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‘खेल ना’ के मंचन ने दर्शकों को झकझोरा
Updated Wed, 24 Jan 2018 12:00 AM IST
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राहुल प्रेक्षागृह में समूहन कला संस्थान की ओर से चल रहे ग्राम्यमान नाट्य समारोह के तीसरे दिन मंगलवार को मंच पर शिशु नाट्य विद्यालय गुवाहाटी की प्रस्तुति ‘खेल ना’ का मंचन हुआ। जिसने दर्शकों को झकझोर दिया। इसके पहले देशभक्ति गीत प्रस्तुत कर साधना सोनकर ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
नाटक ‘खेल ना’ बच्चों के परिवेश की कहानी थी। एक खिलौने की दुकान जिसका दरवाजा विगत दस वर्षों से नहीं खुला था। दुकान के अंदर बंद चार खिलौने उदास थे। मिलना चाहते थे उन बच्चों से, जो उनके साथ खेल सकें। चारों दुकान से बाहर निकलकर बच्चों से मुलाकात करते हैं। किन बच्चों के साथ खिलौना रहना चाहता है। यही इस कहानी का विषय था। कुत्ते की भूमिका जुईन अहमद, तोता की सृष्टि शर्मा, गुड़िया की अनन्दिता गोगोई और रेल की भूमिका अपूर्वा शर्मा ने निभाई। श्योमोलिमा दास, अंकिता शर्मा बरदोलोई, निशांकिता शर्मा, कुकिल दास, जुबिन दास, जॉन कलिता, धीरज दास ने भी सराहनीय अभिनय किया। संगीत दिगंत शर्मा ने दिया और संचालन सौरव वैश्य ने किया। मंच प्रबंधन प्रदीप रॉय, कॉस्ट्यूम रूनुमी देवी ने किया। गुआहाटी शिशु नाट्य विद्यालय की इस प्रस्तुति का प्रकाश परिकल्पना, नाट्य आलेख एवं निर्देशन मानिक रॉय ने किया। इसके बाद दिवंगत साहित्यकार कवि रामप्रकाश शुक्ल निर्मोही को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। समारोह का शुभारंभ आरटीओ दरोगा सिंह और निदेशक श्रम एवं रोजगार संजय सिंह ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया।
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कला, संस्कृति समाज का अभिन्न अंग: प्रो. प्रभाकर
आजमगढ़। समूहन कला संस्थान की ओर से आयोजित कला-संस्कृति और मीडिया का अन्तर्संबंध पर आयोजित संगोष्ठी में बीएचयू के हिंदी विभाग के प्रो. प्रभाकर सिंह ने कहा कि कला-संस्कृति और मीडिया समाज का अभिन्न अंग है। प्रो. नीरज खरे ने कहा कि संस्कृति का अभिन्न अंग साहित्य जो भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ा रहा है, उसका योगदान समाज में अत्यधिक है। डॉ. गीता सिंह एसोसिएट प्रोफेसर डीएवी कालेज ने कहा कि पत्रकारिता में कोलकाता से निकलने वाला साप्ताहिक पत्र उदन्त मार्तण्ड का योगदान मील का पत्थर है। डॉ. रामअवध सिंह यादव प्राचार्य श्री गॉधी पीजी कालेज मालटारी ने कहा कि कला-संस्कृति समाज का प्रतिबिंब है। डॉ. कन्हैया सिंह ने कहा कि कला संस्कृति और मीडिया को हमेशा समाज सापेक्ष रहकर अपनी अभिव्यक्ति करनी चाहिए। संचालक डॉ. अखिलेश चन्द्र ने कहा कि साहित्य को समाजोन्मुखी रूप में लिखकर साहित्यकारों ने अपने हिस्से का कार्य लगातार जारी रखा है। अशोक कुमार अग्रवाल, अलका सिंह, पुष्पा श्रीवास्तव, प्रवीन कुमार सिंह को सम्मानित किया गया। दिनेश सैनी, संजीव पाण्डेय, डॉ दीपक साहा और निदेशक राजकुमार शाह ने सभी का सम्मान किया। निधि सिंह ने सभी आगत अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. इन्दू श्रीवास्तव, जनमेजय पाठक, संजीव पाण्डेय, अमित कुमार दूबे, चन्दन मौर्य, आदि उपस्थित थे।
