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नियम तो बने, फिर भी वसूल की जा रही मनमानी फीस
Updated Tue, 18 Dec 2018 12:54 AM IST
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आजमगढ़। प्राइवेट विद्यालयों में अभिभावकों का शोषण जारी रहे। सरकार ने नियम भले ही बना दिया हो लेकिन इसके बाद भी विद्यालयों द्वारा मनमानी फीस की वसूली की जा रही है। वहीं संबंधित विभाग व जिला प्रशासन ने एक कमेटी का गठन कर अपने जिम्मेदारियों की इतिश्री कर ली है। कमेटी को अभिभावकों से शिकायत मिलने का इंतजार है तो वहीं अभिभावक विद्यालय में बच्चों को परेशान किए जाने के डर से शांत बैठे है।
प्राइवेट विद्यालय संचालकों ने तो शिक्षा को पूरी तरह से व्यवसाय बना लिया है। जिसके चलते ही इन विद्यालयों में अभिभावकों का जम कर शोषण हो रहा है। मनमानी फीस की वसूली की जा रही है तो वहीं शासन के निर्देशों का भी इन पर कोई असर होता नहीं दिख रहा है। शहर से लेकर ग्रामीणांचल तक के किसी भी विद्यालय के फीस शेड्यूल को देख ले तो वार्षिक फीस शासन द्वारा निर्धारित 20 हजार से अधिक है। फिर भी इन विद्यालयों पर कोई कारवाई नहीं हो रही है। शिक्षा विभाग के अधिकारी यह कह कर बच रहे है कि उनके पास कोई शिकायत ही नहीं आई है और अभिभावक इस डर से शिकायत नहीं कर रहे है कि उनके बच्चों को विद्यालय में परेशान न किया जाने लगे। अधिकारियों की हीलाहवाली का फायदा प्राइवेट विद्यालयों द्वारा जम कर उठाया जा रहा है और आज भी मनमानी फीस की वसूली अभिभावकों से की जा रही है। विद्यालय से यूनिफार्म, किताब-कापी और अन्य सामान न बेचे जाने का निर्देश है, लेकिन इस पर भी कोई लगाम नहीं लग सका है। अधिकारियों को स्वयं विद्यालयों के फीस शेड्यूल की जांच करनी चाहिए लेकिन वह अभिभावकों की शिकायत का ही आज तक इंतजार कर रहा है। डीआईओएस डॉ. वीके शर्मा का कहना है कि अब तक एक भी शिकायत नहीं आई है।
आजमगढ़। सरकार द्वारा जारी शासनादेश में 20 हजार से अधिक फीस लेने पर संबंधित विद्यालय के मान्यता प्रत्याहरण तक का प्रावधान है। शासनादेश के तहत पहली शिकायत पर एक लाख, दूसरी पर पांच लाख का जुर्माना और तीसरी शिकायत पर मान्यता समाप्त करने का स्पष्ट निर्देश जिले स्तर पर बनी कमेटी को है।
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आजमगढ़। शासनादेश के अनुरूप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला शुल्क नियामक समिति गठित की गई है। यह समिति ही सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त/संबद्ध स्ववित्तपोषित, नर्सरी, प्राथमिक, जूनियर, हाईस्कूल व इंटरमीडिएट कालेज के शुल्क व्यवस्था पर नजर रखेगी, कहने को तो यह कमेटी जिले में गठित है, लेकिन अब तक इसकी कोई कवायद नजर नहीं आई है।
आजमगढ़। शासनादेश के अनुरुप जिलास्तर पर बनी शुल्क नियामक समिति में डीएम अध्यक्ष व डीआईओएस सचिव है। इसके अलावा एक सीए नोमान अहमद, एक्सईएन पीडब्लूडी, वित्त एवं लेखाधिकारी माध्यमिक, अभिभावक मुन्नी लाल व प्रधानाचार्य एसबी इंटर कालेज बतौर सदस्य शामिल है।
आजमगढ़। प्राइवेट विद्यालयों के मनमानी फीस वसूली के खिलाफ अंदोलन चलाने वाले संगठन उत्तर प्रदेश अभिभावक महासंघ ने गठित कमेटी पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। कमेटी के महासचिव गोविंद दूबे का कहना है कि सदस्यों में शामिल अभिभावक मुन्नी लाल को कोई जानता नहीं है। वहीं सीए के रूप में शामिल नोमान अहमद खुद एक प्राइवेट विद्यालय के प्रबंध तंत्र से जुड़े हुए हैं। ऐसे में कमेटी किसी रुप में पारदर्शी नहीं है। जब तक कमेटी में पारदर्शिता नहीं आएगी तब तक मनमानी फीस वसूली पर लगाम नहीं लग पाएगा।
