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सरायमीर में इमामबाड़े में हुआ जंजीर का मातम

Fri, 20 Aug 2021 11:35 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 20 Aug 2021 11:35 PM IST
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Chained mourning at the Imambara in Saraimer
सरायमीर में मोहर्रम पर मातम मनाते मुस्लिम समुदाय के लोग। - फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। कोरोना को सरकार की जारी गाइडलाइन का असर शुक्रवार को मुहर्रम पर दिखा। हर साल मातम के साथ ताजिया लेकर कर्बला की ओर जातीं टोलिया नदारद थीं। उलेमा की अपील पर लोगों ने घरों में ही ताजिये के आगे मातम किया। वहीं सरायमीर के इमामबाड़े में जंजीर का मातम हुआ।
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मेजवां संवाददाता के अनुसार फूलपुर और ग्रामीण क्षेत्रो में शहीदाने कर्बला का जुलूस नहीं निकाला गया। कोरोना गाइड लाइन का पूरी तरह से पालन किया गया। सभी तरह का जुलूस घरो में ही नौहा मातम कर सीमित रहा। इस दौरान या अली मौला की सदा से गूंज उठा। मौलाना शकील फराज ने कर्बला में शहीद इमाम के वाकया को सुनाया। सरायमीर: शहीदाने कर्बला की याद में चौक स्थित इमामबाड़ा अजाखाना अबु तालिब से निकलने वाला ताजिया कदीम जुलूस इस साल नहीं निकाला गया। भूखे प्यासे व गम का प्रतीक काले लिबास पहने हुए अजादार आमाले आशूरा करने के बाद क्रमवार इमामबाड़ा पहुंचकर अलविदाई नौहा व मातम किया। इस दौरान इमामे जुमा मौलाना मासूम असगर ने मजलिस को संबोधित किया। इस दौरान इमाम हुसैन की शहादत सुन अजादार फफ़क कर रो पड़े । मजलिस के बाद मातमदारों ने जंजीर का मातम कर कर्बला के शहीदों को खिराज-ए- अकीदत पेश किया। मुबारकपुर: कस्बा सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में मुहर्रम का पर्व अकीदत और एहतराम के साथ मनाया। मोहर्रम पर हर साल निकलने वाले अलम और ताजिया का जुलूस इस वर्ष भी कोरोना के चलते प्रदेश नही निकला। लेकिन शिया एंव सुन्नी दोनों समुदाय के लोगों ने अपने-अपने इमामबाड़ों पर ताजिया बनाकर इमाम चौकों पर रख मजलिस और फातिहा ख्वानी किया। इस दौरान शिया समुदाय के अजादारों ने अपने-अपने इमाम चौकों पर ताजिए बनाकर मजलिसों का आयोजन किया। इस दौरान नगर की प्रसिद्ध धार्मिक अंजुमनों ने इमामबाड़ों पर ही वाक़याते कर्बला पर आधारित नौहा ख्वानी और मातम कर खिराज-ए-अकीदत पेश किया। शुक्रवार की शाम तक ताजिया करने के लिए शिया और सुन्नी दोनों समुदाय के इमामबाड़ों व इमाम चौकों से अपने-अपने ताजिये के फूल और सेहरे को सभी अंजुमनों के पांच -पांच सदस्यों द्वारा ताजिया दफन करने का सिलसिला जारी रहा। तो कुछ लोगों ने अपने साथ ताजिया लेकर कर्बला पहुंचे और दफन किया।
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