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रुक्मिणी विवाह और सुदामा चरित्र का वर्णनसुन झूमे

Mon, 18 Feb 2019 11:22 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 18 Feb 2019 11:22 PM IST
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रुक्मिणी विवाह और सुदामा चरित्र का वर्णनसुन झूमे
आजमगढ़। कंधरापुर क्षेत्र के मिरियां गांव में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ का समापन पूर्णाहुति के साथ हुआ। सोमवार को भंडारे में हजारों भक्तों ने भगवान का प्रसाद ग्रहण किया। समूचा क्षेत्र जयकारों से गुंजायमान रहा। काशी से आए कथावाचक श्रीकांत महराज ने रुक्मिणी विवाह और सुदामा के चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि रूक्म देश की राजकुमारी रूक्मिणी का विवाह शिशुपाल नामक क्रूर राजा के साथ हुआ था। वह भगवान श्रीकृष्ण को चाहती थीं। रुक्मिणी के आमंत्रण पर ही श्रीकृष्ण ने शिशुपाल और रुक्म के 10 हजार राक्षसों को परास्त करके रुक्मिणी के साथ विवाह किया था। श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं। अगर रुक्मिणी हाथ नहीं रोकती तो श्रीकृष्ण सुदामा को तीनों लोक दे देते। प्रभु अपने भक्तों के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने के लिए तत्पर रहते हैं। उन्होंने संगीतमय प्रवचन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सच्चिदानंद राय ने भागवत आरती की। पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले में शहीद जवानों को श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया गया। रमाकांत राय, कमलाकांत राय, आनन्द राय, अजय राय, संजय राय आदि उपस्थित रहे।
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