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शिव धनुष टूटा, लगे राम के जयकारे
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Fri, 16 Oct 2015 11:45 PM IST
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पुरानी कोतवाली पर चल रही रामलीला के क्रम में गुुरुवार की रात कलाकारों ने धनुष यज्ञ, लक्ष्मण और परशुराम संवाद का मंचन किया। इस दौरान भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष को तोड़ते ही पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा।
पुरानी कोतवाली पर रामलीला की शुरुआत प्रभु श्रीराम की आरती उतार कर की गई।
मंचन में श्रीराम द्वारा धनुष तोड़ते ही जयकारों से क्षेत्र पंडाल गूंज उठा। धनुष टूटने के बाद जनक दरबार में पहुंचने पर परशुराम और लक्ष्मण के बीच संवाद की कलाकारों ने जीवंत प्रस्तुति दी। अहरौलाः कस्बे के गोला बाजार में चल रही रामलीला के तीसरे दिन सीता विवाह का मंचन किया गया। गुरु विश्वामित्र के साथ भगवान श्रीराम और लक्ष्मण का जनक दरबार में आगमन होता है। गुरु विश्वामित्र के कहने पर श्रीराम धनुष तोड़ते हैं।
इसके बाद श्रीराम और सीता का विवाह होता है। धनुष टूटने के बाद परशुराम लक्ष्मण संवाद का मंचन किया गया। मालटारी संवाददाता के अनुसार, नगर पंचायत जीयनपुर में आदर्श रामलीला समिति के तत्वावधान में चल रही रामलीला में कलाकारों ने धनुष यज्ञ और श्रीराम विवाह का मंचन किया। श्रीराम द्वारा धनुष तोड़े जाने के बाद विधि-विधान से श्रीराम का विवाह संपन्न होता है।
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विवाह संपन्न होने के बाद लगे जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। इस मौके पर रमेश चौधरी, अतुल कुमार त्रिपाठी, प्रदीप कुमार मौर्य, रमेश चौरसिया, ओम प्रकाश मोदनवाल आदि मौजूद थे।
निजामाबादः श्रीरामलीला के मंचन के क्रम में विश्वामित्र के साथ आश्रम जाते समय रास्ते में गौतम ऋषि के आश्रम श्रीराम और लक्ष्मण पहुंचते हैं। जहां भगवान राम पत्थर बनी अहिल्या का उद्धार करते हैं। इस दौरान लगे श्रीराम के जयकारों से क्षेत्र गूंज उठा। इसी क्रम में कलाकारों ने नगर दर्शन का मंचन किया।
इसमें विश्वामित्र के आश्रम से अयोध्या से लौट रहे श्रीराम, लक्ष्मण, गुरु विश्वामित्र से जनकपुर देखने का आग्रह करते हैं। विश्वामित्र दोनों भाइयों को नगर दर्शन की अनुमति देते हैं। दोनों भाई बड़े ही मनोयोग से नगर दर्शन करते हैं। इस दौरान राम पेड़ की आड़ में छिपकर सीता जी को देखते हैं। सीता जी को देखकर भगवान श्रीराम मुग्ध हो जाते हैं और जब इस बात का पता विश्वामित्र को होता है तो वे भगवान राम को सीता स्वयंवर में ले जाते हैं।
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पुरानी कोतवाली पर रामलीला की शुरुआत प्रभु श्रीराम की आरती उतार कर की गई।
मंचन में श्रीराम द्वारा धनुष तोड़ते ही जयकारों से क्षेत्र पंडाल गूंज उठा। धनुष टूटने के बाद जनक दरबार में पहुंचने पर परशुराम और लक्ष्मण के बीच संवाद की कलाकारों ने जीवंत प्रस्तुति दी। अहरौलाः कस्बे के गोला बाजार में चल रही रामलीला के तीसरे दिन सीता विवाह का मंचन किया गया। गुरु विश्वामित्र के साथ भगवान श्रीराम और लक्ष्मण का जनक दरबार में आगमन होता है। गुरु विश्वामित्र के कहने पर श्रीराम धनुष तोड़ते हैं।
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इसके बाद श्रीराम और सीता का विवाह होता है। धनुष टूटने के बाद परशुराम लक्ष्मण संवाद का मंचन किया गया। मालटारी संवाददाता के अनुसार, नगर पंचायत जीयनपुर में आदर्श रामलीला समिति के तत्वावधान में चल रही रामलीला में कलाकारों ने धनुष यज्ञ और श्रीराम विवाह का मंचन किया। श्रीराम द्वारा धनुष तोड़े जाने के बाद विधि-विधान से श्रीराम का विवाह संपन्न होता है।
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विवाह संपन्न होने के बाद लगे जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। इस मौके पर रमेश चौधरी, अतुल कुमार त्रिपाठी, प्रदीप कुमार मौर्य, रमेश चौरसिया, ओम प्रकाश मोदनवाल आदि मौजूद थे।
निजामाबादः श्रीरामलीला के मंचन के क्रम में विश्वामित्र के साथ आश्रम जाते समय रास्ते में गौतम ऋषि के आश्रम श्रीराम और लक्ष्मण पहुंचते हैं। जहां भगवान राम पत्थर बनी अहिल्या का उद्धार करते हैं। इस दौरान लगे श्रीराम के जयकारों से क्षेत्र गूंज उठा। इसी क्रम में कलाकारों ने नगर दर्शन का मंचन किया।
इसमें विश्वामित्र के आश्रम से अयोध्या से लौट रहे श्रीराम, लक्ष्मण, गुरु विश्वामित्र से जनकपुर देखने का आग्रह करते हैं। विश्वामित्र दोनों भाइयों को नगर दर्शन की अनुमति देते हैं। दोनों भाई बड़े ही मनोयोग से नगर दर्शन करते हैं। इस दौरान राम पेड़ की आड़ में छिपकर सीता जी को देखते हैं। सीता जी को देखकर भगवान श्रीराम मुग्ध हो जाते हैं और जब इस बात का पता विश्वामित्र को होता है तो वे भगवान राम को सीता स्वयंवर में ले जाते हैं।