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Azamgarh News: आपराधिक मुकदमे के चलते शस्त्र लाइसेंस निरस्त
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डीएम रविंद्र कुमार ने सरायमीर थाना क्षेत्र के सड़वाहा निवासी आद्या चौहान का शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिया है। यह कार्रवाई भारतीय शस्त्र अधिनियम के तहत की गई है। डीएम ने लोक शांति और जन सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव की आशंका को इसका आधार बताया है।
यह आदेश 24 जून को डीएम ने जारी किया। थाना सरायमीर और पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट में लाइसेंसधारक के विरुद्ध वर्ष 2002 से 2026 तक विभिन्न आपराधिक मुकदमे दर्ज होने की बात कही गई है। कुछ मामले अभी न्यायालय में विचाराधीन हैं। पुलिस रिपोर्ट में आद्या चौहान का अपने पट्टीदार से भूमि विवाद भी बताया गया है। वर्ष 2026 में मारपीट का एक नया मुकदमा भी दर्ज हुआ।
रिपोर्ट में उनकी सामान्य प्रतिष्ठा पर भी प्रतिकूल टिप्पणी की गई है। उन्होंने कुल 158 कारतूस खरीदे थे। इनमें से वर्तमान में केवल 19 कारतूस बचे पाए गए। आद्या चौहान ने अपने जवाब में आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि अधिकांश मुकदमे गांव में रंजिश के कारण दर्ज हुए हैं। किसी भी मामले में लाइसेंसी शस्त्र के दुरुपयोग का आरोप नहीं है। उन्होंने यह भी दलील दी कि केवल मुकदमे लंबित होने के आधार पर लाइसेंस निरस्त नहीं किया जा सकता।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद डीएम ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला दिया। उन्होंने अपने आदेश में कहा कि शस्त्र लाइसेंस कोई मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि एक विशेषाधिकार है। लोक शांति और सार्वजनिक सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका होने पर लाइसेंस निरस्त करने का अधिकार है। इसी आधार पर आद्या चौहान का शस्त्र लाइसेंस निरस्त किया जाता है।
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यह आदेश 24 जून को डीएम ने जारी किया। थाना सरायमीर और पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट में लाइसेंसधारक के विरुद्ध वर्ष 2002 से 2026 तक विभिन्न आपराधिक मुकदमे दर्ज होने की बात कही गई है। कुछ मामले अभी न्यायालय में विचाराधीन हैं। पुलिस रिपोर्ट में आद्या चौहान का अपने पट्टीदार से भूमि विवाद भी बताया गया है। वर्ष 2026 में मारपीट का एक नया मुकदमा भी दर्ज हुआ।
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रिपोर्ट में उनकी सामान्य प्रतिष्ठा पर भी प्रतिकूल टिप्पणी की गई है। उन्होंने कुल 158 कारतूस खरीदे थे। इनमें से वर्तमान में केवल 19 कारतूस बचे पाए गए। आद्या चौहान ने अपने जवाब में आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि अधिकांश मुकदमे गांव में रंजिश के कारण दर्ज हुए हैं। किसी भी मामले में लाइसेंसी शस्त्र के दुरुपयोग का आरोप नहीं है। उन्होंने यह भी दलील दी कि केवल मुकदमे लंबित होने के आधार पर लाइसेंस निरस्त नहीं किया जा सकता।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद डीएम ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला दिया। उन्होंने अपने आदेश में कहा कि शस्त्र लाइसेंस कोई मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि एक विशेषाधिकार है। लोक शांति और सार्वजनिक सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका होने पर लाइसेंस निरस्त करने का अधिकार है। इसी आधार पर आद्या चौहान का शस्त्र लाइसेंस निरस्त किया जाता है।