{"_id":"5a5a5d734f1c1bb33f8b4b83","slug":"allocation-canceled-on-35-ponds-residential-and-agricultural-lease","type":"story","status":"publish","title_hn":"35 पोखरियों पर दे दिया था आवासीय और कृषि पट्टा, आवंटन निरस्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
35 पोखरियों पर दे दिया था आवासीय और कृषि पट्टा, आवंटन निरस्त
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Sun, 14 Jan 2018 12:56 AM IST
विज्ञापन
पोखरी
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मार्टीनगंज तहसील की 65 पोखरियों की जमीन पर अवैध तरीके से ग्रामीणों की ओर से कब्जा कर लिया गया। अधिकारियों की मिलीभगत से इसका आवासीय और कृषि पट्टा अपने नाम करा लिया गया था। जिलाधिकारी ने इन जमीनों को आवंटन निरस्त करते हुए मामले में संलिप्त लेखापाल और राजस्व निरीक्षक पर विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
मार्टीनगंज तहसील में ग्रामीणों की ओर से 65 ताल, पोखरे और भीटे की जमीन पर कब्जा कर लिया था। लेखापाल और राजस्व निरीक्षक के साथ ही अधिकारियों की मिलीभगत से इसका आवासीय और कृषि पट्टा नियम विरुद्ध तरीके से अपने नाम करा लिया था।
मामले की सुनवाई जिलाधिकारी कोर्ट में चल रही थी। सुनवाई के दौरान पाया गया कि गांव लसड़ा खुर्द पहले फूलपुर तहसील में था। यहां 35 ताल, पोखरे और भीटे की जमीन की आवासीय एवं कृषि पट्टा ग्रामीणों के नाम कर दिया गया था।
विज्ञापन
शासकीय अधिवक्ता की बहस के बाद जिलाधिकारी ने पाया कि तत्कालीन एसडीएम की ओर से नियम के खिलाफ ये कार्रवाई की गई है। जिलाधिकारी ने उक्त जमीनों के आवंटन निरस्त करते हुए इसे पूर्ववत दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
साथ ही मामले में संलिप्त लेखापाल और राजस्व निरीक्षक पर विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी के आदेश से कब्जेधारियों और संलिप्त लेखापाल और राजस्व निरीक्षकों में हड़कंप मचा है।
विज्ञापन
मार्टीनगंज तहसील में ग्रामीणों की ओर से 65 ताल, पोखरे और भीटे की जमीन पर कब्जा कर लिया था। लेखापाल और राजस्व निरीक्षक के साथ ही अधिकारियों की मिलीभगत से इसका आवासीय और कृषि पट्टा नियम विरुद्ध तरीके से अपने नाम करा लिया था।
विज्ञापन
मामले की सुनवाई जिलाधिकारी कोर्ट में चल रही थी। सुनवाई के दौरान पाया गया कि गांव लसड़ा खुर्द पहले फूलपुर तहसील में था। यहां 35 ताल, पोखरे और भीटे की जमीन की आवासीय एवं कृषि पट्टा ग्रामीणों के नाम कर दिया गया था।
विज्ञापन
शासकीय अधिवक्ता की बहस के बाद जिलाधिकारी ने पाया कि तत्कालीन एसडीएम की ओर से नियम के खिलाफ ये कार्रवाई की गई है। जिलाधिकारी ने उक्त जमीनों के आवंटन निरस्त करते हुए इसे पूर्ववत दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
साथ ही मामले में संलिप्त लेखापाल और राजस्व निरीक्षक पर विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी के आदेश से कब्जेधारियों और संलिप्त लेखापाल और राजस्व निरीक्षकों में हड़कंप मचा है।