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बिल वाउचर चार साल का, दो साल का ही कैसे हुआ फर्जी

Fri, 23 Mar 2018 11:24 PM IST
Updated Fri, 23 Mar 2018 11:24 PM IST
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बिल वाउचर चार साल का, दो साल का ही कैसे हुआ फर्जी
आजमगढ़। किसी भी अधिकारी से बिल वाउचर पर हस्ताक्षर संबंधित पटल के सहायक बाबू करवाते हैं। इसके बाद भी संबंधित बाबू के बजाय प्रधानाचार्य पर एफआईआर के फरमान पर सवाल उठ रहे हैं। जीजीआईसी की प्रभारी प्रधानाचार्य का कहना है कि चार साल के बिल वाउचर में दो साल का ही फर्जी होना, मामले के संदिग्ध होने की ओर इशारा कर रहा है।
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संयुक्त शिक्षा निदेशक माध्यमिक अनारपति वर्मा ने गुरुवार को राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की प्रभारी प्रधानाचार्या अनवर जहां के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का डीआईओएस को निर्देश दिया था। उन्होंने प्रधानाचार्य पर वित्तीय अनियमितिता और मूल्यांकन के बिल वाउचर पर पूर्व डीआईओएस के फर्जी हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाया है। अभी डीआईओएस की तरफ से जेडी के आदेश के तहत कोई कार्रवाई तो नहीं की गई, लेकिन इस मामले को लेकर चर्चा जोरों पर है। जीजीआईसी प्रधानाचार्या ने बताया कि चार साल का भुगतान रुका हुआ था। इसका बिल वाउचर विद्यालय के बाबुओं ने बनाया और उसे तत्कालीन डीआईओएस कार्यालय पर संबंधित बाबू को हस्ताक्षर के लिए भेज दिया। ऐसे में वह कहां से फर्जी हस्ताक्षर करने की जिम्मेदार हैं। हस्ताक्षर के बाद बिल डीआईओएस कार्यालय से सीधे बोर्ड को भेज दिया गया।
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डीआईओएस के पास हस्ताक्षर के लिए बिल मैं लेकर नहीं गई थी। बिल डीआईओएस कार्यालय पर संबंधित बाबू को भेज दिया गया था। बाबू ने अधिकारी से हस्ताक्षर करवाया होगा और फिर डीआईओएस कार्यालय से ही बिल वाउचर बोर्ड को भेजवा गया होगा। किन परिस्थितियों में फर्जी हस्ताक्षर हुए यह तो संबंधित बाबू ही बता सकता है। इसमें मेरी भूमिका समझ से परे है।
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अनवर जहां, प्रभारी प्रधानाचार्य, जीजीआईसी, आजमगढ़।
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प्रभारी प्रधानाचार्य जीजीआईसी पर वित्तीय अनियमित्ता का आरोप है। हाईकोर्ट के आदेेेश पर मै इसकी जांच कर रही हूं। जांच में ही इनके द्वारा मूल्यांकन से संबंधित बिल वाउचर में डीआईओएस के फर्जी हस्तारक्षर की बात सामने आयी। इतना ही नहीं इन्होंने ट्रको के भुगतान की जो पर्ची लगाई है उस पर न तो टिन नंबर अंकित है न ही डेट ही पड़ा है। इस प्रकरण से प्रधानाचार्या के सेवा विस्तार का मामला अटक रहा है। जिसके चलते ही यह मेरे उपर पैसा मांगने का आरोप लगा रही है।
-एपी वर्मा, संयुक्त शिक्षा निदेशक माध्यमिक, आजमगढ़।



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चार सप्ताह में सेवा विस्तार की पत्रावली गई है मांगी
आजमगढ़। राजकीय बालिका इंटर कालेज की प्रभारी प्रधानाचार्या और राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त अनवर जहां 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो रही हैं। उन्होंने सेवा विस्तार के लिए पत्रावली भेज रखी है जो अभी जेडी कार्यालय पर अटकी हुई है। इस बीच उन्होंने हाईकोर्ट की भी शरण ली, जहां से गुरुवार उनके पक्ष में आदेश भी हो गया है।
जीजीआईसी प्रधानाचार्य का कहना है कि राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षिकाओं को पांच साल का सेवा विस्तार मिलता है। इसके लिए उन्होंने पहले तो सीधे निदेशालय पर आवेदन भेज दिया। जहां से निर्देश हुआ कि आवेदन डीआईओएस के माध्यम से भेजा जाए। इस पर उन्होंने डीआईओएस को आवेदन की पत्रावली दी। यहां से आवेदन जेडी के पास पहुंचा और दबा कर रख लिया गया। जेडी से कई बार पत्रावली निदेशालय भेजने के लिए अनुरोध किया गया, लेकिन आरोप है कि उन्होंने पत्रावली भेजने के लिए पांच लाख रुपये की डिमांड कर दी। जिसके चलते उन्होंने सेवा विस्तार के लिए हाईकोर्ट की शरण ले ली। गुरुवार को हाईकोर्ट ने निर्देश जारी कर दिया। निर्देश में कोर्ट ने कहा है कि 31 मार्च को प्रभारी प्रधानाचार्य राजकीय बालिका इंटर कालेज अनवर जहां की सेवानिवृत्ति के बाद भी सेवा बाधित न की जाए और चार सप्ताह के अंदर पत्रावली उपलब्ध कराते हुए सेवा विस्तार की प्रक्रिया पूर्ण करा दी जाए।

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नियुक्तियों को लेकर ठनी है दोनों कार्यालयों में
आजमगढ़। संयुक्त शिक्षा निदेशक माध्यमिक और जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के बीच असली विवाद का कारण दो इंटर कॉलेजों के प्राइमरी अनुभान में नियुक्ति का मामला है। दोनों विद्यालयों में हुई नियुक्तियों का जहां जेडी ने अनुमोदन कर दिया है तो वहीं डीआईओएस कार्यालय की तरफ से पूर्व में दिए गए अनुमोदन को धांधली की शिकायत पर वापस ले लिया गया। शिकायत के बाद पूर्व जिलाधिकारी ने चार सदस्यी टीम गठित कर जांच का निर्देश जारी कर टीम गठित कर दी है। डीएम के निर्देश के बाद ही दोनों कार्यालयों के बीच ठन गई है।

डीएवी इंटर कॉलेज और मारूति इंटर कॉलेज के प्राइमरी अनुभान में दिसंबर 2017 में पांच सहायक अध्यापकों की नियुक्ति का अनुमोदन संयुक्त शिक्षा निदेशक और डीआईओएस कार्यालय की तरफ से किया गया। इस बीच नियुक्ति में फर्जीवाड़े की शिकायत सामने आ गई। जिस पर डीआईओएस ने अपना अनुमोदन वापस ले लिया। जबकि जेडी का अनुमोदन अब भी बरकरार है। इसकी शिकायत तत्कालीन जिलाधिकारी सीबी सिंह के पास पहुंची तो उन्होंने चार सदस्यी टीम गठित कर प्रकरण की जांच का निर्देश दे दिया। इसी के बाद शिक्षा विभाग के जिलास्तरीय और मंडलीय अधिकारियेां के बीच टसन की शुरूआत हो गई। जेडी ने जीजीआईसी छात्रावास को खाली कराने का फरमान डीआईओएस को सुना दिया। इतना ही नहीं जेडी आवास और छात्रावास पर अवैध कब्जे के मामले में बयान देने पर जीजीआईसी प्रधानाचार्य और डीआईओएस से स्पष्टीकरण भी मांग लिया गया। जीजीआईसी प्रधानाचार्य पर एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश भी इसी टशन की एक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
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