{"_id":"56feb9d64f1c1bb83ef00105","slug":"communal-forces-from-coming-to-powers-in-country","type":"story","status":"publish","title_hn":" सांप्रदायिक ताकतों के हाथ में सत्ता आने से बिगड़ी स्थिति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सांप्रदायिक ताकतों के हाथ में सत्ता आने से बिगड़ी स्थिति
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Fri, 01 Apr 2016 11:41 PM IST
विज्ञापन
संविधान सुरक्षा सम्मेलन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मदरसा फैजुलउलूम के परिसर में शुक्रवार को आयोजित संविधान सुरक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए जमीअत उलेमा-ए हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सय्यद अरशद मदनी ने कहा कि जब से सत्ता सांप्रदायिक ताकतों के हाथों में गई है, देश की स्थिति बेहद खराब हो गई है। उन्होंने कहा कि दंगे तो कांग्रेस के शासनकाल में भी हुए, लेकिन इतने बुरे हालात जो आज हैं आजादी से पहले भी नहीं थे।
उन्होंने कहा कि आज संघ के लोग भारत के 25 करोड़ मुसलमानों को घर वापसी कराने की बात कर रहे हैं, क्या सिर्फ उन्होंने ही अपनी मां का दूध पिया है। आज जरूरत आग पर पानी डालने की है न कि इसमें घी डालने की। उन्होंने कहा कि जमीअत उलेमा हिंद आज पूरे देश में देशवासियों और अन्य अल्पसंख्यकों को साथ लेकर प्यार के संदेश को आम कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारा अगला कार्यक्रम काशी की धरती पर होगा, जिसे जमीअत उलेमा-ए हिंद नहीं बल्कि बहुसंख्यक समाज के बैनर तले होगा।
उन्होंने कहा कि जमीअत उलेमा-ए हिंद का कभी राजनीतिक हित नहीं रहा और न ही जमीअत उलेमा-ए हिंद संसद और विधानसभाओं की राजनीति में भाग लेती है जमीअत उलेमा-ए हिंद शुद्ध धार्मिक जमात है। मौलाना हबीबुर्रहमान आजमी ने कहा कि देश को आजाद कराने में हमारे पूर्वजों ने अपना खून भेंट बहाया और देश को आजाद कराने के बाद मुल्क को देशवासियों के हवाले कर दिया हमारे पूर्वजों का उद्देश्य देश की सत्ता नहीं बल्कि देश की स्वतंत्रता थी लेकिन आज देश की बागडोर ऐसे लोगों के हाथों में चली गई है जिनका स्वतंत्रता की लड़ाई में दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं रहा, बल्कि यह आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों के साथी थे।
विज्ञापन
आज अफसोस कि वे ताकतें देश से राष्ट्रभक्ति का सर्टिफिकेट मांग रही हैं। आर्य समाज के धर्मगुरू स्वामी अग्निवेश मोदी सरकार और सांप्रदायिक ताकतों पर प्रहार करते हुए कहा कि कुर्ता, सूट पहन कर ओबामा के साथ डिनर खाने वाले का स्वयं को चाय बेचने वाला कहना भारतीयों के साथ अन्याय है। समाजसेवी तीस्ता शीतलवाड़ ने कहा कि हिंदू धर्म में जन्म लेने पर मुझे इस बात का गर्व है, लेकिन वहीं कुछ लोगों ने उसे अपनी जागीर समझ लिया है।
रोहित वेमुला पर बोलते हुए कहा कि उसने एक संदेश दिया है, उसको समझना चाहिए, जेएनयू के कन्हैया और रोहित वेमुला की लड़ाई अब इलाहाबाद विश्वविद्यालय और अन्य विश्वविद्यालयों में फैल रही है, उन्होने जेएनयू विश्वविद्यालय में रहकर देश और धर्मनिरपेक्षता बचाने वाले कन्हैया को बधाई दी। सम्मेलन को कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला एडवोकेट, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर, जमीअत उलेमा-ए हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना अब्दुल अलीम फारूकी, गंगा महासभा के अध्यक्ष स्वामी जितेंदानंद सरस्वती आदि ने संबोधित किया। संचालन मुफ्ती अशफाक अहमद आजमी ने किया।
