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Azamgarh News: सुप्रीम कोर्ट में अपील खारिज, जुर्माना किया माफ

Tue, 11 Jul 2023 11:03 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 11 Jul 2023 11:03 PM IST
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Appeal dismissed in Supreme Court, fine waived
सरकारी अभिलेखों में मृत घोषित किए गए लाल बिहारी मृतक की सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल की गई अपील सात जुलाई को खारिज हो गई है। न्यायालय से यह राहत जरूर मृतक को मिली है कि हाईकोर्ट द्वारा लगाया गया 10 हजार रुपये का जुर्माना माफ कर दिया गया है। वहीं लाल बिहारी मृतक अभी भी शांत न बैठने की बात कहते हुए इस मामले को अब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में ले जाने की बात कह रहे हैं। मुबाकरपुर के अमिलो निवासी लाल बिहारी मृतक को सरकारी अभिलेखों में उसके पट्टीदारों व राजस्व कर्मियों की मिली भगत से मृतक घोषित कर दिया गया था। खुद को जिंदा साबित करने के लिए उन्होंने वर्षो संघर्ष किया। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी, विश्वनाथ प्रताप सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा तो वहीं विधान सभा में कागज भी फेंका। इतना ही नहीं खुद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने को लेकर उसने अपनी भतीजे का अपहरण भी किया। वर्षो के संघर्ष के दौरान और कई जीवित मृतक भी सामने आ गए, जिसे लेकर लाल बिहारी ने मृतक संघ का गठन किया। जिसके दम पर उसने कई और जीवित मृतकों को सरकारी अभिलेखों में जिंदा कराने का कार्य किया। खुद जिंदा होने के बाद लाल बिहारी ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में 25 करोड़ के मुआवजे की मांग को लेकर अपील दाखिल की। जिसे लेकर भी लंबी बहस चली और अंतत: हाईकोर्ट ने उसकी अपील खारिज करने के साथ ही उस पर 10 हजार का जुर्माना लगा दिया। इस बीच उनके जीवन पर बनी फिल्म कागज भी रिलीज हो गई। हाईकोर्ट से अपील खारिज होने के बाद लाल बिहारी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को सुरक्षित रखते हुए अपील खारिज कर दी। यह राहत जरूर मृतक को मिली कि उस पर हाईकोर्ट के लगाए गए 10 हजार के जुर्माने को सर्वोच्च न्यायालय ने माफ कर दिया। अब लाल बिहारी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में अपील करेगा। उन्होंने कहा कि अपना पूरा जीवन खुद को सरकारी रिकार्ड में जीवित करने में लगा दिया। जिसके चलते ही मुआवजे की मांग कर रहा हूं। हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी अपील खारिज हो गई है लेकिन मेरा संघर्ष जारी रहेगा।
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