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सारसों ने बनाया सलोना ताल को बसेरा, सुरक्षा का इंतजाम नहीं

Mon, 08 Nov 2021 11:18 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 08 Nov 2021 11:18 PM IST
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Cranes made Salona Tal a habitat, no security arrangements
सगड़ी तहसील के ताल सलोना में सारस का जोड़ा - फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। सलोना ताल लंबे अर्से के बाद सारसों की चहक से गुलजार हो गया है लेकिन शिकारियों को उनका कलरव रास नहीं आ रहा है। कुछ लोग छुपकर इन पंछियों का शिकार भी कर रहे हैं लेकिन वन विभाग राज्य पंछी की सुरक्षा के प्रति उदासीन है।
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अजमतगढ़ के सलोना ताल में इन दिनों उत्तर प्रदेश के राज्य पंछी सारसों ने डेरा जमा रखा है। बड़ी संख्या में लोग उनके देखने पहुंच रहे हैं। पंछी विशेषज्ञ सारस के तालाब में पहुंचने के कारणों की पड़ताल में जुटे हैं। इस ताल में 50 से अधिक सारस कभी भी देखे जा सकते हैं। वन विभाग इस ओर से अनजान बना हुआ है। उनकी सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। उधर शिकारी इन पक्षियों की शिकार कर अपना अहार बना रहे हैं। इनपर अंकुश लगाने के लिए वन विभाग ने कोई कदम नहीं उठाए है। सुरक्षा नहीं होने का कारण इन पक्षियों का शिकार कर उन्हें महंगे दामों में बेचा जा रहा है।
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सारस प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। यह पंछी एक बार जोड़ा बनाता है और दोनों साथ रहते हैं। साथी की मृत्यु के बाद दूसरा भी जान दे देता है। इसका औसत भार 7.3 किलो होता है और लंबाई 173 सेमी होती है और यह तेजी से उड़ान भर सकता है। सारस किसानों का मित्र क्योंकि यह फसलों में लगने वाले कीड़ों को खाकर फसलों को नष्ट होने से बचाता है। दलदली व नमी वाले स्थान इसे प्रिय हैं, इसकी आवाज काफी दूर तक सुनाई देती है। सारस अपना घोसला छिछले पानी के आसपास ही बनाते हैं। सारस एक बार में दो से तीन अंडे देती है। अण्डों से बच्चों को बाहर निकले में 25 से 30 दिन का समय लगता है।
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सलोना ताल में सारस पक्षियों का आना शुभ संकेत है। कारण की अब इनकी संख्या जिले में न के बराबर है। यदि सलोना ताल में सारस पक्षियां हैं तो उनके सुरक्षा का इंतजाम किया जाएगा। इन पक्षियों का शिकार करते हुए कोई शिकारी पकड़ा गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
गंगादत्त मिश्रा, डीएफओ आजमगढ़।
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