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बापू ने भी कभी शिब्ली कॉलेज में गुजारी थी रात
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आजमगढ़। शिब्ली नेशनल कालेज में तालीम का झंडा ही बुलंद नहीं हुआ बल्कि आजादी के लड़ाई भी यहां से लड़ी गई। सविनय अवज्ञा आंदोलन की सफलता के लिए निकले महात्मा गांधी आजमगढ़ भी पहुंचे थे। महात्मा गांधी शिब्ली नेशनल कालेज में उनके आगमन इतिहास संरक्षित है।
अल्लामा शिब्ली नोमानी ने वर्ष 1883 में शिब्ली कॉलेज की स्थापना की थी। वे आजमगढ़ शहर से 14 किलोमीटर दूर बिंदवल गांव के रहने वाले थे। शिब्ली एकेडमी महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू और मौलाना अबुल कलाम आजाद सरीखे स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं का केंद्र भी था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इस कालेज में रात गुजारी।वहीं परिसर में कुएं के चबुतरे पर स्नान भी किया। कालेज प्रबंधन के आगवनी व खिदमत से खुश होकर गांधी जी ने शुक्रिया भी अदा करने वाला खत लिखा था। शिब्ली कालेज की लाइब्रेरी में उर्दू में लिखा उनका आज भी आमंत्रण पत्र मौजूद है। गांधी जी का उर्दू में लिखा गया यह दुर्लभ पत्र है। शिब्ली एकेडमी के सीनियर रिसर्च फेलो उमैर सिद्दीक नदवी ने बताया कि वर्ष 1929 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी शिब्ली कॉलेज में आए थे। जिस समय राष्ट्रपिता यहां पहुंचे उस समय मगरिब की नमाज पढ़ी जा रही थी। इस पर गांधी जी बगैर किसी से कुछ बोले बैठ गए। नमाज खत्म होने के बाद उन्होंने लोगों से मुलाकात की। इस दौरान एक व्यक्ति ने गांधी जी से आटोग्राफ मांगा। जिस पर उन्होंने उर्दू भाषा में आटोग्राफ दिया। जिससे लोग बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के शिब्ली एकेडमी परिसर में आगमन इतिहास के पन्ने में सुनहरे अक्षरों से अंकित है। इस कॉलेज में उन्होंने रात गुजारी तो वहीं परिसर में कुएं के चबूतरे पर स्नान भी किया। शिब्ली कॉलेज की लाइब्रेरी में उर्दू में लिखा उनका आमंत्रण पत्र आज भी मौजूद है।
शहादत दिवस आज, दी जाएगी श्रद्धांजलि
आजमगढ़। महात्मा गांधी की शहादत दिवस 30 जनवरी को है। इस मौके पर देश के सभी शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। जिला सूचना अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन ने सभी विभागों को पत्र लिखकर दिन में 11 बजे दो मिनट का मौन रखने का निर्देश दिया है।
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अल्लामा शिब्ली नोमानी ने वर्ष 1883 में शिब्ली कॉलेज की स्थापना की थी। वे आजमगढ़ शहर से 14 किलोमीटर दूर बिंदवल गांव के रहने वाले थे। शिब्ली एकेडमी महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू और मौलाना अबुल कलाम आजाद सरीखे स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं का केंद्र भी था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इस कालेज में रात गुजारी।वहीं परिसर में कुएं के चबुतरे पर स्नान भी किया। कालेज प्रबंधन के आगवनी व खिदमत से खुश होकर गांधी जी ने शुक्रिया भी अदा करने वाला खत लिखा था। शिब्ली कालेज की लाइब्रेरी में उर्दू में लिखा उनका आज भी आमंत्रण पत्र मौजूद है। गांधी जी का उर्दू में लिखा गया यह दुर्लभ पत्र है। शिब्ली एकेडमी के सीनियर रिसर्च फेलो उमैर सिद्दीक नदवी ने बताया कि वर्ष 1929 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी शिब्ली कॉलेज में आए थे। जिस समय राष्ट्रपिता यहां पहुंचे उस समय मगरिब की नमाज पढ़ी जा रही थी। इस पर गांधी जी बगैर किसी से कुछ बोले बैठ गए। नमाज खत्म होने के बाद उन्होंने लोगों से मुलाकात की। इस दौरान एक व्यक्ति ने गांधी जी से आटोग्राफ मांगा। जिस पर उन्होंने उर्दू भाषा में आटोग्राफ दिया। जिससे लोग बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के शिब्ली एकेडमी परिसर में आगमन इतिहास के पन्ने में सुनहरे अक्षरों से अंकित है। इस कॉलेज में उन्होंने रात गुजारी तो वहीं परिसर में कुएं के चबूतरे पर स्नान भी किया। शिब्ली कॉलेज की लाइब्रेरी में उर्दू में लिखा उनका आमंत्रण पत्र आज भी मौजूद है।
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शहादत दिवस आज, दी जाएगी श्रद्धांजलि
आजमगढ़। महात्मा गांधी की शहादत दिवस 30 जनवरी को है। इस मौके पर देश के सभी शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। जिला सूचना अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन ने सभी विभागों को पत्र लिखकर दिन में 11 बजे दो मिनट का मौन रखने का निर्देश दिया है।
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