{"_id":"56-82832","slug":"Azamgarh-82832-56","type":"story","status":"publish","title_hn":"चादर चढ़ाने को मजार पर उमड़े जायरीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चादर चढ़ाने को मजार पर उमड़े जायरीन
Azamgarh
Updated Fri, 07 Dec 2012 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मालटारी। तहसील सगड़ी के जीयनपुर कस्बे के पूर्वी दक्षिणी भाग में स्थित सूफी संत लद्घाशाह बाबा की मजार पर लगे उर्स में गुरुवार को दूर-दराज इलाकों से आए जायरीनों ने बाबा की मजार पर चादर चढ़ा मन्नतें मांगी। वहीं, मेले में बच्चाें ने झूलों का आनंद लिया और खिलौनों की खरीदारी की। देर शाम आयोजित कव्वाली कार्यक्रम में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से लोगों का मनमोह लिया।
प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी सूफी संत लद्घाशाह की मजार पर के उर्स के पहले दिन बुधवार को लंगर के बाद ईद मिलादुन्ननवी जलसे का आयोजन हुआ। गुरुवार की सुबह मजार सहित आसपास साफ-सफाई की गई। इसके बाद बाबा की मजार पर चादरपोशी को जायरीनों की भीड़ उमड़ना शुरू हो गई। जायरीनों ने बाबा के मजार पर चादर चढ़ाकर मन्नतें मांगी। मान्यता है कि बाबा की मजार पर आने वाले लोगों को सभी बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है। इसके बाद लोगों ने मजार के पास लगे मेले में जहां जरुरत के सामानों की जमकर खरीदारी की। इसके अलावा लोगों ने मेले का प्रसिद्ध हलुआ पराठा का आनंद लिया। मेले में साफ-सफाई और लोगों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए नगर पंचायत अध्यक्ष द्वारा टैंकर आदि की व्यवस्था कराई गई है। रात आठ बजे से उर्स में कव्वाली कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कव्वाल बेचू ने अपनी कव्वाली ‘ऐसा हसीन कोई खुदा कसम नहीं, जैसा मेरा लद्घा है किसी का सनम नहीं’ सुनाया तो लोग झूम उठे। इसी प्रकार जीयनपुर के कौव्वाल जब्बार और मऊ के कौव्वाल जमालु, अशरफजमा ने भी बाबा की शान में कौव्वाली की प्रस्तुतियों से लोगों का खूब मनोरंजन किया। मेले में लोगों की भीड़ के मद्देनजर जीयनपुर पुलिस द्वारा सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे।
विज्ञापन
प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी सूफी संत लद्घाशाह की मजार पर के उर्स के पहले दिन बुधवार को लंगर के बाद ईद मिलादुन्ननवी जलसे का आयोजन हुआ। गुरुवार की सुबह मजार सहित आसपास साफ-सफाई की गई। इसके बाद बाबा की मजार पर चादरपोशी को जायरीनों की भीड़ उमड़ना शुरू हो गई। जायरीनों ने बाबा के मजार पर चादर चढ़ाकर मन्नतें मांगी। मान्यता है कि बाबा की मजार पर आने वाले लोगों को सभी बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है। इसके बाद लोगों ने मजार के पास लगे मेले में जहां जरुरत के सामानों की जमकर खरीदारी की। इसके अलावा लोगों ने मेले का प्रसिद्ध हलुआ पराठा का आनंद लिया। मेले में साफ-सफाई और लोगों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए नगर पंचायत अध्यक्ष द्वारा टैंकर आदि की व्यवस्था कराई गई है। रात आठ बजे से उर्स में कव्वाली कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कव्वाल बेचू ने अपनी कव्वाली ‘ऐसा हसीन कोई खुदा कसम नहीं, जैसा मेरा लद्घा है किसी का सनम नहीं’ सुनाया तो लोग झूम उठे। इसी प्रकार जीयनपुर के कौव्वाल जब्बार और मऊ के कौव्वाल जमालु, अशरफजमा ने भी बाबा की शान में कौव्वाली की प्रस्तुतियों से लोगों का खूब मनोरंजन किया। मेले में लोगों की भीड़ के मद्देनजर जीयनपुर पुलिस द्वारा सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे।
विज्ञापन