{"_id":"56-96695","slug":"Azamgarh-96695-56","type":"story","status":"publish","title_hn":" हर दुख सहकर बेटों को दी मंजिल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हर दुख सहकर बेटों को दी मंजिल
Azamgarh
Updated Sun, 12 May 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आजमगढ़। मां तो है मां ,मां जैसी दुनिया में है कोई कहां। धनौती देवी और दुर्गावती देवी ने इसे सच कर दिखलाया । विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लाडले को ऊंचाइयों पर पहुंचाया। दोनों माताओं को अपने आईएएस बेटे पर नाज है।
मेहनगर तहसील के गंजोर गांव निवासी धनौती देवी के पति धनुषधारी सिंह मुंबई एयर पोर्ट पर इंस्पेक्टर पद पर तैनात थे। परिवार में कोई कमी नहीं थी। 70 के दशक में धनुषधारी सिंह का निधन हो जाने पर धनौती देवी पर पहाड़ टूट पड़ा। उस समय पांच साल के इकलौता पुत्र चंद्रशेखर के लालन-पालन और शिक्षा-दीक्षा चुनौती बन गई थी। फिर भी मां धनौती देवी ने हार नहीं मानी और गांधी जी को केवल अपना आदर्श ही नहीं माना, बल्कि उनका चरखा थाम लिया। चरखा काट-काट कर बेटे चंद्रशेखर सिंह को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए 90 के दशक में इलाहाबाद भेजा। इस दौरान माली हालत खराब होने से धनौती देवी को कदम-कदम पर मुसीबतें झेलना पड़ा। चंद्रशेखर की पढ़ाई के लिए सूत काट-काट कर पैसे भेजती रही। रूखा-सूखा खाकर उन्होंने बेटे को पीएचडी की डिग्री दिलाई। धनौती देवी ने बताया कि आज उनका लाडला बिहार प्रांत के हाजीपुर जिले में आईएएस आफिसर के रूप में देश की सेवा कर रहा है। बुलंदियों पर पहुंचे बेटे पर धनौती देवी को नाज है।
सगड़ी तहसील के भटनी गांव निवासी दुर्गावती देवी के पति चंद्रशेखर पांडेय घर पर रह खेती बारी-करते हैं। कभी परिवार में खेती को छोड़ कर बाहरी आय का कोई स्रोत नहीं था। दुर्गावती देवी अपने चारों पुत्रों को ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए आजीवन मुसीबतों को झेलती रहीं। वर्ष 2011 में दूसरे नंबर के पुत्र अश्वनी पांडेय के आईएएस आफिसर के मुकाम तक पहुंचा कर छोड़ा। आज अश्वनी पांडेय दिल्ली में आईएएस की ट्रेनिंग ले रहे हैं। मां दुर्गावती देवी ने बताया कि बच्चों की सफलता के लिए अपनी जरूरतों की चीजों में कटौती करती रही। एक-एक पैसे एकत्र कर पढ़ने के लिए भेजती रही। इस दौरान पक्का घर बनाने का सपना सपना ही रहा गया। बेटे अश्वनी पांडेय के ऊंचाइयों पर पहुंचने पर गौरवान्वित दुर्गावती देवी ने बताया कि बड़े पुत्र अरुणेश पांडेय अधिवक्ता हैं। तीसरे नंबर केपुत्र सौरभ आईएएस की तैयारी कर रहे हैं। चौथे पुत्र गौरव मेडिकल की तैयारी कर रहे हैं। आज नहीं तो कल इन्हें भी बुलंदियों पर पहुंचना है। सितारूल ऐसी मां है, जो गरीबी से संघर्ष करते हुए बच्चों को मुकाम पर पहुंचाई। मेहनगर तहसील के कम्हरिया गांव निवासी इस्माइल कभी कपड़े की सिलाई करते थे और घर पर पत्नी सितारूल गृहस्थी संभालती थी। बच्चों को अधिकारी बनाने के लिए गरीबी में जीते हुए भी सितारूल कभी हार नहीं मानी। तमाम झंझावतों को झेला और रूखा-सूखा खा कर बेटों को घर बाहर पढ़ने के लिए भेजा। बेटों और पौत्री की तरक्की पर