{"_id":"62b8a880e2d6b66ca67a00b8","slug":"be-smart-on-the-road-e-rickshaw-bike-and-car-in-the-hands-of-minors-azamgarh-news-vns6609303143","type":"story","status":"publish","title_hn":"सड़क पर रहें होशियार, नाबालिगों के हाथ में ई-रिक्शा, बाइक और कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सड़क पर रहें होशियार, नाबालिगों के हाथ में ई-रिक्शा, बाइक और कार
विज्ञापन
नगर क्षेत्र में ई-रिक्शा चलाता नाबालिग। संवाद
- फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। सड़क पर निकल रहे हैं तो होशियार रहिए। सड़क पर वाहन लेकर फर्राटा भर रहे नाबालिग कभी भी आपको अपनी चपेट में लेकर हताहत कर सकते हैं। मार्गों पर इनकी रफ्तार हवा से बातें करने वाली होती हैं। बाइक और कार ही नहीं ऑटो और ई-रिक्शा का संचालन भी बड़े पैमाने पर नाबालिग कर रहे हैं। नियमानुसार यह गलत है। इनके पास न तो लाइसेंस है और न ही वाहन चलाने की परिपक्वता। ऐसे में दुर्घटना होने का भय रहता है।
शहर की सड़कों पर यातायात नियमों का उल्लंघन कैसे होता है, यह बखूबी देखा जा सकता है। खासकर तब जब विद्यालय खुले हों। नियम के कानूनों की बात करें तो ड्राइविंग लाइसेंस न होने पर ढाई हजार और दुर्घटना की स्थिति में 25 हजार रुपये तक जुर्माने का नियम हैं लेकिन कई बार ट्रिपलिंग करते 12 से 14 वर्ष के यह बच्चे देखे जाते हैं। हाईवे के किनारे तो अक्सर अभिभावक खुद अपने हाथों से कार के स्टेयरिंग तक इनके हाथों में थमा देते हैं। यही नहीं, शहर में छोटे-छोटे बच्चे भी ई-रिक्शा चलाते हुए आसानी से नजर आ जाएंगे। जो अपनी और उसमें बैठने वाली सवारियों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। शहर में स्थित कई बड़े स्कूलों में सैकड़ों की संख्या में विद्यार्थी दो पहिया वाहनों पर आते हैं।
नाबालिग यदि वाहन चला रहे तो वह यातायात नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। इसे लेकर अभियान चलाया जाएगा। ताकि उन पर अंकुश लग सके। इसके साथ ही अभिभावकों से भी यह अपील है कि वह अपने नाबालिग बच्चों को वाहन न दें। - संतोष कुमार सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन
विज्ञापन
विज्ञापन
शहर की सड़कों पर यातायात नियमों का उल्लंघन कैसे होता है, यह बखूबी देखा जा सकता है। खासकर तब जब विद्यालय खुले हों। नियम के कानूनों की बात करें तो ड्राइविंग लाइसेंस न होने पर ढाई हजार और दुर्घटना की स्थिति में 25 हजार रुपये तक जुर्माने का नियम हैं लेकिन कई बार ट्रिपलिंग करते 12 से 14 वर्ष के यह बच्चे देखे जाते हैं। हाईवे के किनारे तो अक्सर अभिभावक खुद अपने हाथों से कार के स्टेयरिंग तक इनके हाथों में थमा देते हैं। यही नहीं, शहर में छोटे-छोटे बच्चे भी ई-रिक्शा चलाते हुए आसानी से नजर आ जाएंगे। जो अपनी और उसमें बैठने वाली सवारियों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। शहर में स्थित कई बड़े स्कूलों में सैकड़ों की संख्या में विद्यार्थी दो पहिया वाहनों पर आते हैं।
विज्ञापन
नाबालिग यदि वाहन चला रहे तो वह यातायात नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। इसे लेकर अभियान चलाया जाएगा। ताकि उन पर अंकुश लग सके। इसके साथ ही अभिभावकों से भी यह अपील है कि वह अपने नाबालिग बच्चों को वाहन न दें। - संतोष कुमार सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन
विज्ञापन