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आरक्षण बचाने के लिए हर संघर्ष को रहें तैयार
ब्यूरो अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Tue, 29 Sep 2015 12:11 AM IST
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आजमगढ़। हम अपने अधिकार के लिए सदा संघर्ष करते रहेंगे और आरक्षण को बचाने के लिए जो बन पड़ेगा हम करेंगे। उक्त बातें पूर्व सांसद बलिहारी बाबू ने सोमवार को मेहता पार्क में आयोजित अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अधिकार बचाओ संघर्ष मोर्चा के एक दिवसीय धरने को संबोधित करते हुए कहा।
उन्होंने कहा कि हम लोग एकजुट होकर संघर्ष करेंगे। यह लड़ाई अधिकार मिलने तक जारी रहेगी। इसके लिए जरूरत है लोगों को जगाने की। जब सब लोग जागेंगे तभी हम अपने अधिकार की रक्षा कर सकेंगे। धरने को समर्थन देते हुए पूर्व सांसद रमाकांत यादव ने कहा कि मैं तो शुरू से ही आरक्षण का समर्थक रहा हूं। आरक्षण के लिए मैं हर संघर्ष को तैयार हूं। उन्होंने कहा कि समाज के लोग जब जागेंगे तभी अपने अधिकार की रक्षा करेंगे। आरक्षण हमारा हक हैं और हम इसे खत्म नहीं होने देंगे। धरने के बाद आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति द्वारा जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति, राज्यपाल और केंद्रीय मंत्री भारत सरकार रामविलास पासवान को ज्ञापन सौंपा गया। जिसमें मांग की गई कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के जमीन विक्रय कानून में कोई संशोधन न किया जाए। इन जातियों के आरक्षण का कोटा पूरा किया जाए। प्रोन्नति में भी आरक्षण कोटे को बहाल किया जाए। साथ ही इन जातियों को समय से छात्रबृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति दिए जाने की व्यवस्था की जाए। इसके अलावा कई अन्य मांगे भी शामिल थी। इस मौके पर रामहर्ष, फूलबदन, लालचंद, गुलबास अधिवक्ता, जनार्दन, राजेश कुमार, डा. रामवृक्ष गौतम, डा. आरपी भारती, डा. रामकेर राम, विजय कुमार आदि उपस्थित थे। अध्यक्षता श्यामलाल और संचालन जनार्दन ने किया।
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उन्होंने कहा कि हम लोग एकजुट होकर संघर्ष करेंगे। यह लड़ाई अधिकार मिलने तक जारी रहेगी। इसके लिए जरूरत है लोगों को जगाने की। जब सब लोग जागेंगे तभी हम अपने अधिकार की रक्षा कर सकेंगे। धरने को समर्थन देते हुए पूर्व सांसद रमाकांत यादव ने कहा कि मैं तो शुरू से ही आरक्षण का समर्थक रहा हूं। आरक्षण के लिए मैं हर संघर्ष को तैयार हूं। उन्होंने कहा कि समाज के लोग जब जागेंगे तभी अपने अधिकार की रक्षा करेंगे। आरक्षण हमारा हक हैं और हम इसे खत्म नहीं होने देंगे। धरने के बाद आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति द्वारा जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति, राज्यपाल और केंद्रीय मंत्री भारत सरकार रामविलास पासवान को ज्ञापन सौंपा गया। जिसमें मांग की गई कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के जमीन विक्रय कानून में कोई संशोधन न किया जाए। इन जातियों के आरक्षण का कोटा पूरा किया जाए। प्रोन्नति में भी आरक्षण कोटे को बहाल किया जाए। साथ ही इन जातियों को समय से छात्रबृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति दिए जाने की व्यवस्था की जाए। इसके अलावा कई अन्य मांगे भी शामिल थी। इस मौके पर रामहर्ष, फूलबदन, लालचंद, गुलबास अधिवक्ता, जनार्दन, राजेश कुमार, डा. रामवृक्ष गौतम, डा. आरपी भारती, डा. रामकेर राम, विजय कुमार आदि उपस्थित थे। अध्यक्षता श्यामलाल और संचालन जनार्दन ने किया।
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