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प्राइवेट विद्यालय संचालकों ने तो शिक्षा को पूरी तरह से व्यवसाय बना लिया है। जिसके चलते ही इन विद्यालयों में अभिभावकों का जम कर शोषण हो रहा है। मनमानी फीस की वसूली की जा रही है तो वहीं शासन के निर्देशों का भी इन पर कोई असर होता नहीं दिख रहा है। शहर से लेकर ग्रामीणांचल तक के किसी भी विद्यालय के फीस शेड्यूल को देख ले तो वार्षिक फीस शासन द्वारा निर्धारित 20 हजार से अधिक है। फिर भी इन विद्यालयों पर कोई कारवाई नहीं हो रही है। शिक्षा विभाग के अधिकारी यह कह कर बच रहे है कि उनके पास कोई शिकायत ही नहीं आई है और अभिभावक इस डर से शिकायत नहीं कर रहे है कि उनके बच्चों को विद्यालय में परेशान न किया जाने लगे। अधिकारियों की हीलाहवाली का फायदा प्राइवेट विद्यालयों द्वारा जम कर उठाया जा रहा है और आज भी मनमानी फीस की वसूली अभिभावकों से की जा रही है। विद्यालय से यूनिफार्म, किताब-कापी और अन्य सामान न बेचे जाने का निर्देश है, लेकिन इस पर भी कोई लगाम नहीं लग सका है। अधिकारियों को स्वयं विद्यालयों के फीस शेड्यूल की जांच करनी चाहिए लेकिन वह अभिभावकों की शिकायत का ही आज तक इंतजार कर रहा है। डीआईओएस डॉ. वीके शर्मा का कहना है कि अब तक एक भी शिकायत नहीं आई है।
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आजमगढ़। सरकार द्वारा जारी शासनादेश में 20 हजार से अधिक फीस लेने पर संबंधित विद्यालय के मान्यता प्रत्याहरण तक का प्रावधान है। शासनादेश के तहत पहली शिकायत पर एक लाख, दूसरी पर पांच लाख का जुर्माना और तीसरी शिकायत पर मान्यता समाप्त करने का स्पष्ट निर्देश जिले स्तर पर बनी कमेटी को है।
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आजमगढ़। शासनादेश के अनुरूप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला शुल्क नियामक समिति गठित की गई है। यह समिति ही सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त/संबद्ध स्ववित्तपोषित, नर्सरी, प्राथमिक, जूनियर, हाईस्कूल व इंटरमीडिएट कालेज के शुल्क व्यवस्था पर नजर रखेगी, कहने को तो यह कमेटी जिले में गठित है, लेकिन अब तक इसकी कोई कवायद नजर नहीं आई है।
आजमगढ़। शासनादेश के अनुरुप जिलास्तर पर बनी शुल्क नियामक समिति में डीएम अध्यक्ष व डीआईओएस सचिव है। इसके अलावा एक सीए नोमान अहमद, एक्सईएन पीडब्लूडी, वित्त एवं लेखाधिकारी माध्यमिक, अभिभावक मुन्नी लाल व प्रधानाचार्य एसबी इंटर कालेज बतौर सदस्य शामिल है।
आजमगढ़। प्राइवेट विद्यालयों के मनमानी फीस वसूली के खिलाफ अंदोलन चलाने वाले संगठन उत्तर प्रदेश अभिभावक महासंघ ने गठित कमेटी पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। कमेटी के महासचिव गोविंद दूबे का कहना है कि सदस्यों में शामिल अभिभावक मुन्नी लाल को कोई जानता नहीं है। वहीं सीए के रूप में शामिल नोमान अहमद खुद एक प्राइवेट विद्यालय के प्रबंध तंत्र से जुड़े हुए हैं। ऐसे में कमेटी किसी रुप में पारदर्शी नहीं है। जब तक कमेटी में पारदर्शिता नहीं आएगी तब तक मनमानी फीस वसूली पर लगाम नहीं लग पाएगा।