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31 लाख के गबन में डीआईओएस और डीएमओ पर कार्रवाई दबा गए अधिकारी

Fri, 27 Apr 2018 11:48 PM IST
Updated Fri, 27 Apr 2018 11:48 PM IST
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31 लाख के गबन में डीआईओएस और डीएमओ पर कार्रवाई दबा गए अधिकारी
आजमगढ़। वर्ष 2014 में जिस गबन का नाम लेकर मिल्लत गर्ल्स इंटर कालेज के छात्राओं की छात्रवृत्ति रोक दी गई, उस 31 लाख के गबन में डीआईओएस कार्यालय और अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों को भी दोषी बताया गया था। मिलीभगत से इस गबन को अंजाम दिया गया था। तत्कालीन डीआईओएस ने सिर्फ प्रधानाचार्य पर एफआईआर कराई तो वहीं विभागीय कार्रवाई को अधिकारी दबा ले गए। अब मामला फिर उछलने पर इन अधिकारियों पर कार्रवाई की फंदा मंडराने लगा है।
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मिल्लत गर्ल्स इंटर कालेज मुबारकपुर की छात्राओं की वर्ष 2017-18 की छात्राओं की छात्रवृत्ति जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की ओर से ये कहते रोक दी गई है कि 2007 से 12 तक कालेज में छात्रवृत्ति में गंभीर वित्तीय अनियमितता हुई है। इसलिए छात्राओं के फार्म को अग्रसारित ही नहीं किया गया। वर्ष 2014 में मुबारकपुर के डॉ. शमीम अहमद और आमिर फहीम ने जिलाधिकारी से शिकायत की थी कि मिल्लत गर्ल्स इंटर कालेज की तत्कालीन प्रबंधक नसरीन बानो ने हमारी बेटी उसका कल योजना के तहत छात्रवृत्ति में फर्जीवाड़ा किया है। मामले की जांच जिला अर्थ में संख्याधिकारी डॉ. अर्चना सिंह ने की तो पता चला कि तत्कालीन प्रधानाचार्य नसरीन बानो ने ड्यटी के दौरान ही केडीएस इंटर कालेजबरडीहा से दूसरे की फोटो लगा हाईस्कूल कर लिया। इसके साथ ही जिस कालेज की प्रिंसिपल थीं उसी की छात्रा बनकर हमारी बेटी उसका कल योजना के तहत 30 हजार का भुगतान ले लिया। इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत फर्जी अभिलेखों के आधार पर लगभग 31 लाख की छात्रवृत्ति का गबन किया गया। गबन में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और डीआईओएस कार्यालय के तत्कलीन अधिकारियों की मिलीभगत की भी पुष्टि की गई थी। इसके बाद सिर्फ तत्कालीन प्रिंसिपल आजमी नसरीन बानो पर एफआईआर कर मामले को खत्म कर दिया गया। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मामले की जांच एडीएसटीओ सुनील सिंह के पास है। उन्होंने बताया कि पहले भी विभागों को दोषी बताया गया था। अब फिर से रिपोर्ट जिलाधिकारी को दी जाएगी।
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