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कर्मचारियों के भुगतान का ब्यौरा मांगा तो करा दी हड़ताल
Updated Fri, 22 Sep 2017 11:43 PM IST
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आजमगढ़। विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता द्वारा आउट सोर्सिंग ठेकेदार से कर्मचारियों का ब्यौरा मांगने के विरोध में गुरुवार को आउट सोर्सिंग के जरिए कार्य करने वाले सभी कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। बाद में उनको समझा बुझाकर काम पर वापस लाया गया। हड़ताल से नगर के कई क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बाधित रही।
विद्युत विभाग में लाइनमैनों आदि की भर्ती आउटसोर्सिंग से की गई है। इसके लिए ठेकेदार के माध्यम से कर्मचारी लगाए गए। सरकार की ओर से इन कर्मचारियों का भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से करने के निर्देश हैं। साथ ही ये देखने को भी कहा गया है कि कर्मचारियों का पीएफ कट रहा है कि नहीं और बीमा है कि नहीं। ठेकेदार की ओर से बिल बनाकर देने के बाद विभाग की ओर से भुगतान किया जाता है। इस व्यवस्था के तहत जनपद के विद्युत उपखंड प्रथम के बिजलीघरों पर लगभग 120 कर्मचारी तैनात किए गए है। एक बिजलीघर पर तीन कर्मचारियों का ग्रुप होता है, इसमें एक कुशल और दो अकुशल लाइनमैन होते हैं। सरकार की ओर से इनमें से कुशल लाइनमैनों को 10000 और अकुशल लाइनमैनों को आठ हजार रुपये प्रतिमाह भुगतान ठेकेदार को किया जाता है।
उपखंड प्रथम के अधिशासी अभियंता आरपी गुप्ता को शिकायत मिली थी कि ठेकेदारों की ओर से विभाग से निर्धारित दर के हिसाब से कर्मचारियों का भुगतान लिया जाता है, लेकिन कर्मचारियों केे दो से तीन हजार रुपये ही दिए जाते हैं। न उनका पीएफ काटा जाता है और न ही बीमा कराया जाता है। इस पर उन्होंने ठेकेदार से भुगतान के लिए सभी कर्मचारियों का ब्यौरा मांगा। उनकी ईपीएफ कटौती के साथ ही बीमा के अभिलेख दिखाने को कहा। ठेकेदार ने अभिलेख दिखाया नहीं और भुगतान रुक गया। इसका परिणाम हुआ कि गुरुवार को ठेकेदार के इशारे पर कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। मातनपुर फीडर में हुई गड़बड़ी के कारण पूरे दिन लोग बिजली के लिए तरसते रहे। बाद में किसी तरह से उन्हें समझा बुझाकर काम पर वापस लाया गया तब जाकर मातनपुर फीडर से विद्युत आपूर्ति बहाल हो सकी।
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हम तो सरकार से मिले निर्देशों का पालन कर रहे हैं। हम ठेकेदार का भुगतान करने को भी तैयार हैं, लेकिन ठेकेदार ने हमें अपने कर्मचारियों से संबंधित अभिलेख दिखाए ही नहीं। इतना ही नहीं उसने कर्मचारियों को भड़काकर कार्य बंद कर दिया। आरपी गुप्ता, अधिशासी अभियंता उपखंड प्रथम
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विद्युत विभाग में लाइनमैनों आदि की भर्ती आउटसोर्सिंग से की गई है। इसके लिए ठेकेदार के माध्यम से कर्मचारी लगाए गए। सरकार की ओर से इन कर्मचारियों का भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से करने के निर्देश हैं। साथ ही ये देखने को भी कहा गया है कि कर्मचारियों का पीएफ कट रहा है कि नहीं और बीमा है कि नहीं। ठेकेदार की ओर से बिल बनाकर देने के बाद विभाग की ओर से भुगतान किया जाता है। इस व्यवस्था के तहत जनपद के विद्युत उपखंड प्रथम के बिजलीघरों पर लगभग 120 कर्मचारी तैनात किए गए है। एक बिजलीघर पर तीन कर्मचारियों का ग्रुप होता है, इसमें एक कुशल और दो अकुशल लाइनमैन होते हैं। सरकार की ओर से इनमें से कुशल लाइनमैनों को 10000 और अकुशल लाइनमैनों को आठ हजार रुपये प्रतिमाह भुगतान ठेकेदार को किया जाता है।
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उपखंड प्रथम के अधिशासी अभियंता आरपी गुप्ता को शिकायत मिली थी कि ठेकेदारों की ओर से विभाग से निर्धारित दर के हिसाब से कर्मचारियों का भुगतान लिया जाता है, लेकिन कर्मचारियों केे दो से तीन हजार रुपये ही दिए जाते हैं। न उनका पीएफ काटा जाता है और न ही बीमा कराया जाता है। इस पर उन्होंने ठेकेदार से भुगतान के लिए सभी कर्मचारियों का ब्यौरा मांगा। उनकी ईपीएफ कटौती के साथ ही बीमा के अभिलेख दिखाने को कहा। ठेकेदार ने अभिलेख दिखाया नहीं और भुगतान रुक गया। इसका परिणाम हुआ कि गुरुवार को ठेकेदार के इशारे पर कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। मातनपुर फीडर में हुई गड़बड़ी के कारण पूरे दिन लोग बिजली के लिए तरसते रहे। बाद में किसी तरह से उन्हें समझा बुझाकर काम पर वापस लाया गया तब जाकर मातनपुर फीडर से विद्युत आपूर्ति बहाल हो सकी।
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हम तो सरकार से मिले निर्देशों का पालन कर रहे हैं। हम ठेकेदार का भुगतान करने को भी तैयार हैं, लेकिन ठेकेदार ने हमें अपने कर्मचारियों से संबंधित अभिलेख दिखाए ही नहीं। इतना ही नहीं उसने कर्मचारियों को भड़काकर कार्य बंद कर दिया। आरपी गुप्ता, अधिशासी अभियंता उपखंड प्रथम