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रोशनगंज के कटान पीड़ितों ने तहसील पर किया प्रदर्शन
Updated Wed, 20 Sep 2017 11:31 PM IST
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सगड़ी। हरैया ब्लाक के ग्राम सभा रोशनगंज के दर्जनों कटान पीड़ित बुधवार को तहसील पहुंचे और मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने ग्राम प्राधनो द्वारा आवास, राशनकार्ड नही देने का आरोप लगाया। ज्ञापन सौंप कर वर्ष 2010 से अब तक मिले आवासों और राशनकार्डो की जांच कर कार्यवाही की मांग की।
बुधवार को दोपहर में लगभग 12 बजे ट्रैक्टर-ट्राली से ग्रामसभा रोशनगंज के दर्जनों ग्रामीण तहसील पहुंचे। मांगों को लेकर ग्रामीणों ने जमकर प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए पूर्व और वर्तमान प्रधान पर आवास और राशनकार्ड नहीं देने का आरोप लगाया, ज्ञापन सौंप जांच कराने की मांग की। तहसीलदार प्रेम प्रकाश राय ने जांच कर कार्यवाही करने का आश्वासन दिया। वहीं ग्राम प्रधान रामबचन यादव ने कहा कि रोशनगंज वर्ष 1990 की बाढ़ में कट गया था, तब आबादी लगभग 4000 से ऊपर थी और वर्तमान में कुल आबादी लगभग 2000 है। जबकि वोटरों की संख्या 3654 है। कटान से विस्थापितों को आराजी देवारा करखिया पकड़िहवा में एक कालोनी बनाकर सरकार ने बसा दिया। लेकिन लोग अब भी नियमो को ताख पर रख कर दो जगह वोटर है और तमाम सुविधाएं ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि जांच हो जाए तो सच सामने आ जाएगा। इसी ब्लाक के बहावनपुर के ग्रामीणों पात्रता सूची गलत बनाने और पुन: जांच कर नई सूची जारी करने की मांग की। इस मौके पर प्रभावती, द्रौपदी, सुमन, राधिका, शांति, फुला, हरिशचंद्र, रामप्रीत, पुरुषोत्तम, रामकेर, दिनेश, प्रेमा आदि ग्रामीण मौजूद रहे।
सेमरी में घाघरा की विनाशलीला शुरु
लाटघाट(ब्यूरो)। सगड़ी तहसील क्षेत्र के उत्तर बहने वाली घाघरा नदी का जलस्तर धीरे-धीरे घटने लगा है। लेकिन अब कटान ने तबाही शुरु कर दी है। सेमरी गांव अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। अब तक गांव की 1600 बीघा कृषि योग्य भूमि घाघरा में समा चुकी है। ग्रामीण दशहत में हैं।
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घाघरा नदी घटने लगी है। लेकिन कटान ने तबाही मचा रखी है। सेमरी गांव का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है। किसानों की आजीविका का साधन खेत घाघरा में धीरे-धीरे विलीन होती जा रही है। अब तक सेमरी गांव के लोहरैया में कृषि योग्य भूमि 900 बीघा, तिगरा में 200 बीघा, सेमरी के पूर्वी भाग में 400 बीघा, चंद्रहा में 100 बीघा जमीन घाघरा में समा गई है। इतना ही नहीं लोहरैया बस्ती के 42 घर, सेमरी के 15 घर और चंद्रहा के 15 घर घाघरा के धारा में विलीन हो चुकी हैं। घाघरा नदी ने लोहरैया, सेमरी, चंद्रहा को वीरान कर दिया है। कटान की जद में आए ग्रामीण अपने घरों को उजाड़ कर कटया गोरखपुर बंधे पर बसेरा निवास बनाए हुए हैं। सेमरी गांव के केवटहिया बस्ती के छोटेलाल, बालचंद, हरमोहन, प्रकाश, लालजी राम, कोमल, रामधारी, लालधारी, दयानाथ, प्रहलाद, चंद्रिका, जय राम,श्री राम, के घर कटान के मुहाने पर हैं। कटान ने उन्हें बेचैन कर रखा है। ग्राम प्रधान दशरथ निषाद का कहना है कि हमने कई बार तहसीलदार और एसडीएम सगड़ी को लिखित रूप से समस्या से अवगत कराया। लेकिन पीड़ितों को कोई मदद नहीं मिली। इस संबंध में तहसीलदार सगड़ी पीके राय ने कहा कि लेखपाल को लगाया गया है, सर्वे हो रहा है, रिपोर्ट मिलने के बाद पीड़ितों को मुआवजा दिया जाएगा।
