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सड़क की जिंदगी, जाम और घ्वनि प्रदूषण का मुद्दा छाया

Thu, 13 Dec 2018 11:31 PM IST
Updated Thu, 13 Dec 2018 11:31 PM IST
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सड़क की जिंदगी, जाम और घ्वनि प्रदूषण का मुद्दा छाया
आजमगढ़। नेशनल बुक ट्रस्ट मानव संसाधन विकास मंत्रालय की पहल पर शिब्ली नेशनल इंटर कालेज परिसर में 19वां आजमगढ़ पुस्तक मेला गुरुवार को भी जारी रहा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहयोग से आयोजित विमर्श में पर्यावरण प्रदूषण, सड़क की जिंदगी, जाम और घ्वनि प्रदूषण का मुद्दा छाया रहा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी घनश्याम ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण में साहित्य की भूमिका विद्यार्थियों को शिक्षित करेगी और उनको पर्यावरण प्रहरी बनाएगी। उन्होंने कहा कि तमसा सफाई अभियान ने आजमगढ़ के सभी वर्गों को पर्यावरण संरक्षण का सहयात्री बना दिया है। प्रसिद्ध कथाकार मारकंडे द्वारा लिखी गई ‘दौने की पत्तियां’ पर्यावरण संरक्षण की कहानी है। यह कहानी वनस्पति जगत के औषधिय महत्व को रेखांकित ही नहीं करती, बल्कि विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण का संस्कार रोपित करती है। साहित्याकार मारकंडे की पुत्री एवं प्रसिद्ध चिकित्सक डा. स्वास्ति सिंह ने कहा कि आजमगढ़ की प्राकृतिक संरचना पूर्वांचल की धरोहर की तरह है। हमारे पिता ने पूर्वांचल के प्राकृतिक व सामाजिक संरचना को अपने सृजन का आधार बनाया। अध्यक्षता करते हुए रक्षा एवं सैन्य विभाग के अध्यक्ष ने कहा कि अब हमारे देश को सीमाओं से ज्यादा सड़क दुर्घटना और बीमारियों से खतरा है। सड़क हादसे रुक जाएं तो भारत में सकल घरेलू उत्पाद में दो प्रतिशत की वृद्धि हो जाएगी। डा. प्रज्ञा सिंह ने कहा कि साहित्य की रचनाधर्मिता का विषय जलवायु परिवर्तन होना चाहिए। डा. विनय सिंह ने कहा कि बदलते समय में बीमारियों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। हवा और पानी की गुणवत्ता गिरती जा रही है। बनवारी लाल जालान ने कहा कि मीडिया को भी पर्यावरण संरक्षण में ऐतिहासिक भूमिका निभानी होगी। संस्कृतिकर्मी एवं मेले के संयोजक राजीव रंजन ने कहा कि भारत में प्रतिवर्ष डेढ लाख लोगों की मृत्यु सड़क हादसे में होती है। तीन लाख लोग अपंग हो जाते हैं। कार्यशाला में अभिषेक यादव और सत्यम राजभर ने कहानी के शिल्प पर जीवंत हिस्सेदारी की। प्रधानाचार्य नसीम अहमद, अबुल आश अहमद, शहनवाज अहमद, जयप्रकाश राय, विजय बहादुर राय, घनश्याम पटेल, नदीम अहमद, इमरान खान और अखरोज आलम उपस्थित थे। डायट प्राचार्य अमरनाथ राय ने जिले के सभी बीटीसी प्रशिक्षणार्थियों से अपील की कि वे शुक्रवार को आयोजित कार्यशाला में विशेष रूप से हिस्सेदारी करें।
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केदार नाथ सिंह की स्मृति को समर्पित होगा आज का दिन
आजमगढ़। शिब्ली डिग्री कालेज के प्राचार्य डा. ग्यास असद खां ने कहा कि शुक्रवार का दिन केदारनाथ सिंह की रचनात्मकता और उनकी स्मृति को समर्पित होगा। मुख्य वक्ता डा. केदारनाथ सिंह की पुत्री डा. संन्ध्या सिंह और चन्द्रभूषण शिरकत करेंगे। गुरुवार को एनजीटी की टीम ने भी मेले का भ्रमण किया।
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