{"_id":"5bc775b3bdec22693b0230ec","slug":"201539798451-azamgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गौशाला निर्माण के लिए मकरहा में मिली जमीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गौशाला निर्माण के लिए मकरहा में मिली जमीन
Updated Wed, 17 Oct 2018 11:38 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आजमगढ़। जिले में गौशाला के निर्माण के लिए शासन की ओर से एक करोड़ 20 लाख रुपये जिला प्रशासन को प्राप्त हो चुका है। जिला प्रशासन द्वारा काफी दिनों से एक हेक्टेअर भूमि की तलाश की जा रही है। जो अब पूरी हो चुकी है। अतरौलिया विकास खंड के मकरहा में जिला प्रशासन को आठ हेक्टेअर ऊसर और बंजर की जमीन मिली है। जिसकी रिपोर्ट एसडीएम बूढ़नपुर से मांगी गई है। प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद पशुओं के वध पर रोक लगने से प्रदेश में शहर से लेकर गांव तक छुट्टा पशुओं की बाढ़ सी आ गई। इन छुट्टा पशुओं को उचित स्थान मुहैया कराने के लिए सरकार ने प्रत्येक जनपद में गौशाला निर्माण कराने का निर्णय लिया। इसके लिए शासन स्तर से जिला प्रशासन को एक करोड़ 20 लाख रुपये प्राप्त हुए। पैसा आने के बाद जमीन की तलाश शुुरू हुई। पहले यह जमीन देखी गई थी। लेकिन जमीन का क्षेत्र मात्र .29 हेक्टेअर था। जबकि शासन का निर्देश है कि एक हेक्टेअर भूमि में गो संरक्षण केंद्र का निर्माण कराया जाए। इसके बाद जिला प्रशासन दूसरी जमीन की तलाश में जुट गया। काफी तलाश के बाद प्रशासन को बूढ़नपुर तहसील क्षेत्र के मकरहा में आठ हेक्टेअर ऊसर, बंजर और चारागाह की जमीन मिली है। प्रशासन इस जमीन के लिए प्रयास में जुट गया है। जिसके लिए एसडीएम बूढ़नपुर को पत्र जारी कर रिपोर्ट मांगी गई है।
गो संरक्षण योजना के तहत केंद्र में कर्मचारियों के रहने के लिए आवास, भूसा स्टोर, पानी की टंकी, पशुओं के चारे की व्यवस्था आदि की जाएगी। इन केंद्रों में उन निराश्रित पशुओं को रखा जाएगा जिन्हें लोगों द्वारा छुट्टा छोड़ दिया जाता है। यहां उनके लिए सारी सुविधाएं होंगी।
गो संरक्षण केंद्र के लिए पांच स्थानों पर जमीन देखी गई थी। इनमें से मकरहा गांव स्थित जमीन को गो संरक्षण केंद्र के लिए चुना गया है। जिसकी रिपोर्ट एसडीएम बूढ़नपुर से मंगाई जा रही है। इसका पैसा पहले ही आ चुका है। इसलिए जमीन फाइनल होते ही निर्माण शुरू हो जाएगा।
विज्ञापन
डा. वीके सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।
कान्हा गोशाला निर्माण को शासन सख्त, तत्काल मांगा प्रस्ताव
आजमगढ़। भाजपा सरकार बनने के बाद नगर निकायों में लावारिस पशुओं के लिए कान्हा गोशाला एवं पशु शेल्टर होम बनाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद भी अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। शासन ने ऐसे निकायों पर नकेल कसा है। सभी से तत्काल प्रस्ताव तलब किए गए हैं।
प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद गोकशी आदि के मामलों में काफी प्रभावी रोक लगी है। इसके साथ ही लावारिस पशुओं की संख्या में इजाफा होने लगा है। इसका भी सीधा नुकसान किसानों और शहरवासियों को होने लगा है। इसके मद्देनजर शासन की ओर शहर क्षेत्र में लावारिस पशुओं के लिए कान्हा गोशाला योजना शुरू की गई थी। गोशालाएं खोलने के लिए नगर निकायों को अपनी गैर विवादित जमीनों का इस्तेमाल करना था। जमीन न होने पर डीएम को इसकी व्यवस्था करनी थी। गोशालाओं में इलाज की पूरी व्यवस्था भी रखनी थी। पालिकाओं के अलावा और नगर पंचायतों में इसे खोलने का प्रस्ताव था। कुछ निकायों ने जिला प्रशासन से जमीन की मांग की, लेकिन जमीन नहीं मिलने से योजना अगर में लटक गई। शासन ने ऐसे निकायों पर नकेल कसा है। सभी से तत्काल प्रस्ताव तलब किए गए हैं। एडीएम प्रशासन नरेंद्र सिंह ने बताया कि सभी निकायों से तुरंत प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। अन्यथा इसके बारे में शासन को लिखा जाएगा।
विज्ञापन
गो संरक्षण योजना के तहत केंद्र में कर्मचारियों के रहने के लिए आवास, भूसा स्टोर, पानी की टंकी, पशुओं के चारे की व्यवस्था आदि की जाएगी। इन केंद्रों में उन निराश्रित पशुओं को रखा जाएगा जिन्हें लोगों द्वारा छुट्टा छोड़ दिया जाता है। यहां उनके लिए सारी सुविधाएं होंगी।
विज्ञापन
गो संरक्षण केंद्र के लिए पांच स्थानों पर जमीन देखी गई थी। इनमें से मकरहा गांव स्थित जमीन को गो संरक्षण केंद्र के लिए चुना गया है। जिसकी रिपोर्ट एसडीएम बूढ़नपुर से मंगाई जा रही है। इसका पैसा पहले ही आ चुका है। इसलिए जमीन फाइनल होते ही निर्माण शुरू हो जाएगा।
विज्ञापन
डा. वीके सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।
कान्हा गोशाला निर्माण को शासन सख्त, तत्काल मांगा प्रस्ताव
आजमगढ़। भाजपा सरकार बनने के बाद नगर निकायों में लावारिस पशुओं के लिए कान्हा गोशाला एवं पशु शेल्टर होम बनाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद भी अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। शासन ने ऐसे निकायों पर नकेल कसा है। सभी से तत्काल प्रस्ताव तलब किए गए हैं।
प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद गोकशी आदि के मामलों में काफी प्रभावी रोक लगी है। इसके साथ ही लावारिस पशुओं की संख्या में इजाफा होने लगा है। इसका भी सीधा नुकसान किसानों और शहरवासियों को होने लगा है। इसके मद्देनजर शासन की ओर शहर क्षेत्र में लावारिस पशुओं के लिए कान्हा गोशाला योजना शुरू की गई थी। गोशालाएं खोलने के लिए नगर निकायों को अपनी गैर विवादित जमीनों का इस्तेमाल करना था। जमीन न होने पर डीएम को इसकी व्यवस्था करनी थी। गोशालाओं में इलाज की पूरी व्यवस्था भी रखनी थी। पालिकाओं के अलावा और नगर पंचायतों में इसे खोलने का प्रस्ताव था। कुछ निकायों ने जिला प्रशासन से जमीन की मांग की, लेकिन जमीन नहीं मिलने से योजना अगर में लटक गई। शासन ने ऐसे निकायों पर नकेल कसा है। सभी से तत्काल प्रस्ताव तलब किए गए हैं। एडीएम प्रशासन नरेंद्र सिंह ने बताया कि सभी निकायों से तुरंत प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। अन्यथा इसके बारे में शासन को लिखा जाएगा।