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मृदा परीक्षण के बारे में किसानों को दी गई जानकारी
Updated Fri, 16 Feb 2018 12:17 AM IST
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बूढनपुर। कोयलसा विकास खंड परिसर में गुरुवार को किसानों के लिए मृदा परीक्षण संबंधी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें मृदा परीक्षण अधिकारी हरिगेन राम द्वारा किसानों को मृदा परीक्षण के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही इसके महत्व के बारे में भी बताया गया।
उन्होंने बताया कि जिस तरह से व्यक्ति नियमित रूप से अपने शरीर की जांच कराता है। ठीक उसी प्रकार से समय-समय पर मिट्टी की भी जांच होनी चाहिए। जांच से यह पचा चलता है कि मिट्टी में किस तत्व की कमी है। उसे किस रासायनिक और जैविक खाद के प्रयोग से पूरा किया जा सकता है। साथ ही खादों के नुकसान से बचा जा सकता है कम लागत पर ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। मृदा की उत्पादन क्षमता उसकी उर्वरा शक्ति पर निर्भर करती है। पौधे अपने विकास और बढ़वार के लिए आवश्यक पोषक तत्व मृदा से प्राप्त करते हैं। पौधों को इन तत्वों की आवश्यकता फसल की किस्म और उससे प्राप्त की जाने वाली उपज के स्तर पर निर्भर करती है। उपज प्राप्ति का लक्ष्य जितना बड़ा होगा इन तत्वों की उतनी ही अधिक मात्रा की आवश्यकता होगी। मृदा में इन तत्वों की मात्रा सही अनुपात में होने पर ही अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती है। मृदा की उर्वरा शक्ति प्रबंधन के लिए उपलब्ध पोषक तत्वों के प्रकार और मात्रा की जानकारी होनी चाहिए। फसल विशेष के लिए उपलब्ध तत्वों की आवश्यक मात्रा का प्रबंध इस तरह से होना चाहिए कि मृदा की उर्वरा शक्ति का ह्रास न हो, साथ ही पौधों को संतुलित पोषण प्राप्त हो और उर्वरकों के संतुलित प्रयोग से मृदा, पौधों और पर्यावरण पर होने वाले दुष्परिणामों को कम किया जा सके। इस मौके पर संतोष कुमार, रूपचंद, हरिश्चंद्र, देवेंद्र, अशोक, हिमांशु पांडेय, रीशु सिंह आदि उपस्थित थे।
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उन्होंने बताया कि जिस तरह से व्यक्ति नियमित रूप से अपने शरीर की जांच कराता है। ठीक उसी प्रकार से समय-समय पर मिट्टी की भी जांच होनी चाहिए। जांच से यह पचा चलता है कि मिट्टी में किस तत्व की कमी है। उसे किस रासायनिक और जैविक खाद के प्रयोग से पूरा किया जा सकता है। साथ ही खादों के नुकसान से बचा जा सकता है कम लागत पर ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। मृदा की उत्पादन क्षमता उसकी उर्वरा शक्ति पर निर्भर करती है। पौधे अपने विकास और बढ़वार के लिए आवश्यक पोषक तत्व मृदा से प्राप्त करते हैं। पौधों को इन तत्वों की आवश्यकता फसल की किस्म और उससे प्राप्त की जाने वाली उपज के स्तर पर निर्भर करती है। उपज प्राप्ति का लक्ष्य जितना बड़ा होगा इन तत्वों की उतनी ही अधिक मात्रा की आवश्यकता होगी। मृदा में इन तत्वों की मात्रा सही अनुपात में होने पर ही अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती है। मृदा की उर्वरा शक्ति प्रबंधन के लिए उपलब्ध पोषक तत्वों के प्रकार और मात्रा की जानकारी होनी चाहिए। फसल विशेष के लिए उपलब्ध तत्वों की आवश्यक मात्रा का प्रबंध इस तरह से होना चाहिए कि मृदा की उर्वरा शक्ति का ह्रास न हो, साथ ही पौधों को संतुलित पोषण प्राप्त हो और उर्वरकों के संतुलित प्रयोग से मृदा, पौधों और पर्यावरण पर होने वाले दुष्परिणामों को कम किया जा सके। इस मौके पर संतोष कुमार, रूपचंद, हरिश्चंद्र, देवेंद्र, अशोक, हिमांशु पांडेय, रीशु सिंह आदि उपस्थित थे।
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