सम्मेलन में जमीअत उलेमा उत्तर प्रदेश के सचिव मौलाना अब्दुल हादी, मौलाना अब्दुल रहीम, मुफ्ती मोहम्मद अब्दुल्लाह, मौलाना अनीस अहमद इस्लाही, मौलाना ओबैदुल्लाह कासमी, मुफ्ती लईक अहमद, मुफ्ती अब्दुल्लाह नोमानी, मौलाना सिराज हाशमी, मौलाना अबुल खैर कासमी, मौलाना मोहम्मद हमजा कासमी, मौलाना शाहिद कासिमी आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि आज संघ के लोग भारत के 25 करोड़ मुसलमानों को घर वापसी कराने की बात कर रहे हैं, क्या सिर्फ उन्होंने ही अपनी मां का दूध पिया है। आज जरूरत आग पर पानी डालने की है न कि इसमें घी डालने की। उन्होंने कहा कि जमीअत उलेमा हिंद आज पूरे देश में देशवासियों और अन्य अल्पसंख्यकों को साथ लेकर प्यार के संदेश को आम कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारा अगला कार्यक्रम काशी की धरती पर होगा, जिसे जमीअत उलेमा-ए हिंद नहीं बल्कि बहुसंख्यक समाज के बैनर तले होगा।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि जमीअत उलेमा-ए हिंद का कभी राजनीतिक हित नहीं रहा और न ही जमीअत उलेमा-ए हिंद संसद और विधानसभाओं की राजनीति में भाग लेती है जमीअत उलेमा-ए हिंद शुद्ध धार्मिक जमात है। मौलाना हबीबुर्रहमान आजमी ने कहा कि देश को आजाद कराने में हमारे पूर्वजों ने अपना खून भेंट बहाया और देश को आजाद कराने के बाद मुल्क को देशवासियों के हवाले कर दिया हमारे पूर्वजों का उद्देश्य देश की सत्ता नहीं बल्कि देश की स्वतंत्रता थी लेकिन आज देश की बागडोर ऐसे लोगों के हाथों में चली गई है जिनका स्वतंत्रता की लड़ाई में दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं रहा, बल्कि यह आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों के साथी थे।
विज्ञापन
आज अफसोस कि वे ताकतें देश से राष्ट्रभक्ति का सर्टिफिकेट मांग रही हैं। आर्य समाज के धर्मगुरू स्वामी अग्निवेश मोदी सरकार और सांप्रदायिक ताकतों पर प्रहार करते हुए कहा कि कुर्ता, सूट पहन कर ओबामा के साथ डिनर खाने वाले का स्वयं को चाय बेचने वाला कहना भारतीयों के साथ अन्याय है। समाजसेवी तीस्ता शीतलवाड़ ने कहा कि हिंदू धर्म में जन्म लेने पर मुझे इस बात का गर्व है, लेकिन वहीं कुछ लोगों ने उसे अपनी जागीर समझ लिया है।
रोहित वेमुला पर बोलते हुए कहा कि उसने एक संदेश दिया है, उसको समझना चाहिए, जेएनयू के कन्हैया और रोहित वेमुला की लड़ाई अब इलाहाबाद विश्वविद्यालय और अन्य विश्वविद्यालयों में फैल रही है, उन्होने जेएनयू विश्वविद्यालय में रहकर देश और धर्मनिरपेक्षता बचाने वाले कन्हैया को बधाई दी। सम्मेलन को कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला एडवोकेट, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर, जमीअत उलेमा-ए हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना अब्दुल अलीम फारूकी, गंगा महासभा के अध्यक्ष स्वामी जितेंदानंद सरस्वती आदि ने संबोधित किया। संचालन मुफ्ती अशफाक अहमद आजमी ने किया।
सम्मेलन में जमीअत उलेमा उत्तर प्रदेश के सचिव मौलाना अब्दुल हादी, मौलाना अब्दुल रहीम, मुफ्ती मोहम्मद अब्दुल्लाह, मौलाना अनीस अहमद इस्लाही, मौलाना ओबैदुल्लाह कासमी, मुफ्ती लईक अहमद, मुफ्ती अब्दुल्लाह नोमानी, मौलाना सिराज हाशमी, मौलाना अबुल खैर कासमी, मौलाना मोहम्मद हमजा कासमी, मौलाना शाहिद कासिमी आदि मौजूद थे।