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नाटक ‘खेल ना’ बच्चों के परिवेश की कहानी थी। एक खिलौने की दुकान जिसका दरवाजा विगत दस वर्षों से नहीं खुला था। दुकान के अंदर बंद चार खिलौने उदास थे। मिलना चाहते थे उन बच्चों से, जो उनके साथ खेल सकें। चारों दुकान से बाहर निकलकर बच्चों से मुलाकात करते हैं। किन बच्चों के साथ खिलौना रहना चाहता है। यही इस कहानी का विषय था। कुत्ते की भूमिका जुईन अहमद, तोता की सृष्टि शर्मा, गुड़िया की अनन्दिता गोगोई और रेल की भूमिका अपूर्वा शर्मा ने निभाई। श्योमोलिमा दास, अंकिता शर्मा बरदोलोई, निशांकिता शर्मा, कुकिल दास, जुबिन दास, जॉन कलिता, धीरज दास ने भी सराहनीय अभिनय किया। संगीत दिगंत शर्मा ने दिया और संचालन सौरव वैश्य ने किया। मंच प्रबंधन प्रदीप रॉय, कॉस्ट्यूम रूनुमी देवी ने किया। गुआहाटी शिशु नाट्य विद्यालय की इस प्रस्तुति का प्रकाश परिकल्पना, नाट्य आलेख एवं निर्देशन मानिक रॉय ने किया। इसके बाद दिवंगत साहित्यकार कवि रामप्रकाश शुक्ल निर्मोही को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। समारोह का शुभारंभ आरटीओ दरोगा सिंह और निदेशक श्रम एवं रोजगार संजय सिंह ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया।
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कला, संस्कृति समाज का अभिन्न अंग: प्रो. प्रभाकर
आजमगढ़। समूहन कला संस्थान की ओर से आयोजित कला-संस्कृति और मीडिया का अन्तर्संबंध पर आयोजित संगोष्ठी में बीएचयू के हिंदी विभाग के प्रो. प्रभाकर सिंह ने कहा कि कला-संस्कृति और मीडिया समाज का अभिन्न अंग है। प्रो. नीरज खरे ने कहा कि संस्कृति का अभिन्न अंग साहित्य जो भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ा रहा है, उसका योगदान समाज में अत्यधिक है। डॉ. गीता सिंह एसोसिएट प्रोफेसर डीएवी कालेज ने कहा कि पत्रकारिता में कोलकाता से निकलने वाला साप्ताहिक पत्र उदन्त मार्तण्ड का योगदान मील का पत्थर है। डॉ. रामअवध सिंह यादव प्राचार्य श्री गॉधी पीजी कालेज मालटारी ने कहा कि कला-संस्कृति समाज का प्रतिबिंब है। डॉ. कन्हैया सिंह ने कहा कि कला संस्कृति और मीडिया को हमेशा समाज सापेक्ष रहकर अपनी अभिव्यक्ति करनी चाहिए। संचालक डॉ. अखिलेश चन्द्र ने कहा कि साहित्य को समाजोन्मुखी रूप में लिखकर साहित्यकारों ने अपने हिस्से का कार्य लगातार जारी रखा है। अशोक कुमार अग्रवाल, अलका सिंह, पुष्पा श्रीवास्तव, प्रवीन कुमार सिंह को सम्मानित किया गया। दिनेश सैनी, संजीव पाण्डेय, डॉ दीपक साहा और निदेशक राजकुमार शाह ने सभी का सम्मान किया। निधि सिंह ने सभी आगत अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. इन्दू श्रीवास्तव, जनमेजय पाठक, संजीव पाण्डेय, अमित कुमार दूबे, चन्दन मौर्य, आदि उपस्थित थे।
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