सितारूल गौरवान्वित है। पुत्रों में याकूब अधिवक्ता हैं, तो आयुब लखनऊ में इंजीनियर हैं। जबकि अनवर मुराबाद में बीडीओ के पद पर सेवारत हैं। पौत्री अनुजम आरा आईपीएस अधिकारी है। सितारूल ने बताया कि बीती बातों को याद करने पर रोना आता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मेहनगर तहसील के गंजोर गांव निवासी धनौती देवी के पति धनुषधारी सिंह मुंबई एयर पोर्ट पर इंस्पेक्टर पद पर तैनात थे। परिवार में कोई कमी नहीं थी। 70 के दशक में धनुषधारी सिंह का निधन हो जाने पर धनौती देवी पर पहाड़ टूट पड़ा। उस समय पांच साल के इकलौता पुत्र चंद्रशेखर के लालन-पालन और शिक्षा-दीक्षा चुनौती बन गई थी। फिर भी मां धनौती देवी ने हार नहीं मानी और गांधी जी को केवल अपना आदर्श ही नहीं माना, बल्कि उनका चरखा थाम लिया। चरखा काट-काट कर बेटे चंद्रशेखर सिंह को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए 90 के दशक में इलाहाबाद भेजा। इस दौरान माली हालत खराब होने से धनौती देवी को कदम-कदम पर मुसीबतें झेलना पड़ा। चंद्रशेखर की पढ़ाई के लिए सूत काट-काट कर पैसे भेजती रही। रूखा-सूखा खाकर उन्होंने बेटे को पीएचडी की डिग्री दिलाई। धनौती देवी ने बताया कि आज उनका लाडला बिहार प्रांत के हाजीपुर जिले में आईएएस आफिसर के रूप में देश की सेवा कर रहा है। बुलंदियों पर पहुंचे बेटे पर धनौती देवी को नाज है।
विज्ञापन
सगड़ी तहसील के भटनी गांव निवासी दुर्गावती देवी के पति चंद्रशेखर पांडेय घर पर रह खेती बारी-करते हैं। कभी परिवार में खेती को छोड़ कर बाहरी आय का कोई स्रोत नहीं था। दुर्गावती देवी अपने चारों पुत्रों को ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए आजीवन मुसीबतों को झेलती रहीं। वर्ष 2011 में दूसरे नंबर के पुत्र अश्वनी पांडेय के आईएएस आफिसर के मुकाम तक पहुंचा कर छोड़ा। आज अश्वनी पांडेय दिल्ली में आईएएस की ट्रेनिंग ले रहे हैं। मां दुर्गावती देवी ने बताया कि बच्चों की सफलता के लिए अपनी जरूरतों की चीजों में कटौती करती रही। एक-एक पैसे एकत्र कर पढ़ने के लिए भेजती रही। इस दौरान पक्का घर बनाने का सपना सपना ही रहा गया। बेटे अश्वनी पांडेय के ऊंचाइयों पर पहुंचने पर गौरवान्वित दुर्गावती देवी ने बताया कि बड़े पुत्र अरुणेश पांडेय अधिवक्ता हैं। तीसरे नंबर केपुत्र सौरभ आईएएस की तैयारी कर रहे हैं। चौथे पुत्र गौरव मेडिकल की तैयारी कर रहे हैं। आज नहीं तो कल इन्हें भी बुलंदियों पर पहुंचना है। सितारूल ऐसी मां है, जो गरीबी से संघर्ष करते हुए बच्चों को मुकाम पर पहुंचाई। मेहनगर तहसील के कम्हरिया गांव निवासी इस्माइल कभी कपड़े की सिलाई करते थे और घर पर पत्नी सितारूल गृहस्थी संभालती थी। बच्चों को अधिकारी बनाने के लिए गरीबी में जीते हुए भी सितारूल कभी हार नहीं मानी। तमाम झंझावतों को झेला और रूखा-सूखा खा कर बेटों को घर बाहर पढ़ने के लिए भेजा। बेटों और पौत्री की तरक्की पर सितारूल गौरवान्वित है। पुत्रों में याकूब अधिवक्ता हैं, तो आयुब लखनऊ में इंजीनियर हैं। जबकि अनवर मुराबाद में बीडीओ के पद पर सेवारत हैं। पौत्री अनुजम आरा आईपीएस अधिकारी है। सितारूल ने बताया कि बीती बातों को याद करने पर रोना आता है।
विज्ञापन