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76 करोड़ मिले, 13 करोड़ वापस करने की तैयारी
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Tue, 28 Mar 2017 12:10 AM IST
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वर्ष 2015 में हुई ओला और अतिवृष्टि से जनपद के किसानों की फसलों को काफी नुकसान हुआ था। आपदा प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने के लिए सरकार ने जब सर्वे कराया तो जनपद में लगभग 362207 किसान इस आपदा से प्रभावित मिले। शासन को रिपोर्ट भेजी गई। जिसके आधार पर शासन ने दो किश्तों में 76 करोड़ 50 लाख 77 हजार रुपये अवमुक्त किए। पहले तो सरकार ने आपदा पीड़ित किसानों को प्रति हेक्टेअर 18000 रुपये की दर से भुगतान करने का निर्देश जारी किया। बाद में यह घटकर दो हजार रुपये प्रति हेक्टेअर हो गया। इसमें 63 करोड़ 81 लाख 77 हजार रुपये का वितरण किसानों में हो गया। आज जिला प्रशासन के पास 12 करोड़ 69 लाख रुपये बच गए। जिला प्रशासन अब इन बचे पैसों को वापस करने की तैयारी में है।
बताते चलें कि विगत कई वर्षों से सूखे की मार झेल रहे किसानों ने वर्ष 2015 में किसी तरह से अपनी फसलों को तैयार किया। फरवरी 2015 को शायद ही कोई किसान भूला होगा। जब मौसम की मार ने उनकी मेहनत की कमाई को तहस-नहस करके रख दिया। सर्वे में जनपद के लगभग 362207 किसान ओला और अतिवृष्टि से प्रभावित मिले। 2015-16 में सरकार ने 58 करोड़ 24 लाख 77 हजार रुपये किसानों में वितरित करने के लिए भेजे। शासन ने 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेअर की दर से किसानों के नुकसान की भरपाई करने का निर्देश जारी किया।
सरकार से मिले पैसे से दो लाख 72 हजार 453 किसानों केे आपदा राहत का चेक मिला। इसके बाद भी जनपद में लगभग 89 हजार 754 किसान आपदा चेक पाने से वंचित रह गए। जिला प्रशासन ने शासन से और धन की मांग की। इस पर शासन ने 2016-17 में 18 करोड़ 26 लाख रुपये की दूसरी किश्त भेजी। इसके साथ ही शासन ने आपदा पीड़ित किसानों में दो हजार रुपये प्रति हेक्टेअर की दर से भुगतान करने का निर्देश दिया। जिसके तहत जिला प्रशासन ने पांच लाख 57 हजार रुपये वितरित कर दिए। इस प्रकार शासन ने सारे किसानों में आपदा राहत के चेकों का वितरण कर दिया लेकिन शासन के निर्देश पर कम हुई वितरण दर के कारण जिला प्रशासन के पास 12 करोड़ 69 लाख रुपये बच गए। जिसे जिला प्रशासन अब शासन को वापस करने की तैयारी में जुटा हुआ है।
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पहले किसानों में 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेअर की दर से भुगतान करने का शासन का निर्देश था। धन कम होने पर हमने शासन से और धन की मांग की लेकिन बाद में जब दूसरी किश्त आई तो उसके बाद शासन का निर्देश आया कि अब किसानों में दो हजार रुपये प्रति हेक्टेअर की दर से आपदा राशि का वितरण होगा। यह पैसा बचा। जनपद के सभी आपदा प्रभावित किसानों में सहायता राशि का वितरण किया जा चुका है। - सुहास एलवाई जिलाधिकारी
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बताते चलें कि विगत कई वर्षों से सूखे की मार झेल रहे किसानों ने वर्ष 2015 में किसी तरह से अपनी फसलों को तैयार किया। फरवरी 2015 को शायद ही कोई किसान भूला होगा। जब मौसम की मार ने उनकी मेहनत की कमाई को तहस-नहस करके रख दिया। सर्वे में जनपद के लगभग 362207 किसान ओला और अतिवृष्टि से प्रभावित मिले। 2015-16 में सरकार ने 58 करोड़ 24 लाख 77 हजार रुपये किसानों में वितरित करने के लिए भेजे। शासन ने 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेअर की दर से किसानों के नुकसान की भरपाई करने का निर्देश जारी किया।
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सरकार से मिले पैसे से दो लाख 72 हजार 453 किसानों केे आपदा राहत का चेक मिला। इसके बाद भी जनपद में लगभग 89 हजार 754 किसान आपदा चेक पाने से वंचित रह गए। जिला प्रशासन ने शासन से और धन की मांग की। इस पर शासन ने 2016-17 में 18 करोड़ 26 लाख रुपये की दूसरी किश्त भेजी। इसके साथ ही शासन ने आपदा पीड़ित किसानों में दो हजार रुपये प्रति हेक्टेअर की दर से भुगतान करने का निर्देश दिया। जिसके तहत जिला प्रशासन ने पांच लाख 57 हजार रुपये वितरित कर दिए। इस प्रकार शासन ने सारे किसानों में आपदा राहत के चेकों का वितरण कर दिया लेकिन शासन के निर्देश पर कम हुई वितरण दर के कारण जिला प्रशासन के पास 12 करोड़ 69 लाख रुपये बच गए। जिसे जिला प्रशासन अब शासन को वापस करने की तैयारी में जुटा हुआ है।
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पहले किसानों में 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेअर की दर से भुगतान करने का शासन का निर्देश था। धन कम होने पर हमने शासन से और धन की मांग की लेकिन बाद में जब दूसरी किश्त आई तो उसके बाद शासन का निर्देश आया कि अब किसानों में दो हजार रुपये प्रति हेक्टेअर की दर से आपदा राशि का वितरण होगा। यह पैसा बचा। जनपद के सभी आपदा प्रभावित किसानों में सहायता राशि का वितरण किया जा चुका है। - सुहास एलवाई जिलाधिकारी