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पेंशन में गड़बड़ी के लिए निदेशालय-प्रशासन दोषी, विभाग पाक-साफ
Updated Sat, 20 Jan 2018 11:49 PM IST
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आजमगढ़। समाज कल्याण विभाग के खेल भी निराले हैं। पिछले दिनों कमिश्नर से हुई समाजवादी पेंशन में गड़बड़ी की एक शिकायत के मामले में विभाग ने अपने आप को एक दम पाक-साफ बताते हुए गड़बड़ी के लिए निदेशालय, सीडीओ, बीडीओ और प्रधान को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है। लगभग दो हजार लोगों की पेंशन की शिकायत की गई थी, लेकिन मात्र नौ लाभार्थियों से रिकवरी दिखा शिकायत निस्तारित कर दी गई है। वहीं, खुद को बचाने के लिए पर्दे के पीछे सैकड़ों लाभार्थियों से रिकवरी के लिए लेटर जारी किया जा रहा है।
26 अक्तूबर को भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन के सदस्य अरुण कुमार सिंह ने कमिश्नर से शिकायत की थी कि वर्ष 2014-15 से 2016-17 तक समाज कल्याण अधिकारी राजीव रत्न सिंह की मिलीभगत से लगभग दो हजार ऐसे लोगों को समाजवादी पेंशन दी जा रही है जो गड़बड़ हैं। एक खाते में कई लोगों की पेंशन जारी का जा रही थी और कहीं एक लाभार्थी की पेंशन कई खातों में जा रही थी। कई स्थानों पर पति-पत्नि दोनों को एक ही योजना से लाभान्वित किया जा रहा था। शिकायत के साथ ऐसे 35 खातों की सूची दी गई थी। इसके बाद कमिश्नर के निर्देश पर 10 दिन बाद ही शिकायतकर्ता ने ऐसे एक हजार खातों की सूची भी कमिश्नर को जांच के क्रम में उपलब्ध करा दी थी। कमिश्नर के रविंद्र नायक ने मामले की जांच उप निदेशक समाज कल्याण जितेंद्र सिंह को सौंपी थी। उप निदेशक ने मामले की जांच के बाद रिपोर्ट कमिश्नर को सौंप दी है।
जांच अधिकारी ने 35 खातों के अलावा एक हजार की सूची को देखना भी जरूरी नहीं समझा। 35 खातों में नौ खातों में गड़बड़ी को चिह्नित कर इनके खिलाफ समाज कल्याण अधिकारी की ओर से रिकवरी के लिए पत्र भेजने की बात कही है। मजे की बात ये है कि इन नौ लोगों को गड़बड़ तरीके से जारी हुई पेंशन के लिए कहीं निदेशालय, कहीं सीडीओ, कहीं बीडीओ तो कहीं ग्राम प्रधान और सभासद को कठघरे में करने की कोशिश की गई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार गलत लोगों को जारी हुई पेंशन में समाज कल्याण विभाग के किसी भी अधिकारी का कहीं कोई दोष नहीं है, जबकि पेंशन इसी विभाग का है और इसे जारी करने की सारी जिम्मेदारी समाज कल्याण विभाग की है। वहीं विभागीय सूत्रों की माने तो कमिश्नर को नौ खातों में गड़बड़ी की जानकारी दी गई है, वहीं समाज कल्याण विभाग से अपनी गर्दन बचाने के लिए सैकड़ों लाभार्थियों को रिकवरी के लिए पत्र भेजा जा रहा है।
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कोट
शिकायतकर्ता की ओर से सिर्फ 35 लोगों की ही सूची दी गई थी। बाद में कोई सूची नहीं मिली थी। इनमें नौ लोगों को तकनीकि त्रुटि से डबल पेंशन जारी हो रही थी। इस रोककर इनसे रिकवरी की जा चुकी है। घपले जैसी कोई बात नहीं है।
जितेंद्र सिंह, डीडी समाज कल्याण
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35 में नौ दोषी तो हजारों की सूची में कितने?
