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दहेज हत्या में पति, जेठ और जेठानी को उम्र कैद
Updated Tue, 08 Aug 2017 11:52 PM IST
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आजमगढ़। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट संध्या चौधरी की अदालत ने दहेज हत्या के तीन आरोपी ससुरालीजनों को उम्र कै द के साथ अर्थदंड की सजा सुनाई। मामला जहानागंज थाना क्षेत्र के छतऊपुर गांव में मई 2015 को ससुराल में हुई विवाहिता की मौत का है।
जहानागंज थाना क्षेत्र के आजमबांध गांव निवासी लालचंद पुत्र निरहू यादव की लड़की लालमती की शादी घटना के लगभग पांच वर्ष पूर्व छतऊपुर गांव निवासी हरेंद्र पुत्र अवधराज के साथ हुई थी। नौ मई 2015 को उसकी मौत हो गई। इस मामले में मृतका के पिता ने दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। दर्ज कराए गए मुकदमे में आरोप लगाया कि जब उसकी पुत्री विदा होकर अपनी ससुराल गई तो ससुराल के लोग दहेज में मोटर साइकिल और एक लाख रुपया नकद की मांग को लेकर लालमती को प्रताड़ित करते थे। मांग पूरी न होने पर विवाहिता को 29 अप्रैल 2015 को तेल छिड़कर जला दिए। घायलावस्था में उसे अस्पताल में उसे भर्ती कराया गया। जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मामले में जहागंज थाना पुलिस ने पति हरेंद्र, जेठ गुड्डू और जेठानी कुसुम के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। सत्र परीक्षण के दौरान इस मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता विनोद कुमार यादव ने कुल 16 गवाहों को बतौर साक्षी पेश किया। गवाहों में लालचंद, विद्या देवी, सीता, सामू चौहान, केशरी, राजेंद्र यादव, हरिश्चंद्र, अवधेश, गीता, एसआई गिरिजेश बहादुर यादव, डा. रईस अहमद, डा. शाहिद जमाल, कांस्टेबुल दिलीप कुमार, तहसीलदार सत्यनरायन चौहान, मधुसूदन लाल आर्य, अहमद सिद्दीकी सीओ शामिल रहे। अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्को को सुनने के बाद नामजद तीनों आरोपियों को दहेज हत्या का दोषी पाया। प्रत्येक को भादवी की धारा 304 बी में उम्र कैद, 498 ए में दो वर्ष पांच हजार, 326 ए में दस वर्ष दस हजार का जुर्माना, दहेज प्रतिषेध अधिनियम में तीनों को दो वर्ष पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
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जहानागंज थाना क्षेत्र के आजमबांध गांव निवासी लालचंद पुत्र निरहू यादव की लड़की लालमती की शादी घटना के लगभग पांच वर्ष पूर्व छतऊपुर गांव निवासी हरेंद्र पुत्र अवधराज के साथ हुई थी। नौ मई 2015 को उसकी मौत हो गई। इस मामले में मृतका के पिता ने दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। दर्ज कराए गए मुकदमे में आरोप लगाया कि जब उसकी पुत्री विदा होकर अपनी ससुराल गई तो ससुराल के लोग दहेज में मोटर साइकिल और एक लाख रुपया नकद की मांग को लेकर लालमती को प्रताड़ित करते थे। मांग पूरी न होने पर विवाहिता को 29 अप्रैल 2015 को तेल छिड़कर जला दिए। घायलावस्था में उसे अस्पताल में उसे भर्ती कराया गया। जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मामले में जहागंज थाना पुलिस ने पति हरेंद्र, जेठ गुड्डू और जेठानी कुसुम के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। सत्र परीक्षण के दौरान इस मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता विनोद कुमार यादव ने कुल 16 गवाहों को बतौर साक्षी पेश किया। गवाहों में लालचंद, विद्या देवी, सीता, सामू चौहान, केशरी, राजेंद्र यादव, हरिश्चंद्र, अवधेश, गीता, एसआई गिरिजेश बहादुर यादव, डा. रईस अहमद, डा. शाहिद जमाल, कांस्टेबुल दिलीप कुमार, तहसीलदार सत्यनरायन चौहान, मधुसूदन लाल आर्य, अहमद सिद्दीकी सीओ शामिल रहे। अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्को को सुनने के बाद नामजद तीनों आरोपियों को दहेज हत्या का दोषी पाया। प्रत्येक को भादवी की धारा 304 बी में उम्र कैद, 498 ए में दो वर्ष पांच हजार, 326 ए में दस वर्ष दस हजार का जुर्माना, दहेज प्रतिषेध अधिनियम में तीनों को दो वर्ष पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
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