अदालत के सफल आयोजन में शत प्रतिशत योगदान देने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम का संचालन अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अवधेश कुमार सिंह ने किया।
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राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ न्यायालय के हाल आफ जस्टिस में मुख्य अतिथि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायिक मूर्ति डीके आरोड़ा ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित और दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
लोक अदालत के माध्यम से निपटाए गए मुकदमों के संबंध में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव चंद्रशेखर ने बताया कि शनिवार को आयोजित लोक अदालत में सिविल के 112, मोटर दुर्घटना प्रतिकर के पांच, पारिवारिक वाद 136, दीवानी के फौजदारी वाद 3826, कलेक्ट्रेट के फौजदारी वाद 305, राजस्व के 118, अन्य वाद एक निस्तारित किए गए। इसी क्रम में बैंकों से संबंधित मुकदमों का निस्तारण किया गया जिसमें कुल 159 प्रीलिटिगेशन मुकदमों में 12355344 रुपये का समझौता हुआ। इस दौरान जनपद न्यायाधीश एसएएच रिजवी के अलावा पारिवारिक न्यायाधीश अनिल कुमार, अपर जिला जजों में सर्वेश चंद्र पांडेय, संतोष कुमार तिवारी, मुकेश कुमार सिंह, राम किशोर फास्ट ट्रैक कोर्ट संध्या चौधरी, सीजेएम धीरेंद्र कुमार सिंह, वरिष्ठ सिविल जज अगस्त तिवारी, एजीजेएम अवधेश कुमार, मौसमी मद्धेशिया, जेएम कुमुद लता त्रिपाठी, साधना कुमारी गुप्ता, हितेश अग्रवाल सहित अनेक अदालतें कार्यरत रही।
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सुलह-समझौते से ही कम होगा मुकदमों का बोझ : डीके आरोड़ा
आजमगढ़ (ब्यूरो)। दीवानी न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन करने के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार आरोड़ा ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया की जटिलता और लोगों के अहंकार के कारण न्यायालयों में मुकदमों का अंबार लगा है। सुलह-समझौते के आधार पर ही निस्तारण कराकर बढ़ते मुकदमों के बोझ को कम किया जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि वादकारियों को कम समय और कम खर्च में कैसे जल्द न्याय मिले, ये न्यायिक व्यवस्था के सामने चुनौती है। उन्होंने लोगों से अपने मुकदमों का निस्तारण सुलह-समझौते से कराने की अपील की। जनपद न्यायाधीश एसएएच रिजवी ने लोक अदालत के माध्यम से मुकदमों के निस्तारण से होने वाले लाभों से अवगत कराया। अन्य दीवानी न्यायालय अभिभाषक संघ के अध्यक्ष ओम प्रकाश मिश्रा, मंत्री विनय कुमार यादव ने लोक अदालत के सफल आयोजन में शत प्रतिशत योगदान देने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम का संचालन अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अवधेश कुमार सिंह ने किया।