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समाज कल्याण घोटाले में एक और हिरासत में

Thu, 15 Feb 2018 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो /आजमगढ़
अमर उजाला ब्यूरो /आजमगढ़ Updated Thu, 15 Feb 2018 12:15 AM IST
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Another custodian in the social welfare scam
घोटाला
150 करोड़ रुपये के समाज कल्याण घोटाले की कड़ी में एक करोड़ के गबन के आरोप में कोतवाली पुलिस ने एक और आरोपी को हिरासत में लिया है। देर रात कर पकड़े गए आरोपी से पुलिस पूछताछ कर रही थी, वहीं पकड़ा गया युवक आरोपों से इंकार कर रहा था। उधर, पकड़े गए युवक को छुड़ाने की कोशिशों को लेकर भी बाजार गरम था।
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छात्रपूर्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति और पेंशन आदि मदों में वर्ष 2007 से 2013 के दौरान 150 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। शिकायत के बाद मामले में 2.86 करोड़ के गबन के साक्ष्य मिले थे। इसमें 36 लोगों को नामजद करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
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मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी अभी निकाय चुनाव से पहले हुई थी। इसके बाद कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई थी। इसी घोटाले में लगभग एक करोड़ के रिटर्निंग चेकों को डीसीबी की शाखाओं में भुनाया गया था। गोविंद, रमेश, अनीता और राहुल निवासी देवखरी के नाम से ये खाते खोले गए थे।
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आरोपियों के नाम से आरसी भी जारी हुई थी, लेकिन दिखाए गए पते पर कोई नहीं मिला था। तब से इनकी तलाश जारी थी। बुधवार को कंधरापुर पुलिस ने जोलहापुर बथुवा से एक युवक को हिरासत में ले लिया। उसके पास से कोई आईडी तो नहीं मिली, लेकिन पुलिस के शक था कि ये गायब खातेधारक गोविंद है।

कंधरापुर पुलिस ने उसे कोतवाली पुलिस के हवाले कर दिया। देर शाम तक पुलिस उससे पूछताछ कर रही थी। कोतवाल योगेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि अभी ये पुष्ट नहीं पाया है कि आरोपी खातेधारक गोविंद ही है। पूछताछ की जा रही है। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

गोविंद के पकड़े जाने पर हो सकते हैं कई खुलासे
आजमगढ़। 150 करोड़ के समाज कल्याण घोटाले में अभी कई राज दफन हैं। विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तो नामजद रिपोर्ट दर्ज हैं, लेकिन कई प्राइवेट लोग भी इसमें शामिल थे। पुलिस की जांच ढीली होने के कारण अभी तक इनके नाम खुलकर सामने नहीं सके हैं। यदि गोविंद की गिरफ्तारी पुष्ट हो जाती है तो पूछताछ में इन प्राइवेट सफेदपोशों के नाम खुलकर सामने आ सकते हैं।


छुड़ाने की कोशिशों की उड़ती रही चर्चा
आजमगढ़। गोविंद को हिरासत में कंधरापुर पुलिस ने लिया था। मुकदमा शहर कोतवाली में होने के कारण इसे शहर कोतवाली पुलिस को सौंप दिया गया। देर शाम तक पुलिस जहां इसकी पहचान से इंकार कर रही थी। वहीं, घोटाले के सफेदपोशों की ओर से उसे छुड़ाने की कोशिशों की चर्चाएं भी फैसले लगी थी। कहा जा रहा था कि इन कोशिश के बीच ही पुलिस गिरफ्तारी को पुष्ट नहीं कर रही है।
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