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55 लाख की आबादी में 20.37 लाख लोग गरीब
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आजमगढ़। नीति आयोग द्वारा बहुआयामी गरीबी सूचकांक जारी किया गया है। इस सूचकांक में आजमगढ़ जनपद कम गरीब वाले जनपदों में 22वें स्थान पर है। मंडल के तीनों जनपदों की स्थिति देखें मऊ 21वें और बलिया 35वें स्थान पर है। इस रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि जनपद की लगभग 55 लाख की आबादी में कुल 20.37 लोग गरीब की श्रेणी में शामिल हैं।
नीति आयोग द्वारा जारी बहुआयामी गरीबी सूचकांक के अनुसार बिहार, झारखंड, उप्र, मध्य प्रदेश और मेघालय देश के सबसे गरीब प्रदेशों के रूप में उभरे हैं। वहीं अगर मंडल की बात करें तो गरीबी के मामले में बलिया सबसे ऊपर है। यहां कुल आबादी का 37.11 प्रतिशत गरीब हैं। उसके बाद दूसरा नंबर आजमगढ़ का आता है। जहां गरीबी प्रतिशत 32.77 प्रतिशत है। वहीं मंडल के तीनों जनपदों में सबसे अच्छी स्थिति मऊ जनपद की जनपद की है। यहां गरीबी 32.70 प्रतिशत है। इस प्रकार अगर जनपद में गरीबी की स्थिति देखें तो जनपद की कुल संख्या लगभग 55 लाख है। इसके अनुसार जनपद में गरीबों की संख्या 20 लाख 37 हजार के आसपास है। नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 के आधार पर विकसित गरीबी की बहुआयामिता क्षेत्रीय नीतियों और निर्माण की सुविधा प्रदान करेगी, जो यह सुनिश्चित करने में योगदान करती है कि कोई भी पीछे न रहे। रिपोर्ट में कहा गया, %सतत विकास लक्ष्यों के साथ गरीबी में जीवन यापन करने वाले सभी उम्र के पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के अनुपात को कम करना है। आयोग द्वारा यह रिपोर्ट पोषण, पेयजल, स्वच्छता आदि के आधार पर जारी की है। अगर जनपद में इन पर नजर डालें तो व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने की जरूरत है।
कुपोषण का हाल
छह माह से तीन वर्ष के बच्चे: 275666 पंजीकृत
तीन वर्ष से छह वर्ष के बच्चे: 248006 पंजीकृत
गर्भवती धात्री महिलाएं: 11092 पंजीकृत
अतिकुपोषित बच्चे: 12305
कुपोषित बच्चे: 48225
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नीति आयोग द्वारा जारी बहुआयामी गरीबी सूचकांक के अनुसार बिहार, झारखंड, उप्र, मध्य प्रदेश और मेघालय देश के सबसे गरीब प्रदेशों के रूप में उभरे हैं। वहीं अगर मंडल की बात करें तो गरीबी के मामले में बलिया सबसे ऊपर है। यहां कुल आबादी का 37.11 प्रतिशत गरीब हैं। उसके बाद दूसरा नंबर आजमगढ़ का आता है। जहां गरीबी प्रतिशत 32.77 प्रतिशत है। वहीं मंडल के तीनों जनपदों में सबसे अच्छी स्थिति मऊ जनपद की जनपद की है। यहां गरीबी 32.70 प्रतिशत है। इस प्रकार अगर जनपद में गरीबी की स्थिति देखें तो जनपद की कुल संख्या लगभग 55 लाख है। इसके अनुसार जनपद में गरीबों की संख्या 20 लाख 37 हजार के आसपास है। नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 के आधार पर विकसित गरीबी की बहुआयामिता क्षेत्रीय नीतियों और निर्माण की सुविधा प्रदान करेगी, जो यह सुनिश्चित करने में योगदान करती है कि कोई भी पीछे न रहे। रिपोर्ट में कहा गया, %सतत विकास लक्ष्यों के साथ गरीबी में जीवन यापन करने वाले सभी उम्र के पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के अनुपात को कम करना है। आयोग द्वारा यह रिपोर्ट पोषण, पेयजल, स्वच्छता आदि के आधार पर जारी की है। अगर जनपद में इन पर नजर डालें तो व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने की जरूरत है।
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कुपोषण का हाल
छह माह से तीन वर्ष के बच्चे: 275666 पंजीकृत
तीन वर्ष से छह वर्ष के बच्चे: 248006 पंजीकृत
गर्भवती धात्री महिलाएं: 11092 पंजीकृत
अतिकुपोषित बच्चे: 12305
कुपोषित बच्चे: 48225