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सवर्ण आरक्षण हुआ लागू लेकिन नहीं हो रहा पालन
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आजमगढ़। केंद्र सरकार ने आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा कर दी। राष्ट्रपति ने भी इसकी मंजूरी दे दी। लेकिन विश्वविद्यालयों द्वारा इसका पालन नहीं किया जा रहा है। इस पर शिब्ली वेलफेयर सोसाइटी की चेयरमैन सबीह आलम नोमानी ने मंगलवार को सचिव/मानव संसाधन मंत्रालय और सामाजिक न्याय मंत्रालय को पत्र भेजकर इसे आवेदन फार्मों पर उल्लेखित करने की मांग की है।
भेजे गए पत्र में उन्होंने कहा है कि सरकार द्वारा अगड़ी जाति के गरीबों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था शिक्षण संस्थाओं में प्रविधान की गई है। जिसको अभी तक सत्र 2019-20 में लागू नहीं किया है। अनेक संस्थानों/विश्वविद्यालयों में यूजी/पीजी आगामी सत्र के लिए आवेदन शुरू हो चुके हैँ। लेकिन आवेदनों में इस वर्ग के लिए कोई व्यवस्था प्राविधानित नहीं है। इन शिक्षण संस्थानों में फरवरी के अंतिम सप्ताह से लेकर मार्च के प्रथम सप्ताह तक आवेदन करने की अंतिम तिथियां है। ऐसा न होने से सामान्य जाति के छात्रों में मायूसी है। वह अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि समय शिक्षण संस्थाओं को 10 प्रतिशत आरक्षण के क्रियांवयन के लिए तत्काल निर्देश निर्गत करते हुए आवेदन समयावधि बढ़ाने और आवेदन फार्मों में इस कालम का उल्लेख करने का निर्देश देने के साथ इसके लिए पात्रता संबंधित अभिलेख का प्राविधान संबंधी निर्देश शीघ्र निर्गत करने का करें। ताकि सवर्ण गरीब छात्रों में व्याप्त निराशा समाप्त हो सके। सबीह आलम अंसारी ने कहा कि सरकार ने इसे लागू तो कर दिया लेकिन अभी तक विश्वविद्यालयों द्वारा इसे लागू नहीं किया गया। अगर लागू किया गया है तो इसका अलग से आवेदन फार्म में कालम होना चाहिए। अगर सरकार ने जल्द इस पर निर्णय नहीं लिया तो हम हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल करेंगे।
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भेजे गए पत्र में उन्होंने कहा है कि सरकार द्वारा अगड़ी जाति के गरीबों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था शिक्षण संस्थाओं में प्रविधान की गई है। जिसको अभी तक सत्र 2019-20 में लागू नहीं किया है। अनेक संस्थानों/विश्वविद्यालयों में यूजी/पीजी आगामी सत्र के लिए आवेदन शुरू हो चुके हैँ। लेकिन आवेदनों में इस वर्ग के लिए कोई व्यवस्था प्राविधानित नहीं है। इन शिक्षण संस्थानों में फरवरी के अंतिम सप्ताह से लेकर मार्च के प्रथम सप्ताह तक आवेदन करने की अंतिम तिथियां है। ऐसा न होने से सामान्य जाति के छात्रों में मायूसी है। वह अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि समय शिक्षण संस्थाओं को 10 प्रतिशत आरक्षण के क्रियांवयन के लिए तत्काल निर्देश निर्गत करते हुए आवेदन समयावधि बढ़ाने और आवेदन फार्मों में इस कालम का उल्लेख करने का निर्देश देने के साथ इसके लिए पात्रता संबंधित अभिलेख का प्राविधान संबंधी निर्देश शीघ्र निर्गत करने का करें। ताकि सवर्ण गरीब छात्रों में व्याप्त निराशा समाप्त हो सके। सबीह आलम अंसारी ने कहा कि सरकार ने इसे लागू तो कर दिया लेकिन अभी तक विश्वविद्यालयों द्वारा इसे लागू नहीं किया गया। अगर लागू किया गया है तो इसका अलग से आवेदन फार्म में कालम होना चाहिए। अगर सरकार ने जल्द इस पर निर्णय नहीं लिया तो हम हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल करेंगे।
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