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18 नवंबर को नहाय खाय के साथ शुरू होगा छठ महापर्व

Mon, 16 Nov 2020 11:29 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 16 Nov 2020 11:29 PM IST
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Chhath mahaparva will begin with Nahay-Khay on 18 November
शहर के कदम घाट पर छाठ पूजा के लिए नही शुरु हुआ सफाई का कार्य। - फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। सूर्य देवता की पूजा का महापर्व छठ जनपद में 20 नवंबर को मनाया जाएगा। इस महापर्व की शुरुआत 18 नवंबर को नहाय खाय के साथ हो रही है। 20 नंवबर में चार दिन शेष है, लेकिन अभी तक नगर पालिका द्वारा घाटों की साफ-सफाई का कार्य शुरू नहीं कराया गया है। वहीं अभी तक लोगों द्वारा भी नदी किनारे वेदी बनाने का कार्य भी नहीं किया जा रहा है।
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दीपावली का पर्व संपन्न होने के बाद अब लोग छठ महापर्व की तैयारियों में जुट गए हैं। दीपावली के छह दिन बाद पड़ने वाला यह पर्व इस बार 20 नवंबर को मनाया जाएगा। इसकी शुरुआत 18 नवंबर को नहाय खाय के साथ होगी। 19 को खरना होगा। 20 नवंबर को डूबते हुए और 21 नवंबर को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इस व्रत को रहने वाले लोग अभी से इसकी तैयारियों में जुट गए हैं। बाहर रहने वाले लोग इस पर्व को मनाने के लिए घर पहुंच चुके हैं। भैया दूज सोमवार को संपन्न होने के बाद मंगलवार से लोगों द्वारा नदियों और पोखरों के किनारे पूजा के वेदी बनाने का कार्य शुरू किया जाएगा। पूजा समितियां भी मंगलवार से किनारों की साफ-सफाई में जुटेंगी। अभी नगर पालिका द्वारा घाटों की साफ-सफाई का कार्य शुरू नहीं किया गया है। हालांकि कोरोना महामारी को देखते हुए इसका असर छठ महापर्व पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है। ईओ शुभनाथ प्रसाद ने बताया कि मंगलवार से घाटों की साफ-सफाई का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इसके साथ ही नगरपालिका हर घाट पर लाइट और पेयजल की व्यवस्था करेगी। ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
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कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को होती है छठ पूजा
आजमगढ़। पंडित सिद्घनाथ उपाध्याय ने बताया कि हिंदी पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पूजा होती है। इस वर्ष छठ पूजा 20 नवंबर दिन शुक्रवार को है। हालां कि इसका प्रारंभ कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से ही हो जाता है।नहाय-खाय से ही छठ पूजा शुरू होती है। चतुर्थी के दिन ही नहाय-खाय होता है। इस वर्ष नहाय-खाय 18 नवंबर दिन बुधवार को है। नहाय-खाय के दिन सूर्योदय सुबह 6.46 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 05.26 मिनट पर होना है।
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व्रती के भोजन करने के बाद ही सब लोग करते हैं भोजन
आजमगढ़। छठ पूजा का व्रत रखने वाले लोग नहाय-खाय के दिन स्नान आदि के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। इसके बाद अगले दिन खरना का व्रत होता है। इसके अगले दिन छठी मैया का व्रत रखते हैं। शाम और सुबह को सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही वे पारण करते हैं। व्रत से पूर्व नहाने के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करने को ही नहाय-खाय कहा जाता है। नहाय-खाय के दिन व्रती लौकी की सब्जी और चने की दाल खाते हैं। इसमें सेंधा नमक का प्रयोग किया जाता है। जो लोग छठ व्रत रखते हैं, उनके भोजन करने के बाद ही परिवार के अन्य सदस्य चतुर्थी के दिन भोजन करते हैं। व्रती को व्रत पूर्ण करने तक भूमि पर ही सोना होता है।
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