सठियांव। दि किसान सहकारी चीनी मिल सठियांव की स्थापना किसानों के गन्ना क्रय करने और चीनी का निर्माण करने के लिए की गई थी। लेकिन मिल प्रबंधन के तुगलक फरमान से दो दर्जन गांवों के किसान गन्ना की बिक्री करने से वंचित हो जाएंगे। वर्तमान में चीनी मिल प्रबंधन किसानों से घोषणा पत्र भरवा रहा है। मिल प्रबंधन किसानों से कंप्यूटरीकृत नकल मांग रहा है। घोषणा पत्र भरवाए जाने की मियाद 30 सितंबर निर्धारित की गई है। वहीं क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांव चकबंदी प्रक्रिया में हैं। इस वजह से इन गांवों की कंप्यूटरीकृत नकल मिल पाना मुश्किल है। ऐसे में किसान गन्ने की बिक्री से वंचित हो जाएंगे। गन्ना सुपरवाइजर के अनुसार खतौनी की नकल कंप्यूटराइज्ड होनी चाहिए। जो गांव चकबंदी प्रक्रिया में हैं उनकी खतौनी हाथ से बनेगी। मिल गेट में ऐसे गांव जगदीशपुर, सुराई, केरमा, चकतगे, बेलहरा, लोहरा, मोहब्बतपुर, सरदारपुर, कोढ़वा आदि हैं। जहां के सुपरवाइजर घोषणा पत्र में हाथ से बनीं खतौनी की नकल लेने से इंकार कर रहे हैं। गन्ना किसान जितेंद्र यादव, राम सनेही, रामचंद्र, गोलई, अमित, श्यामदेव ने आरोप लगाते हुए कहा कि जब मिल पर जाते हैं तो मुख्य गन्ना अधिकारी नहीं मिलते, उनका फोन भी नाट रिचेबल बताता है। इस संबंध में उप सभापति पराग यादव ने कहा कि इस तरह की जानकारी है समाधान किया जाएगा। गेट का कोई किसान गन्ना देने व पर्ची से बंचित नहीं रहेगा। प्रधान प्रबंधक प्रताप नारायण ने भरोसा दिलाया है कि सभी किसानों का गन्ना क्रय किया जाएगा।