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वन दरोगाओं को ग्रामीणों ने बनाया बंधक
Updated Sun, 03 Jun 2018 12:08 AM IST
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लाटघाट। रौनापार थाना क्षेत्र के सुदनीपुर गांव में स्थित श्रीराम के आरा मशीन पर शनिवार की सुबह पहुंचे दो बन दरोगाओं ने नीम के पेड़ की लकड़ियों को बगैर 12 सौ रुपये लिए चीरने से रोक दिया। साथ ही तीन बजे लकड़ी मालिक को बुलाने का निर्देश दिया। तय समय पर वन दरोगा जब पुन: आरा मशीन पर पहुंचे तो वहां मौजूद ग्रामीण रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए दोनों को बंधक बना लिया। करीब एक घंटे तक गांव वालों के चंगुल में रहे। बाद में मामला थाने पर पहुंचा। जहां समझौता होने के बाद सभी घर चले गए। वन दरोगा ने रिश्वत मांगने के आरोप को खारिज कर दिया।
रौनापार थाना क्षेत्र के करखिया गांव निवासी सुनील सिंह अपना नीम का पेड़ कटवाकर उसकी लकड़ी सुदनीपुर गांव निवासी श्रीराम के आरा मशीन पर चीरने के लिए पहुंचा दिया। उधर क्षेत्र के वन दरोगा केके तिवारी और सत्रुजीत पांडेय भ्रमण करते हुए आरा मशीन पर पहुंचे और हरे नीम की लकड़ी देख उसे चीरने से रोक दिया। साथ ही मालिक को तीन बजे दिन में मौके पर बुलाया। वन दरोगा का कहना था कि यदि लकड़ी की चिराई करवानी है तो 12 सौ रुपये देने के बाद ही कोई काम होगा। जानकारी होने पर सुनील सिंह अपने पक्ष के अन्य लोगों को लेकर आरा मशीन पर पहुंचे। निर्धारित समय पर दोनों वन दरोगा भी पहुंच गए। बातचीत के दौरान वहां भीड़ जुट गई। कहासुनी के बाद लोगों ने वन दरोगाओं को बंधक बना लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में धड़ल्ले से पेड़ कट रहे हैं। वहां उन लोगों को क्यों नहीं रोका जा रहा? करीब एक घंटे बाद दोनों पक्ष थाने पर पहुंचा। जहां पुलिस और क्षेत्र के कुछ संभ्रांत लोगों ने सुलह करा दिया। दोनों पक्ष चले गए। इस संबंध में वन दरोगा केके तिवारी ने बताया कि नीम का पेड़ बगैर परमिशन के काटा गया था। इसलिए जुर्माना के तौर पर 12 सौ रुपये मांगा गया था। रिश्वत नहीं मांगी गई थी। इस पूरे मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। उनके दिशा निर्देश के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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रौनापार थाना क्षेत्र के करखिया गांव निवासी सुनील सिंह अपना नीम का पेड़ कटवाकर उसकी लकड़ी सुदनीपुर गांव निवासी श्रीराम के आरा मशीन पर चीरने के लिए पहुंचा दिया। उधर क्षेत्र के वन दरोगा केके तिवारी और सत्रुजीत पांडेय भ्रमण करते हुए आरा मशीन पर पहुंचे और हरे नीम की लकड़ी देख उसे चीरने से रोक दिया। साथ ही मालिक को तीन बजे दिन में मौके पर बुलाया। वन दरोगा का कहना था कि यदि लकड़ी की चिराई करवानी है तो 12 सौ रुपये देने के बाद ही कोई काम होगा। जानकारी होने पर सुनील सिंह अपने पक्ष के अन्य लोगों को लेकर आरा मशीन पर पहुंचे। निर्धारित समय पर दोनों वन दरोगा भी पहुंच गए। बातचीत के दौरान वहां भीड़ जुट गई। कहासुनी के बाद लोगों ने वन दरोगाओं को बंधक बना लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में धड़ल्ले से पेड़ कट रहे हैं। वहां उन लोगों को क्यों नहीं रोका जा रहा? करीब एक घंटे बाद दोनों पक्ष थाने पर पहुंचा। जहां पुलिस और क्षेत्र के कुछ संभ्रांत लोगों ने सुलह करा दिया। दोनों पक्ष चले गए। इस संबंध में वन दरोगा केके तिवारी ने बताया कि नीम का पेड़ बगैर परमिशन के काटा गया था। इसलिए जुर्माना के तौर पर 12 सौ रुपये मांगा गया था। रिश्वत नहीं मांगी गई थी। इस पूरे मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। उनके दिशा निर्देश के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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