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केंद्र सरकार की मंशा पर पानी फेरती रही सरकार
Updated Fri, 07 Jul 2017 12:11 AM IST
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आजमगढ़। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना राष्ट्रीय स्वच्छता मिशन की शुरुआत दो अक्टूबर 2014 को हुई। पूरे देश के साथ ही जनपद में भी इस योजना पर काम शुरू हुआ लेकिन तीन वर्ष बीतने के बाद भी इस महत्वाकांक्षी योजना बीती सरकार की उदासीनता से जनपद में परवान नहीं चढ़ सकी। जिसका परिणाम है कि 2015-16 और 2016-17 में ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम के लिए अनुमोदित राशि का आधा भी खर्च नहीं हो सका।
केंद्र में सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वच्छता मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजना का शुभारंभ किया। इसके तहत शहर से लेकर गांव तक साफ-सफाई और शौचालय का निर्माण कराना था। लोगों को खुले शौच से मुक्ति दिलानी थी। ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम के तहत राज्यों को गांवों में इस योजना को परवान चढ़ाना था। जिस समय यह योजना शुरू हुई उस समय उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी लेकिन योजना परवान नहीं चढ़ी। परिणामत: आजमगढ़ में ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम के लिए अनुमोदित धन का आधा पैसा भी खर्च नहीं हो सका। विगत दो वर्षों के अनुमोदित और खर्च हुए धन की स्थिति पर गौर करें तो यह स्थिति स्पष्ट हो जाती है। 2015-16 में ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम के लिए 5720.57 लाख रुपये अनुमोदित हुए। जिसमें से मात्र 1265.00 लाख रुपये की व्यय किए जा सके। वहीं 2016-17 में 8683.06 लाख रुपये ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम के लिए अनुमोदित हुआ। जिसमें से 1269.56 लाख रुपये ही व्यय किए जा सके। अधिकारियों की मानें तो सरकार ने बजट का अनुमोदन तो किया लेकिन जितने बजट का अनुमोदन किया वह हमें पूरा मिला ही नहीं। अधिकारियों का यह कहना सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है।
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ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम तहत जिला पंचायती राज विभाग को जो धन मिला था हमने उसे खर्च कर दिया। सरकार ने इस कार्यक्रम के तहत जितने बजट का अनुमोदन किया उतना हमें नहीं मिला। इसलिए जितना मिला उतना हमने खर्च किया।
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- जितेंद्र कुमार मिश्रा, जिला पंचायत राज अधिकारी।
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केंद्र में सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वच्छता मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजना का शुभारंभ किया। इसके तहत शहर से लेकर गांव तक साफ-सफाई और शौचालय का निर्माण कराना था। लोगों को खुले शौच से मुक्ति दिलानी थी। ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम के तहत राज्यों को गांवों में इस योजना को परवान चढ़ाना था। जिस समय यह योजना शुरू हुई उस समय उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी लेकिन योजना परवान नहीं चढ़ी। परिणामत: आजमगढ़ में ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम के लिए अनुमोदित धन का आधा पैसा भी खर्च नहीं हो सका। विगत दो वर्षों के अनुमोदित और खर्च हुए धन की स्थिति पर गौर करें तो यह स्थिति स्पष्ट हो जाती है। 2015-16 में ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम के लिए 5720.57 लाख रुपये अनुमोदित हुए। जिसमें से मात्र 1265.00 लाख रुपये की व्यय किए जा सके। वहीं 2016-17 में 8683.06 लाख रुपये ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम के लिए अनुमोदित हुआ। जिसमें से 1269.56 लाख रुपये ही व्यय किए जा सके। अधिकारियों की मानें तो सरकार ने बजट का अनुमोदन तो किया लेकिन जितने बजट का अनुमोदन किया वह हमें पूरा मिला ही नहीं। अधिकारियों का यह कहना सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है।
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ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम तहत जिला पंचायती राज विभाग को जो धन मिला था हमने उसे खर्च कर दिया। सरकार ने इस कार्यक्रम के तहत जितने बजट का अनुमोदन किया उतना हमें नहीं मिला। इसलिए जितना मिला उतना हमने खर्च किया।
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- जितेंद्र कुमार मिश्रा, जिला पंचायत राज अधिकारी।