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हत्या के आठ आरोपियों में तीन को उम्रकैद
Azamgarh
Updated Sun, 16 Dec 2012 05:30 AM IST
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मऊ। भूमि विवाद के दौरान हुई हत्या के मामले में शनिवार को तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पियूषचंद श्रीवास्तव ने नामजद आठ आरोपियों में तीन को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। इसमें दो आरोपियों के नाबालिग होने के चलते उनकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई। वहीं दो आरोपियों की मौत हो जाने के चलते उनके विरुद्ध मुकदमे की कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी। जबकि एक आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया। क्रास केस के सातों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया।
सरायलखंसी थाना क्षेत्र के हाजीपुर गांव में 24 नवंबर 2002 को अपराह्न तीन बजे भूमि विवाद को लेकर पंचायत हो रही थी। इसी दौरान मारपीट हो गई। चोट लगने से एक पक्ष के रुपधारी की मौत हो गई। वहीं दोनों पक्षों के कुल दस लोगों को चोटें आई। एक पक्ष से रुपधारी के लड़के प्रेमचंद की तहरीर पर हत्या सहित विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज हुई। इसमें सत्यदेव, वासदेव, रमेश, कमलेश, रविंद्र, लालधर, लक्ष्मण और राजेश को आरोपी बनाया गया। वहीं दूसरे पक्ष के कमलेश पुत्र सत्यदेव की तहरीर पर श्यामदेव, प्रेमचंद, सुबाष, राधेश्याम, रामसेवक, रामानंद और सदानंद को आरोपी बनाया गया। बाद विवेचना पुलिस ने आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी रामहरि चौहान और दयाशंकर राय ने दोनों मामलों में आठ-आठ गवाहाें को पेश कर पक्ष रखा। बचाव पक्ष की ओर से क्रास केस का हवाला देते हुए एक दूसरे को अग्रेसिव बताया गया। दोनों पक्षों के तर्काें को सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद एडीजे ने एक पक्ष के सत्यदेव, वासदेव व रमेश को दोषी पाया। तीनों को आईपीसी की धारा 302, 307, 323 सपठित 149 में क्रमश: आजीवन कारावास की सजा के साथ ही बीस-बीस हजार रुपये अर्थदंड, दस वर्ष के कारावास के साथ ही दस-दस हजार रुपये अर्थदंड और एक वर्ष की सजा के साथ ही पांच हजार रुपये अर्थदंड निर्धारित किया। अर्थदंड न देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस मामले में आरोपी कमलेश और रविंद्र के नाबालिग होने के चलते उनकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई। वही आरोपी लालधर और लक्ष्मण की मौत होने के चलते उनके विरुद्ध मुकदमा अवेट कर दिया गया। आरोपी राजेश को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
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सरायलखंसी थाना क्षेत्र के हाजीपुर गांव में 24 नवंबर 2002 को अपराह्न तीन बजे भूमि विवाद को लेकर पंचायत हो रही थी। इसी दौरान मारपीट हो गई। चोट लगने से एक पक्ष के रुपधारी की मौत हो गई। वहीं दोनों पक्षों के कुल दस लोगों को चोटें आई। एक पक्ष से रुपधारी के लड़के प्रेमचंद की तहरीर पर हत्या सहित विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज हुई। इसमें सत्यदेव, वासदेव, रमेश, कमलेश, रविंद्र, लालधर, लक्ष्मण और राजेश को आरोपी बनाया गया। वहीं दूसरे पक्ष के कमलेश पुत्र सत्यदेव की तहरीर पर श्यामदेव, प्रेमचंद, सुबाष, राधेश्याम, रामसेवक, रामानंद और सदानंद को आरोपी बनाया गया। बाद विवेचना पुलिस ने आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी रामहरि चौहान और दयाशंकर राय ने दोनों मामलों में आठ-आठ गवाहाें को पेश कर पक्ष रखा। बचाव पक्ष की ओर से क्रास केस का हवाला देते हुए एक दूसरे को अग्रेसिव बताया गया। दोनों पक्षों के तर्काें को सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद एडीजे ने एक पक्ष के सत्यदेव, वासदेव व रमेश को दोषी पाया। तीनों को आईपीसी की धारा 302, 307, 323 सपठित 149 में क्रमश: आजीवन कारावास की सजा के साथ ही बीस-बीस हजार रुपये अर्थदंड, दस वर्ष के कारावास के साथ ही दस-दस हजार रुपये अर्थदंड और एक वर्ष की सजा के साथ ही पांच हजार रुपये अर्थदंड निर्धारित किया। अर्थदंड न देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस मामले में आरोपी कमलेश और रविंद्र के नाबालिग होने के चलते उनकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई। वही आरोपी लालधर और लक्ष्मण की मौत होने के चलते उनके विरुद्ध मुकदमा अवेट कर दिया गया। आरोपी राजेश को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
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