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बाटला हाउस एनकाउंटर: इंजीनियरिंग करने के बाद आईएम से जुडा था आरिज उर्फ जुनैद, फांसी की सजा को दी हाईकोर्ट में चुनौती
Sun, 25 Jul 2021 03:02 PM IST
वाराणसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 25 Jul 2021 03:02 PM IST
सार
आरिज उर्फ जुनैद ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। इसी दौरान वह आईएम के संपर्क में आ गया और आतंकी घटनाओं को अंजाम देन की कवायद में जुट गया। 2008 में दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद व यूपी के अदालतों में हुए धमकों का यह मुख्य साजिशकर्ता था।
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आरिज खान।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आतंकी आरिज उर्फ जुनैद ने दिल्ली के साकेत कोर्ट द्वारा दी गई फांसी की सजा के खिलाफ अब दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की है। हाईकोर्ट में सजा के खिलाफ अपील के बाद आजमगढ़ जिले में भी एक बार फिर बटला कांड चर्चा का विषय बन गया है।
आरिज उर्फ जुनैद ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। इसी दौरान वह आईएम के संपर्क में आ गया और आतंकी घटनाओं को अंजाम देन की कवायद में जुट गया। 2008 में दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद व यूपी के अदालतों में हुए धमकों का यह मुख्य साजिशकर्ता था। इन धमको में कुल 165 लोगों की मौत हुई थी तो 535 लोग घायल हुए थे।
मूलरुप से आजमगढ़ जिले के बिलरियागंज थाना क्षेत्र के नसीरपुर गांव का वह रहने वाला है। बटला मुठभेड़ कांड के दौरान यह भी वहां मौजूद था और घटना के बाद भाग निकलने में सफल हो गया था। इस पर इंस्पेक्टर मोहन चंद्र की हत्या का भी आरोप है।
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आरिज उर्फ जुनैद ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। इसी दौरान वह आईएम के संपर्क में आ गया और आतंकी घटनाओं को अंजाम देन की कवायद में जुट गया। 2008 में दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद व यूपी के अदालतों में हुए धमकों का यह मुख्य साजिशकर्ता था। इन धमको में कुल 165 लोगों की मौत हुई थी तो 535 लोग घायल हुए थे।
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मूलरुप से आजमगढ़ जिले के बिलरियागंज थाना क्षेत्र के नसीरपुर गांव का वह रहने वाला है। बटला मुठभेड़ कांड के दौरान यह भी वहां मौजूद था और घटना के बाद भाग निकलने में सफल हो गया था। इस पर इंस्पेक्टर मोहन चंद्र की हत्या का भी आरोप है।
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दिल्ली के साकेत कोर्ट द्वारा 15 मार्च 2021 को उसे फांसी की सजा सुनाई गई। इस सजा पर आरिज के घर वालों ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी थी। आरिज के पिता की मौत हो चुकी है तो वहीं एक भाई चाचा डॉ. फखरे आलम के के नसीरपुर स्थित क्लीनिक पर काम करता है। वहीं दूसरा भाई दिल्ली में ही है।
आरिज का जिला मुख्यालय पर जालंधरी मोहल्ले में भी एक मकान है। जहां उसकी मां रहती है। आरिज द्वारा साकेत कोर्ट के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील किए जाने के बाद जिले में एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म नजर आया। यह अलग बात रही कि परिवार के लोग इस मुद्दे पर भी कुछ भी बोलने से इंकार करते नजर आए।