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एक भी बर्फ की फैक्ट्री पंजीकृत नहीं, हर चौराहे पर परोसा जा रहा ‘जहर’
Updated Fri, 30 Mar 2018 11:47 PM IST
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आजमगढ़। गर्मी के मौसम में बर्फ, कुल्फी आइसक्रीम की मांग बढ़ जाती है। लेकिन जरा सावधान हो जाए, कहीं आप बर्फ के रुप में ‘जहर’ तो नहीं ले रहे है। क्योंकि जो बर्फ बाजार में मिल रहा है उसे बनाने में कैसे पानी का इस्तेमाल हुआ है। शायद ये कोई नहीं जानता। साथ ही एक भी बर्फ की फैक्ट्री जनपद में पंजीकृत नहीं है।
पूरे जनपद में वैसे तो दर्जनों बर्फ की सिल्ली बनाने वाली फैक्ट्रियां हैं, लेकिन एफडीए के पास किसी का भी पंजीकरण नहीं हैं। हालांकि आइसक्रीम बनाने वाली फैक्ट्रियों ने पंजीकरण करा रखा है, लेकिन कितनी इसकी जानकारी मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी डीके राय को नहीं है। ऐसे में अगर किसी ने गलती से दूषित पानी से बनी बर्फ की सिल्ली या आइसक्रीम का सेवन कर लिया तो उसकी सेहत बिगड़नी तय है। साथ ही कआ नहीं देखता जिस सांचे में आइसक्रीम या बर्फ की सिल्ली बनाई जाती है कहीं वह जंग खाई तो नहीं है। गर्मी शुरू होते ही फलों और गन्ने का शरबत बेचने वालों की भी भरमार हो गई है। इन फलों की जांच कार्य भी लगभग एक माह पूर्व हुआ है। इसमें खाद्य विभाग द्वारा 10 नमूने लिए गए थे और उसे जांच के लिए भेजा गया लेकिन अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है।
दुकानदारों की ओर नहीं रखी जाती सफाई
आजमगढ़। जूस और फलों की दुकान पर सामन बेचने वालों दुकानदारों को दस्ताना पहनना होता है, लेकिन कहीं भी इसका इस्तेमाल नहीं किया जाता है। जूस को ठंडा करने के लिए बिना पंजीकृत फैक्ट्रियों का बर्फ मिला दिया जाता है। कटे फलों को भी ढककर नहीं रखा जाता है। एफडीएम की ओर से भी जांच के नाम पर सिर्फ खानापूरी की जाती है।
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जिले में किसी भी बर्फ बनाने वाली फैक्ट्री का पंजीकरण नहीं है। अलबत्ता आइसक्रीम और कुल्फी बनाने वालों ने पंजीकरण कराया है इसकी जानकारी नहीं है। फलों और सब्जियों के नमूने तो जांच के लिए भेजे जाते हैं। अभी एक माह पूर्व ही 10 फलों के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। एक अप्रैल से फिर जांच का कार्य शुरू होगा। -डीके राय, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी।
बर्फ या आइसक्रीम को बनाने में गंदे पानी के प्रयोग से डायरिया, पीलिया, कालरा आदि बिमारियां हो सकती हैं। जहां तक हो सके इनको खाने से बचें। रही बात उपकरणों के जंग लगने की तो उससे कोई नुकसान नहीं होता है। बल्कि यह आदमी के शरीर के लिए फायदेमंद है लेकिन शर्त यह है कि वह इंफेक्टेड न हो। यह बर्फ या आइसक्रीम बनाने वाले व्यक्ति के ऊपर निर्भर करता है कि उसने कितनी सफाई से कार्य किया है। सांस और एलर्जी के मरीजों को बर्फ का सेवन नहीं करना चाहिए। -डा. राजनाथ, वरिष्ठ फिजिशियन, जिला अस्पताल।
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पूरे जनपद में वैसे तो दर्जनों बर्फ की सिल्ली बनाने वाली फैक्ट्रियां हैं, लेकिन एफडीए के पास किसी का भी पंजीकरण नहीं हैं। हालांकि आइसक्रीम बनाने वाली फैक्ट्रियों ने पंजीकरण करा रखा है, लेकिन कितनी इसकी जानकारी मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी डीके राय को नहीं है। ऐसे में अगर किसी ने गलती से दूषित पानी से बनी बर्फ की सिल्ली या आइसक्रीम का सेवन कर लिया तो उसकी सेहत बिगड़नी तय है। साथ ही कआ नहीं देखता जिस सांचे में आइसक्रीम या बर्फ की सिल्ली बनाई जाती है कहीं वह जंग खाई तो नहीं है। गर्मी शुरू होते ही फलों और गन्ने का शरबत बेचने वालों की भी भरमार हो गई है। इन फलों की जांच कार्य भी लगभग एक माह पूर्व हुआ है। इसमें खाद्य विभाग द्वारा 10 नमूने लिए गए थे और उसे जांच के लिए भेजा गया लेकिन अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है।
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दुकानदारों की ओर नहीं रखी जाती सफाई
आजमगढ़। जूस और फलों की दुकान पर सामन बेचने वालों दुकानदारों को दस्ताना पहनना होता है, लेकिन कहीं भी इसका इस्तेमाल नहीं किया जाता है। जूस को ठंडा करने के लिए बिना पंजीकृत फैक्ट्रियों का बर्फ मिला दिया जाता है। कटे फलों को भी ढककर नहीं रखा जाता है। एफडीएम की ओर से भी जांच के नाम पर सिर्फ खानापूरी की जाती है।
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जिले में किसी भी बर्फ बनाने वाली फैक्ट्री का पंजीकरण नहीं है। अलबत्ता आइसक्रीम और कुल्फी बनाने वालों ने पंजीकरण कराया है इसकी जानकारी नहीं है। फलों और सब्जियों के नमूने तो जांच के लिए भेजे जाते हैं। अभी एक माह पूर्व ही 10 फलों के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। एक अप्रैल से फिर जांच का कार्य शुरू होगा। -डीके राय, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी।
बर्फ या आइसक्रीम को बनाने में गंदे पानी के प्रयोग से डायरिया, पीलिया, कालरा आदि बिमारियां हो सकती हैं। जहां तक हो सके इनको खाने से बचें। रही बात उपकरणों के जंग लगने की तो उससे कोई नुकसान नहीं होता है। बल्कि यह आदमी के शरीर के लिए फायदेमंद है लेकिन शर्त यह है कि वह इंफेक्टेड न हो। यह बर्फ या आइसक्रीम बनाने वाले व्यक्ति के ऊपर निर्भर करता है कि उसने कितनी सफाई से कार्य किया है। सांस और एलर्जी के मरीजों को बर्फ का सेवन नहीं करना चाहिए। -डा. राजनाथ, वरिष्ठ फिजिशियन, जिला अस्पताल।