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खड़ंजा उखाड़कर बिछा दी गिट्टी और हो गए फरार
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आजमगढ़। पूर्व डीएम के निर्देश पर नगरपालिका की ओर से शहर के नरौली पुल से लेकर गरूण होटल तक बंधे पर पाथ-वे का निर्माण शुरू हुआ। ठेकेदार ने पूरे मार्ग पर ईंटों को उखाड़कर गिट्टी बिछा दिया है। कार्य को पूरा करने के बजाय ठेकेदार दिवाली से ही गायब है। इस वजह से इस मार्ग से आवागमन में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
तमसा महाभियान के दौरान इस अभियान से जुड़े लोगों की मांग पर पूर्व डीएम शिवाकांत द्विवेदी ने नगर के नरौली पुल से लेकर गरूण होटल तक पाथ-वे के निर्माण का निर्णय लिया। अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए उन्होंने काफी मशक्कत की। उन्होंने इंजीनियरों से पाथ-वे का मानचित्र तैयार कराया। बजट का निर्धारण होने के बाद उन्होंने इसके निर्माण का जिम्मा नगरपालिका को सौंपा लेकिन निर्माण से पूर्व इसके रास्ते में आने वाले विद्युत पोल और तारों को हटाना जरूरी था। लाखों रुपये लेकर बिजली विभाग ने इन तार और पोल को निर्माण के रास्ते से हटाया। इसके बाद नगरपालिका ने लगभग 28 लाख रुपये का टेंडर कराया। टेंडर होने के बाद ठेकेदार ने कार्य को शुरू कराया गया। बंधे पर लगे खड़ंजे कोे उखाड़कर उसकी गिट्टी तोड़कर उसे मार्ग पर बिछा दिया गया। दिवाली तक यह कार्य चला इसके बाद कार्य बंद हो गया। तबसे लेकर आज तक इसका निर्माण दोबारा शुुरू नहीं हो सका। जबकि इस मार्ग से होकर बहुत से लोगों का आवागमन होता है। लगभग एक दर्जन मकान भी बंधे के दूसरे किनारे पर नदी की तरफ बने हुए हैं। इन घरों के लोग भी इसी मार्ग से आवागमन करते हैं। मार्ग पर गिट्टी डालकर छोड़े जाने से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है लेकिन नगरपालिका और प्रशासन दोनों मौन साधे हैं। वहीं इस कार्य में लगे ठेकेदार का कहीं अता पता नहीं है।
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तमसा महाभियान के दौरान इस अभियान से जुड़े लोगों की मांग पर पूर्व डीएम शिवाकांत द्विवेदी ने नगर के नरौली पुल से लेकर गरूण होटल तक पाथ-वे के निर्माण का निर्णय लिया। अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए उन्होंने काफी मशक्कत की। उन्होंने इंजीनियरों से पाथ-वे का मानचित्र तैयार कराया। बजट का निर्धारण होने के बाद उन्होंने इसके निर्माण का जिम्मा नगरपालिका को सौंपा लेकिन निर्माण से पूर्व इसके रास्ते में आने वाले विद्युत पोल और तारों को हटाना जरूरी था। लाखों रुपये लेकर बिजली विभाग ने इन तार और पोल को निर्माण के रास्ते से हटाया। इसके बाद नगरपालिका ने लगभग 28 लाख रुपये का टेंडर कराया। टेंडर होने के बाद ठेकेदार ने कार्य को शुरू कराया गया। बंधे पर लगे खड़ंजे कोे उखाड़कर उसकी गिट्टी तोड़कर उसे मार्ग पर बिछा दिया गया। दिवाली तक यह कार्य चला इसके बाद कार्य बंद हो गया। तबसे लेकर आज तक इसका निर्माण दोबारा शुुरू नहीं हो सका। जबकि इस मार्ग से होकर बहुत से लोगों का आवागमन होता है। लगभग एक दर्जन मकान भी बंधे के दूसरे किनारे पर नदी की तरफ बने हुए हैं। इन घरों के लोग भी इसी मार्ग से आवागमन करते हैं। मार्ग पर गिट्टी डालकर छोड़े जाने से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है लेकिन नगरपालिका और प्रशासन दोनों मौन साधे हैं। वहीं इस कार्य में लगे ठेकेदार का कहीं अता पता नहीं है।
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