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बुधवार को दोपहर में लगभग 12 बजे ट्रैक्टर-ट्राली से ग्रामसभा रोशनगंज के दर्जनों ग्रामीण तहसील पहुंचे। मांगों को लेकर ग्रामीणों ने जमकर प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए पूर्व और वर्तमान प्रधान पर आवास और राशनकार्ड नहीं देने का आरोप लगाया, ज्ञापन सौंप जांच कराने की मांग की। तहसीलदार प्रेम प्रकाश राय ने जांच कर कार्यवाही करने का आश्वासन दिया। वहीं ग्राम प्रधान रामबचन यादव ने कहा कि रोशनगंज वर्ष 1990 की बाढ़ में कट गया था, तब आबादी लगभग 4000 से ऊपर थी और वर्तमान में कुल आबादी लगभग 2000 है। जबकि वोटरों की संख्या 3654 है। कटान से विस्थापितों को आराजी देवारा करखिया पकड़िहवा में एक कालोनी बनाकर सरकार ने बसा दिया। लेकिन लोग अब भी नियमो को ताख पर रख कर दो जगह वोटर है और तमाम सुविधाएं ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि जांच हो जाए तो सच सामने आ जाएगा। इसी ब्लाक के बहावनपुर के ग्रामीणों पात्रता सूची गलत बनाने और पुन: जांच कर नई सूची जारी करने की मांग की। इस मौके पर प्रभावती, द्रौपदी, सुमन, राधिका, शांति, फुला, हरिशचंद्र, रामप्रीत, पुरुषोत्तम, रामकेर, दिनेश, प्रेमा आदि ग्रामीण मौजूद रहे।
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सेमरी में घाघरा की विनाशलीला शुरु
लाटघाट(ब्यूरो)। सगड़ी तहसील क्षेत्र के उत्तर बहने वाली घाघरा नदी का जलस्तर धीरे-धीरे घटने लगा है। लेकिन अब कटान ने तबाही शुरु कर दी है। सेमरी गांव अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। अब तक गांव की 1600 बीघा कृषि योग्य भूमि घाघरा में समा चुकी है। ग्रामीण दशहत में हैं।
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घाघरा नदी घटने लगी है। लेकिन कटान ने तबाही मचा रखी है। सेमरी गांव का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है। किसानों की आजीविका का साधन खेत घाघरा में धीरे-धीरे विलीन होती जा रही है। अब तक सेमरी गांव के लोहरैया में कृषि योग्य भूमि 900 बीघा, तिगरा में 200 बीघा, सेमरी के पूर्वी भाग में 400 बीघा, चंद्रहा में 100 बीघा जमीन घाघरा में समा गई है। इतना ही नहीं लोहरैया बस्ती के 42 घर, सेमरी के 15 घर और चंद्रहा के 15 घर घाघरा के धारा में विलीन हो चुकी हैं। घाघरा नदी ने लोहरैया, सेमरी, चंद्रहा को वीरान कर दिया है। कटान की जद में आए ग्रामीण अपने घरों को उजाड़ कर कटया गोरखपुर बंधे पर बसेरा निवास बनाए हुए हैं। सेमरी गांव के केवटहिया बस्ती के छोटेलाल, बालचंद, हरमोहन, प्रकाश, लालजी राम, कोमल, रामधारी, लालधारी, दयानाथ, प्रहलाद, चंद्रिका, जय राम,श्री राम, के घर कटान के मुहाने पर हैं। कटान ने उन्हें बेचैन कर रखा है। ग्राम प्रधान दशरथ निषाद का कहना है कि हमने कई बार तहसीलदार और एसडीएम सगड़ी को लिखित रूप से समस्या से अवगत कराया। लेकिन पीड़ितों को कोई मदद नहीं मिली। इस संबंध में तहसीलदार सगड़ी पीके राय ने कहा कि लेखपाल को लगाया गया है, सर्वे हो रहा है, रिपोर्ट मिलने के बाद पीड़ितों को मुआवजा दिया जाएगा।