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एडीए को पता नहीं और बस गई कालोनियां

Mon, 10 Dec 2018 12:52 AM IST
Updated Mon, 10 Dec 2018 12:52 AM IST
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एडीए को पता नहीं और बस गई कालोनियां
आजमगढ़। शहर के समुचित विकास के लिए वर्ष 2008 में आजमगढ़ विकास प्राधिकरण का गठन हुआ लेकिन जनपद का सुनियोजित विकास होने के बजाए बेतरतीब तरीके से शहर का विकास होता रहा। एडीए के अधिकारियों और कर्मचारियों ने इसे अपनी कमाई का जरिया बना लिया। जिसका परिणाम हुआ कि जनपद में दर्जनों अवैध कालोनियां विकसित हो गईं। जिन भवनों के ध्वस्तीकरण का आदेश एडीए द्वारा जारी किया गया, उनमें व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो गईं और एडीए के अधिकारी कर्मचारी सब कुछ होते देखते रहे। वर्ष 2008 में जब आजमगढ़ विकास प्राधिकरण का गठन हुआ तो लोगों ने यह उम्मीद जताई कि अब शहर का सुनियोजित तरीके से विकास होगा लेकिन यह उम्मीद धराशाई हो गई क्योंकि एडीए सिर्फ मानचित्र पास करने में जुट गया। नगर के ग्रीन लैंड एरिया में बने एक होटल, एक अस्पताल के निर्माण को एडीए ने रोका था लेकिन आज होटल और अस्पताल का निर्माण पूरा हो चुका है। इनमें व्यावसायिक गतिविधि भी शुरू हो चुकी है। अभी भी ग्रीनलैंड में कई ऐसे निर्माण हैं, जिन्हें एडीए ने नोटिस जारी कर रोक रखा है लेकिन उक्त लोग भी निर्माण की जुगत में जुटे हैं। एडीए की लापरवाही का नतीजा रहा कि जिले में एक समय अपंजीकृत बिल्डरों की बाढ़ सी आ गई। इन बिल्डरों ने नगर के चारों तरफ देवखरी, भवरनाथ, बिजरवा, जाफरपुर, मुंडा, मुनरासराय, इटौरा, कोलघाट, बवाली मोड़, सिधारी, छतवारा, तिवारीपुर, सम्मोपुर, रेलवे स्टेशन, बेलइसा, नीबी, बैठौली बाइपास आदि जगहों पर अवैध कालोनियां बसा दी। जब एडीए को पता चला तो इन जगहों पर बड़ी-बड़ी इमारतें बनकर तैयार हो चुकी थी। एडीए ने इनको नोटिस जारी किया ेकिन उनसे कंपाउंड फीस जमाकर छोड़ रखा है। ऐसी जगहों पर निर्माण कराने वालों केे अब नई महायोजना के लागू होने का इंतजार है। उन्हें उम्मीद है कि नई महायोजना में लैंड यूज परिवर्तित होगा और उन्हें इसका फायदा होगा।
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अवैध कालोनियां आजमगढ़ की ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की समस्या है। इसके लिए सरकार को ही कोई निदान निकालना होगा। वैसे जो ग्रीनलैंड में अवैध निर्माण हैं, जिनके ध्वस्तीकरण का आदेश पूर्व में हो चुका है। उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। जल्द ही रणनीति बनाकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। शासन से अवैध कालोनियों की सूचना भी मांगी गई है, इसे भेजा जा रहा है। - देवबचन राम, एई एडीए
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