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22 लाख खर्च, फिर भी नहीं हुआ उत्पादन

Thu, 31 Mar 2022 12:30 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 31 Mar 2022 12:30 AM IST
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22 lakhs spent, still no production
सरकार ने जिले में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सगड़ी तहसील के अजमतगढ़ कस्बा में 22 लाख की लागत से हैचरी का निर्माण तो करवा दिया, लेकिन अभी तक हैचरी में एक भी मत्स्य बीज का उत्पादन नहीं हुआ। वर्तमान समय में 22 लाख की हैचरी शो-पीस बनकर रह गई है। जबकि हैचरी की क्षमता 15 लाख स्पान (जीरा) तैयार करने की है। अगर हैचरी बढ़िया से काम करने लगे तो मत्स्य क्षेत्र में जिले को काफी लाभ मिलता। इससे मछुआरों को स्पान के लिए अन्य जिलों का चक्कर नहीं लगाना पड़ता।
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वर्ष 2008-09 में यूपी प्रोजेक्ट पावर कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा अजमतगढ़ बाजार में हैचरी का निर्माण कराया गया। इसमें ओवरहेड टैंक, ट्रेनिंग हाल, टैंक का कार्य, एक फ्रुटपांड, एक रियरिंगपिड, सबमर्सिबल, डीजल पंपिग सेट बनाकर लैस कर दिया गया। तब मछुआरों को आस जगी कि अब उन्हें मत्स्य बीज के लिए कहीं चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। लेकिन बनने के साथ ही पूरी की पूरी हैचरी कूड़ेदान व गंदगी में तब्दील हो गई। हालात यह हुआ कि पूरी हैचरी पशुओं का चारागाह बन गया। हैचरी में गंदगी ही गंदगी व्याप्त हो गई। सरकार की लाखों रुपये पर पानी फिरने लगा। पैसे व स्टाफ के अभाव में पूरी हैचरी की देखरेख नहीं हो पा रही है। मछली के बीज के लिए किसान कार्यकारी अधिकारी मत्स्य अंगद यादव के मोबाइल नंबर 8808827184 पर मत्स्य के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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यह होती है मछली पालन की हैचरी
आजमगढ़। हैचरी की क्षमता 15 लाख स्पान की है। हैचरी में मछली डालते हैं और नर-मादा दोनों को ‘ओवाप्रिग’ इंजेक्शन लगाते हैं। चार-छह घंटे बाद मछलियां अंडा देने लगती है और बारह से चौबीस घंटे के अंदर फुटहैचिंग हो जाती है। हैचिंग में दो से लेकर तीन दिन तक जीरा घूमते रहते हैं। इसके बाद हैचरी से निकालकर उन्हें तालाब में स्थानांतरित कर दिया जाता है। यह स्थान प्रक्षेत्र से 10-15 दिन के अंतराल पर मत्स्य बीज आपूर्ति योग्य हो जाते हैं।
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8.03 लाख चाइना बीज की हो चुकी है आपूर्ति
आजमगढ़। वर्ष 2012-13 में 8.03 लाख मत्स्य प्रक्षेत्र अजमतगढ़ से रोहु, भांकुर एवं कामनकार्प (चाइना) के बीज आपूर्ति किए जा चुके है। भविष्य में ग्रासकार्प, सिल्वरकार्प एवं रोहु, भाकुर, नैन के मत्स्य बीज वर्ष 2021-22 की मत्स्य बीज वितरण की आपूर्ति की कार्रवाई जुलाई-अगस्त सितंबर माह में की जाएगी। जो मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य विभाग अंगद यादव ने बताया कि कोविड-19 तीन से चार लाख मत्स्य बीज वितरण विगत 3 सालों में हुआ है वहीं पूर्व में 8 लाख मत्स्य बीज का वितरण किया जा चुका।

18 तालाबों में नहीं है पानी
आजमगढ़। हैचरी में कुल 18 तालाबों का निर्माण कराया गया है। सबसे दुखद बात तो यह है कि इनमें से किसी तालाब में भी पानी नहीं है। इनमें अजमतगढ़-नदवासराय स्थित तालाब को कूड़ेदान बनाया गया है। जो पूरी तरह से कूड़े कचरे से पटा हुआ है।
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