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Batla House Encounter: दोषी आरिज खान की मौत की सजा उम्रकैद में बदली, हाईकोर्ट के फैसले से परिवार को जगी उम्मीद

Thu, 12 Oct 2023 10:47 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़ Published by: उत्पल कांत Updated Thu, 12 Oct 2023 10:47 PM IST
सार

बाटला हाउस मुठभेड़ कांड में साकेत कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए आतंकी आरिज खान की मौत की सजा को दिल्ली हाईकोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया। दिल्ली पुलिस इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की हत्या के लिए ट्रायल कोर्ट ने आरिज को मौत की सजा सुनाई थी।

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Batla House Encounter Death sentence of convict Ariz Khan changed to life imprisonment
बाटला हाउस एनकाउंटर के दोषी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने बाटला हाउस एनकाउंटर के दोषी आरिज खान को मिली फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। इससे अन्य आरोपियों में आशा की एक किरण दिखी है। हालांकि इस मामले में परिवार के लोग कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।

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दिल्ली पुलिस की टीम द्वारा 19 सितंबर 2008 को बाटला हाउस में किए गए एंकाउंटर में इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा शहीद हो गए थे। दो आतंकी आतिफ अमीन और मोहम्मद साजिद मारे गए थे। दो अन्य आतंकवादी सैफ मोहम्मद और आरिज खान भाग गए थे। जबकि एक आतंकी जीशान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।

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मौत की सजा के साथ ही 11 लाख रुपये का जुर्माना

मुठभेड़ के बाद आतंकी आरिज नेपाल भाग गया था। वहां से 2018 में आरिज को गिरफ्तार किया गया। आरिज आजमगढ़ जनपद के बिलरियागंज का रहने वाला है। वर्तमान में उसका परिवार कोट मुहल्ले में रहता है। इस मामले में दिल्ली की साकेत कोर्ट ने 8 मार्च 2021 को आरिज खान को दोषी ठहराया और 15 मार्च 2021 को मौत की सजा सुनाई। इसके साथ ही उस पर 11 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

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निचली अदालत से मिली सजा को आरिज खान ने दिल्ली हाइकोर्ट में चुनौती दी। दिल्ली हाईकोर्ट ने आरिज को दोषी माना लेकिन गुरुवार को सुनाए गए फैसले में निचली अदालत के फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया। हाईकोर्ट द्वारा दिए गए इस फैसले से परिजनों को आशा की किरण नजर आई है। लेकिन वह इस मामले में कुछ कह नहीं रहे हैं। मुहल्ले में भी इस बात को लेकर कोई विशेष हलचल देखने को नहीं मिली।

आजमगढ़ के बेगुनाह नौजवानों को बलि का बकरा बनाया गया

बाटला हाउस एनकाउंटर को फर्जी करार देते हुए इसकी न्यायिक जांच की मांग को देकर लगातार धरना प्रदर्शन करने वाले उलेमा कौंसिल के प्रवक्ता तलहा रशादी ने कहा कि जितने बच्चों को फंसाया गया है वे बेगुनाह हैं। कांग्रेस के एक मंत्री को बलि का बकरा चाहिए था। उन्होंने आजमगढ़ के पढ़ने लिखने वाले बेगुनाह नौजवानों को बलि का बकरा बनाया। हाईकोर्ट ने जो फैसला दिया है उससे यह उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट से हमें न्याय जरूर मिलेगा। जनपद के बेगुनाह बच्चे जयपुर की तरह बाइज्जत बरी होंगे।
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