आजमगढ़। डीडी समाज कल्याण जितेंद्र सिंह की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि उन्होंने अपनी जांच में शिकायत के साथ लगाए गए 35 लोगों की सूची की ही जांच की है। बाद में उपलब्ध कराई गई एक हजार एक हजार लाभार्थियों की सूची पर गौर भी नहीं किया गया। शिकायत में शामिल 35 लोगों की सूची विभाग की ओर से एक लाख से ज्यादा लोगों को उपलब्ध कराई जा रही पेंशन का ही एक हिस्सा था। अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितने लोगों को गलत तरीके से पेंशन भेजी जा रही थी।
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पूर्व में हो चुके हैं कार्रवाई के निर्देश
आजमगढ़। लगभग दो हजार लाभार्थियों को गलत तरीके से पेंशन जारी करने की शिकायत पहले भी जिलाधिकारी से की जा चुकी है। जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने उक्त मामले में समाज कल्याण अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी डीडी समाज कल्याण की जांच में गलत लाभार्थियों का मिलना इस बात को पुष्ट करता है कि जिलाधिकारी के निर्देश के बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
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26 अक्तूबर को भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन के सदस्य अरुण कुमार सिंह ने कमिश्नर से शिकायत की थी कि वर्ष 2014-15 से 2016-17 तक समाज कल्याण अधिकारी राजीव रत्न सिंह की मिलीभगत से लगभग दो हजार ऐसे लोगों को समाजवादी पेंशन दी जा रही है जो गड़बड़ हैं। एक खाते में कई लोगों की पेंशन जारी का जा रही थी और कहीं एक लाभार्थी की पेंशन कई खातों में जा रही थी। कई स्थानों पर पति-पत्नि दोनों को एक ही योजना से लाभान्वित किया जा रहा था। शिकायत के साथ ऐसे 35 खातों की सूची दी गई थी। इसके बाद कमिश्नर के निर्देश पर 10 दिन बाद ही शिकायतकर्ता ने ऐसे एक हजार खातों की सूची भी कमिश्नर को जांच के क्रम में उपलब्ध करा दी थी। कमिश्नर के रविंद्र नायक ने मामले की जांच उप निदेशक समाज कल्याण जितेंद्र सिंह को सौंपी थी। उप निदेशक ने मामले की जांच के बाद रिपोर्ट कमिश्नर को सौंप दी है।
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जांच अधिकारी ने 35 खातों के अलावा एक हजार की सूची को देखना भी जरूरी नहीं समझा। 35 खातों में नौ खातों में गड़बड़ी को चिह्नित कर इनके खिलाफ समाज कल्याण अधिकारी की ओर से रिकवरी के लिए पत्र भेजने की बात कही है। मजे की बात ये है कि इन नौ लोगों को गड़बड़ तरीके से जारी हुई पेंशन के लिए कहीं निदेशालय, कहीं सीडीओ, कहीं बीडीओ तो कहीं ग्राम प्रधान और सभासद को कठघरे में करने की कोशिश की गई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार गलत लोगों को जारी हुई पेंशन में समाज कल्याण विभाग के किसी भी अधिकारी का कहीं कोई दोष नहीं है, जबकि पेंशन इसी विभाग का है और इसे जारी करने की सारी जिम्मेदारी समाज कल्याण विभाग की है। वहीं विभागीय सूत्रों की माने तो कमिश्नर को नौ खातों में गड़बड़ी की जानकारी दी गई है, वहीं समाज कल्याण विभाग से अपनी गर्दन बचाने के लिए सैकड़ों लाभार्थियों को रिकवरी के लिए पत्र भेजा जा रहा है।
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शिकायतकर्ता की ओर से सिर्फ 35 लोगों की ही सूची दी गई थी। बाद में कोई सूची नहीं मिली थी। इनमें नौ लोगों को तकनीकि त्रुटि से डबल पेंशन जारी हो रही थी। इस रोककर इनसे रिकवरी की जा चुकी है। घपले जैसी कोई बात नहीं है।
जितेंद्र सिंह, डीडी समाज कल्याण
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35 में नौ दोषी तो हजारों की सूची में कितने?
आजमगढ़। डीडी समाज कल्याण जितेंद्र सिंह की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि उन्होंने अपनी जांच में शिकायत के साथ लगाए गए 35 लोगों की सूची की ही जांच की है। बाद में उपलब्ध कराई गई एक हजार एक हजार लाभार्थियों की सूची पर गौर भी नहीं किया गया। शिकायत में शामिल 35 लोगों की सूची विभाग की ओर से एक लाख से ज्यादा लोगों को उपलब्ध कराई जा रही पेंशन का ही एक हिस्सा था। अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितने लोगों को गलत तरीके से पेंशन भेजी जा रही थी।
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पूर्व में हो चुके हैं कार्रवाई के निर्देश
आजमगढ़। लगभग दो हजार लाभार्थियों को गलत तरीके से पेंशन जारी करने की शिकायत पहले भी जिलाधिकारी से की जा चुकी है। जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने उक्त मामले में समाज कल्याण अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी डीडी समाज कल्याण की जांच में गलत लाभार्थियों का मिलना इस बात को पुष्ट करता है कि जिलाधिकारी के निर्देश के बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।